- सीएसजेएमयू में मैटलैब 3D से सूत्र, ग्राफ और ज्यामितीय आकृतियों को समझने का नया तरीका
भारत 19
विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। अब गणित के मुश्किल सवाल सिर्फ कापी-किताब में लिखे अंक और सूत्र नहीं रहेंगे। जिस समीकरण को समझने के लिए छात्र अब तक ब्लैकबोर्ड पर बने कुछ बिंदुओं और ग्राफ का सहारा लेते रहे हैं, वह अब कंप्यूटर स्क्रीन पर आकार ले सकेगा। गोला बनेगा, परवलय उभरेगा, शंकु घूमेगा और किसी समीकरण में मान बदलते ही उसका असर सामने मौजूद ग्राफ पर दिखाई देगा।
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) में चल रही मैटलैब की एडवांस कार्यशाला में छात्रों को गणित और वैज्ञानिक अवधारणाओं को समझने की इसी नई तकनीक से परिचित कराया गया। मैटलैब 3डी विजुअलाइजेशन के जरिए गणितीय सूत्रों और उनके परिणामों को त्रिआयामी रूप में देखने और समझने का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि छात्र किसी सूत्र को केवल याद करने के बजाय उसके पीछे छिपी आकृति, संरचना और बदलाव को अपनी आंखों के सामने देख सकेंगे। यानी गणित का वह हिस्सा, जो कई छात्रों के लिए अब तक सबसे कठिन और उबाऊ रहा है, उसे समझने का तरीका ज्यादा विजुअल और रुचिकर हो सकता है।
बोर्ड पर बने बिंदुओं से आगे की पढ़ाई
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने उदाहरणों के जरिए समझाया कि वर्तमान में किसी समीकरण के ग्राफ को समझाने के लिए अक्सर ब्लैकबोर्ड पर कुछ बिंदु बनाकर उन्हें जोड़ा जाता है। छात्र उसी द्विआयामी ग्राफ के आधार पर समीकरण की प्रकृति समझने की कोशिश करते हैं। लेकिन मैटलैब के 3डी विजुअलाइजेशन में यही ग्राफ अलग रूप में सामने आ सकता है। छात्र किसी सतह को अलग-अलग कोणों से देख सकते हैं, उसे घुमाकर उसकी बनावट समझ सकते हैं और समीकरण में किसी मान को बदलने पर होने वाले बदलाव को तत्काल देख सकते हैं। यानी अब केवल यह बताने की जरूरत नहीं होगी कि किसी गणितीय सूत्र का परिणाम कैसा दिखता है। छात्र उसे स्क्रीन पर बनते हुए भी देख सकेंगे।
गोला, परवलय और शंकु अब सिर्फ सूत्र नहीं
मसलन, गोले का समीकरण पढ़ते समय छात्र केवल उसका गणितीय सूत्र याद करने तक सीमित नहीं रहेंगे। स्क्रीन पर उस गोले की त्रिआयामी सतह बनते हुए दिखाई जा सकेगी। इसी तरह परवलय, शंकु और दूसरी ज्यामितीय आकृतियों को उनके सूत्रों से जोड़कर समझना आसान हो सकता है। किसी आकृति को एक ही दिशा से देखने के बजाय छात्र उसे अलग-अलग कोणों से देख सकेंगे। इससे सूत्र, ग्राफ और वास्तविक ज्यामितीय संरचना के बीच संबंध को समझने की क्षमता मजबूत होगी। यह तरीका केवल छात्रों के लिए ही उपयोगी नहीं हो सकता, बल्कि शिक्षकों के लिए भी कठिन गणितीय अवधारणाओं को अपेक्षाकृत आसान और रुचिकर तरीके से समझाने में मददगार साबित हो सकता है।
स्क्रीन पर पहाड़, घाटियां, समुद्र और अंतरिक्ष
मैटलैब का इस्तेमाल केवल गणितीय ग्राफ और ज्यामितीय आकृतियों तक सीमित नहीं है। गणितीय आंकड़ों और वैज्ञानिक गणनाओं की मदद से कंप्यूटर स्क्रीन पर पहाड़, घाटियां, समुद्र और अंतरिक्ष जैसी त्रिआयामी दुनिया भी तैयार की जा सकती है। इन दृश्यों की खासियत केवल उनका आकर्षक दिखाई देना नहीं है। इनके पीछे वास्तविक वैज्ञानिक गणनाएं और आंकड़ों का विश्लेषण भी काम कर सकता है। यही वजह है कि अंतरिक्ष विज्ञान, मौसम विज्ञान, रोबोटिक्स, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और मशीन लर्निंग जैसे क्षेत्रों में त्रिआयामी मॉडल और सिमुलेशन का उपयोग बढ़ रहा है।
गणित से आगे वैज्ञानिक दुनिया की तैयारी
कार्यशाला की समन्वयक और स्कूल ऑफ बेसिक साइंसेज की उपनिदेशक डॉ. अंजू दीक्षित ने बताया कि छात्रों को मैटलैब के माध्यम से वैज्ञानिक गणना, डेटा विश्लेषण, सिमुलेशन, प्रोग्रामिंग और समस्या-समाधान की व्यावहारिक जानकारी दी गई। एमएनएनआईटी प्रयागराज के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विभाग के डॉ. संदीप कुमार ने मैटलैब के माध्यम से उन्नत कम्प्यूटेशनल तकनीकों और वैज्ञानिक अनुप्रयोगों पर ऑनलाइन व्याख्यान दिया। वहीं डिजाइन टेक सिस्टम प्राइवेट लिमिटेड के डॉ. वरुण श्रीवास्तव ने छात्रों को मैटलैब प्रोग्रामिंग, सिमुलेशन, कम्प्यूटेशनल अभ्यास और वास्तविक समय में डेटा विश्लेषण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया।


