मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी के साथ कैशलेस इलाज और दुर्घटना सहायता; 3.53 लाख रसोइयों को मिलेगा लाभ
भारत 19
राजीव सक्सेना, लखनऊ। परिषदीय और सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन बनाने वाली रसोइयों के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का ताजा फैसला केवल एक हजार रुपये मासिक मानदेय बढ़ाने तक सीमित नहीं है। करीब 3.53 लाख रसोइयों का मानदेय 2,000 से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने के साथ उन्हें स्वास्थ्य और दुर्घटना जैसी परिस्थितियों में भी सुरक्षा देने की व्यवस्था की गई है। पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज और दुर्घटना की स्थिति में दो लाख रुपये की सहायता को मिलाकर सरकार ने कम आय वाले इस बड़े कार्यबल के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा बढ़ाने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित रसोइया सम्मान समारोह में 11 रसोइयों को प्रतीकात्मक रूप से सम्मानित किया और उन्हें कैशलेस चिकित्सा कार्ड दिए। राज्यस्तरीय कार्यक्रम में करीब 1,500 रसोइयों ने भाग लिया, जबकि जिला और तहसील स्तर पर भी सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए गए।
मानदेय में 50 फीसदी की बढ़ोतरी
सरकार के फैसले का सबसे सीधा लाभ मानदेय बढ़ने के रूप में मिलेगा। रसोइयों को अब 2,000 के बजाय 3,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यानी हर महीने 1,000 रुपये और पूरे वर्ष में 12,000 रुपये की अतिरिक्त राशि। प्रतिशत के हिसाब से यह मानदेय में 50 फीसदी की वृद्धि है।
निश्चित रूप से 3,000 रुपये मासिक आय आज की महंगाई के दौर में बहुत बड़ी रकम नहीं है। इसलिए इसे रसोइयों की आर्थिक समस्याओं का पूर्ण समाधान नहीं कहा जा सकता। इसके बावजूद लंबे समय से सीमित मानदेय पर काम कर रहे इस वर्ग के लिए बढ़ोतरी महत्वपूर्ण राहत है। खासकर इसलिए कि रसोइयों की बड़ी संख्या ग्रामीण और कम आय वाले परिवारों से आती है, जहां अतिरिक्त एक हजार रुपये भी घरेलू बजट में फर्क ला सकते हैं।
स्वास्थ्य सुरक्षा फैसले का सबसे बड़ा पक्ष
सरकार के फैसले की असली अहमियत केवल बढ़े हुए मानदेय में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों में भी है। रसोइयों और उनके परिवारों को सालाना पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा देने की व्यवस्था की गई है।
कम आय वाले परिवारों के सामने गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति अक्सर सबसे बड़ा आर्थिक संकट बन जाती है। ऐसे में यदि कैशलेस इलाज की सुविधा प्रभावी ढंग से लागू होती है तो इसका लाभ बढ़े हुए एक हजार रुपये मासिक मानदेय से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसके साथ दुर्घटना की स्थिति में दो लाख रुपये की सहायता का प्रावधान भी किया गया है। इसका उद्देश्य आकस्मिक परिस्थितियों में रसोइयों और उनके परिवारों को आर्थिक सहारा देना है।
आर्थिक राहत के साथ सम्मान का संदेश
सरकार ने इस फैसले को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में 11 रसोइयों को सम्मानित करना और प्रदेश के विभिन्न स्तरों पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करना इस कार्यबल को सार्वजनिक पहचान देने की कोशिश भी है।
पीएम पोषण योजना के तहत स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाली रसोइयां इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी हैं। इसके बावजूद आमतौर पर चर्चा भोजन के बजट, मेन्यू और बच्चों की संख्या तक सीमित रहती है। इस बार सरकार ने योजना को जमीन पर संचालित करने वाले कार्यबल को केंद्र में लाने की कोशिश की है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी रसोइयों की भूमिका को बच्चों के स्वस्थ भविष्य से जोड़ते हुए भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और निर्धारित मेन्यू का पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
स्कूलों और पीएम पोषण योजना पर भी पड़ सकता है असर
सरकार के इस फैसले का प्रभाव केवल रसोइयों तक सीमित नहीं रह सकता। बेहतर आर्थिक सुरक्षा मिलने से इस कार्यबल में काम की स्थिरता और जिम्मेदारी बढ़ने की संभावना है। इसका सकारात्मक असर पीएम पोषण योजना के संचालन पर भी पड़ सकता है।
हालांकि यह मान लेना उचित नहीं होगा कि मानदेय बढ़ते ही स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता अपने आप बेहतर हो जाएगी। इसके लिए खाद्य सामग्री की गुणवत्ता, समय पर आपूर्ति, रसोई की साफ-सफाई, पर्याप्त संसाधन और स्थानीय स्तर पर प्रभावी निगरानी भी उतनी ही जरूरी है।
यानी रसोइयों को बेहतर सुविधाएं देना व्यवस्था को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन पीएम पोषण योजना की गुणवत्ता सुधारने के लिए पूरी व्यवस्था पर एक साथ काम करना होगा।
राहत बड़ी, लेकिन चुनौतियां अभी बाकी
सरकार का फैसला निश्चित रूप से रसोइयों के लिए सकारात्मक है, लेकिन 3,000 रुपये का मासिक मानदेय अब भी सीमित आय है। इसलिए इस बढ़ोतरी को अंतिम समाधान के बजाय आर्थिक राहत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जाना चाहिए।
इस फैसले का सबसे मजबूत पक्ष यह है कि सरकार ने मानदेय बढ़ाने के साथ स्वास्थ्य और दुर्घटना सुरक्षा को भी जोड़ा है। इससे रसोइयों के सामने आने वाले बड़े आर्थिक जोखिमों को कम करने की कोशिश की गई है। यदि कैशलेस इलाज और दुर्घटना सहायता की सुविधा बिना जटिल प्रक्रिया के पात्र रसोइयों तक पहुंचती है तो इसका असर अधिक व्यापक हो सकता है।
फैसला कितना प्रभावी, अब क्रियान्वयन बताएगा
करीब 3.53 लाख रसोइयों के लिए घोषित इस पैकेज को आर्थिक राहत के साथ सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। मानदेय में 50 फीसदी बढ़ोतरी तत्काल राहत देगी, जबकि स्वास्थ्य और दुर्घटना सुरक्षा परिवारों को बड़े संकट के समय सहारा दे सकती है।
अब इस फैसले की असली परीक्षा घोषणा के बाद शुरू होगी। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कैशलेस चिकित्सा सुविधा, दुर्घटना सहायता और अन्य लाभ कितनी आसानी से पात्र रसोइयों तक पहुंचते हैं। यदि क्रियान्वयन प्रभावी रहा तो यह फैसला केवल रसोइयों की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्कूलों की पीएम पोषण व्यवस्था से जुड़े एक बड़े कार्यबल को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में भी अहम कदम साबित हो सकता है।


