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मशरूम प्रोसेसिंग से बढ़ी कमाई, किसान बन रहे उद्यमी

  • पाउडर, कुकीज और स्नैक्स जैसे उत्पादों ने खोला मुनाफे का नया बाजार

भारत 19
विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। मशरूम उगाइए, बेचिए और अगले कुछ दिनों में खराब होने से पहले पूरा स्टॉक निकालने की चिंता कीजिए—मशरूम किसानों की कमाई लंबे समय तक इसी दायरे में सिमटी रही। अब तस्वीर बदल रही है। ताजा मशरूम को सुखाकर पाउडर बनाने से लेकर उससे सूप, कुकीज, नगेट्स, पापड़, नमकीन, सेव, लड्डू, मठरी और प्रोटीन पाउडर जैसे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इससे मशरूम अब केवल एक फसल नहीं, बल्कि किसानों के लिए प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग आधारित कारोबार का नया आधार बन रहा है।
चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) में आयोजित मशरूम प्रशिक्षण कार्यक्रम में भी यही बदलाव प्रमुखता से सामने आया। किसानों को खेती के साथ यह समझाया जा रहा है कि कटाई के बाद मशरूम को किस तरह लंबे समय तक सुरक्षित रखा जाए और उससे ऐसे उत्पाद तैयार किए जाएं, जिनकी बाजार में अलग पहचान और बेहतर कीमत मिल सके।

जल्दी खराब होने वाली फसल बनी वैल्यू एडेड प्रोडक्ट

ताजा मशरूम की सबसे बड़ी चुनौती उसकी कम शेल्फ लाइफ है। कटाई के कुछ ही दिनों में ताजगी कम होने लगती है और समय पर बिक्री न होने पर नुकसान का खतरा बढ़ जाता है। इसी चुनौती ने मशरूम प्रोसेसिंग का रास्ता खोला है। सीएसए के पादप रोग विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. मुकेश श्रीवास्तव के अनुसार, खाद्य उद्योग की जरूरतों के अनुरूप किसानों को मशरूम प्रोसेसिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके बाद हेल्थ ड्रिंक, सूप पाउडर, सूखे मशरूम, स्नैक्स और मशरूम आधारित चॉकलेट जैसे उत्पादों पर काम शुरू हुआ। सूखे मशरूम की पैकिंग कर उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने की तकनीक भी प्रशिक्षण का हिस्सा है। मशरूम उत्पादों की मांग बढ़ने के साथ ऐसे प्रशिक्षण अब साल में तीन से चार बार आयोजित किए जा रहे हैं और अब तक एक हजार से अधिक किसान इसका लाभ ले चुके हैं।

अचार-चटनी से आगे चटपटे उत्पादों का बाजार

मशरूम से बनने वाले उत्पादों की सूची लगातार बढ़ रही है। अचार और चटनी के अलावा मशरूम पेपर फ्राई, मशरूम डुप्लेक्स, मशरूम टिक्का और मशरूम चिली जैसे उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। यानी किसान और छोटे उद्यमी अब केवल उत्पादन पर नहीं, बल्कि उपभोक्ता की पसंद के मुताबिक तैयार खाद्य उत्पादों पर भी काम कर रहे हैं। यही वैल्यू एडिशन किसानों के लिए अधिक कमाई की संभावना पैदा कर रहा है। ताजा मशरूम बेचने में जहां कीमत और समय दोनों का दबाव रहता है, वहीं प्रोसेस्ड उत्पादों को पैक कर लंबे समय तक बाजार में रखा जा सकता है।

उत्पादन बढ़ा, प्रोसेसिंग में अभी बड़ी संभावना

भारत में मशरूम उत्पादन तेजी से बढ़ा है। आईसीएआर और डायरेक्टरेट ऑफ मशरूम रिसर्च की 2024 रिपोर्ट के अनुसार पिछले पांच वर्षों में देश का उत्पादन करीब 1.55 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 3.92 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। लेकिन एक अध्ययन के मुताबिक कुल उत्पादन का केवल लगभग सात प्रतिशत ही मूल्यवर्धित उत्पादों में बदला जाता है। यहीं मशरूम कारोबार के विस्तार की बड़ी संभावना है। उत्पादन बढ़ने के बावजूद यदि उसका बड़ा हिस्सा केवल ताजा रूप में बिकता है, तो प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए किसानों की आय बढ़ाने की गुंजाइश बनी रहती है। आईसीएआर के शोध में मशरूम से बिस्कुट, पापड़, सूप पाउडर, नमकपारा, सेवइयां और नगेट्स जैसे उत्पाद तैयार कर उनकी पोषण गुणवत्ता और शेल्फ लाइफ का परीक्षण किया गया। अध्ययन में मशरूम नगेट्स में 37.7 ग्राम प्रोटीन, मशरूम बिस्कुट में 7.24 ग्राम प्रोटीन, जबकि सूप पाउडर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा 64.5 ग्राम तक दर्ज की गई।

उत्पादन के साथ आय में भी बढ़ोतरी

मशरूम आधारित वैल्यू एडिशन का असर आय पर भी दिख रहा है। एक सर्वे के अनुसार अचार, नमकीन, सेव, लड्डू और मठरी जैसे उत्पाद तैयार कर बाजार में बेचने वाले उद्यम में मशरूम उत्पादन 6.40 क्विंटल से बढ़कर 11 क्विंटल हो गया। इसी दौरान शुद्ध आय 56 हजार रुपये से बढ़कर 1.16 लाख रुपये तक पहुंची। मशरूम किसानों के सामने अब सबसे बड़ा अवसर केवल ज्यादा उत्पादन करना नहीं, बल्कि फसल को सही तरीके से प्रोसेस कर उसकी कीमत बढ़ाना है। सुखाने से पैकेजिंग और स्नैक्स से हेल्थ प्रोडक्ट तक, मशरूम की नई प्रोसेसिंग किसानों को उत्पादक से उद्यमी बनाने का रास्ता खोल रही है।

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