- बर्रा-गुजैनी के निचले इलाकों में परिवारों ने छोड़े घर, राहत के साथ पुनर्वास पर भी नजर
भारत 19
कानपुर नगर। पांडु नदी से सटे बर्रा और गुजैनी के निचले इलाकों में पानी पहुंचने के बाद करीब 25 से 30 मकान जलभराव की चपेट में आ गए। हालात ऐसे बने कि प्रभावित परिवारों को घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों का रुख करना पड़ा। कोई रिश्तेदारों के यहां पहुंचा, तो कुछ परिवारों ने किराये का सहारा लिया। प्रशासन ने अब राहत व्यवस्था के साथ यह भी देखना शुरू किया है कि नदी के फ्लड प्लेन में रहने वाले इन परिवारों के लिए आगे कोई स्थायी विकल्प निकाला जा सकता है या नहीं।
ज्वाइंट मजिस्ट्रेट एवं एसडीएम सदर अनुभव सिंह ने नगर निगम और सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ प्रभावित क्षेत्र का जायजा लिया। निरीक्षण में सामने आया कि पांडु नदी से सटे निचले हिस्सों में बने करीब 25 से 30 मकान जलभराव से प्रभावित हैं। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर लोगों से उनकी जरूरतों, आवागमन और राहत व्यवस्था के बारे में जानकारी ली।
घर खाली हुए, राहत शिविर भी तैयार
प्रभावित परिवारों में अधिकांश लोग अपने दूसरे आवासों या रिश्तेदारों के यहां चले गए हैं। कुछ परिवारों ने किराये पर रहने की व्यवस्था की है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों के लिए एक कम्पोजिट विद्यालय में राहत शिविर भी तैयार किया गया है। प्रशासन ने राहत किट की मांग भेजी है और संबंधित अधिकारियों को प्रभावित परिवारों के लगातार संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि जलभराव के कारण किसी परिवार को भोजन, पेयजल या अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए परेशानी न उठानी पड़े।
पानी उतरेगा तो गंदगी और संक्रमण की चुनौती
जलभराव से राहत मिलने के बाद भी प्रभावित इलाकों की परेशानी तुरंत खत्म नहीं होगी। पानी उतरने पर कीचड़, कूड़ा और दूषित वातावरण संक्रमण का खतरा बढ़ा सकता है। इसे देखते हुए नगर निगम को प्रभावित क्षेत्रों में विशेष सफाई अभियान चलाने की तैयारी करने को कहा गया है। पानी हटने के बाद गलियों और आसपास के इलाकों की सफाई, कीटाणुनाशक के छिड़काव और आवश्यक दवाओं की व्यवस्था की जाएगी। पेयजल और स्वच्छता की स्थिति पर भी नजर रखने के निर्देश हैं।
अब राहत से आगे पुनर्वास का सवाल
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रशासन ने केवल तत्काल राहत पर ही ध्यान नहीं रखा है। प्रभावित परिवारों की आवासीय स्थिति और उनकी पात्रता की जांच कराने के लिए पीओ डूडा के साथ समन्वय किया जाएगा। पात्र पाए जाने वाले परिवारों को नियमानुसार आवासीय योजनाओं से जोड़ने की कार्रवाई की जा सकती है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पांडु नदी से सटे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति भविष्य में भी जोखिम पैदा कर सकती है। ऐसे में केवल हर बार पानी आने के बाद राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं होगा।
फ्लड प्लेन को लेकर भी होगी कार्रवाई
सिंचाई विभाग को पांडु नदी के फ्लड प्लेन क्षेत्र को सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त रखने की दिशा में कार्रवाई करने को कहा गया है। इससे साफ है कि प्रशासन मौजूदा जलभराव के साथ नदी किनारे संवेदनशील इलाकों में बसावट और भविष्य के जोखिम पर भी नजर रख रहा है।
