– आईसीएआई ने शिक्षा, प्रशिक्षण, परीक्षा, आईटी और सॉफ्ट स्किल्स पर मांगा फीडबैक; सुझाव देने की अंतिम तारीख 31 अगस्त
भारत 19/ राजीव सक्सेना, नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल अकाउंटिंग और तेजी से बदलती कारोबारी दुनिया के दौर में भविष्य का चार्टर्ड अकाउंटेंट कैसा हो, उसे क्या पढ़ाया जाए और पेशेवर चुनौतियों के लिए कैसे तैयार किया जाए। आईसीएआई ने इस पर मंथन शुरू कर दिया है। इंस्टीट्यूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया ने सीए की मौजूदा शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा शुरू करते हुए चार्टर्ड अकाउंटेंट, छात्रों, उद्योग और शिक्षाविदों समेत विभिन्न हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। फीडबैक देने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त कर दी गई है।
आईसीएआई के बोर्ड ऑफ स्टडीज ने 31 जुलाई को इस संबंध में पत्र जारी कर चार्टर्ड अकाउंटेंट की शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था पर फीडबैक मांगा था। संस्थान ने कहा था कि समीक्षा का उद्देश्य मौजूदा सीए शिक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली को वर्तमान और भविष्य की जरूरतों, वैश्विक मानकों तथा पेशे की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना है। शुरुआत में सुझाव देने की अंतिम तारीख 18 अगस्त तय की गई थी। बाद में आईसीएआई ने 18 अगस्त को दोबारा पत्र जारी कर समय सीमा बढ़ाते हुए इसे 31 अगस्त कर दिया। इससे अब तक फीडबैक नहीं दे सके हितधारकों को अपने सुझाव रखने का एक और अवसर मिल गया है।
सिर्फ पाठ्यक्रम नहीं, पूरी व्यवस्था की समीक्षा
आईसीएआई की यह कवायद केवल सीए पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं है। समीक्षा में शिक्षा, व्यवहारिक प्रशिक्षण, परीक्षा, आईटी और सॉफ्ट स्किल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है। इसके अलावा सुझाव देने वालों को अपने अलग विचार और अनुभव साझा करने का विकल्प भी दिया गया है। इससे संकेत मिलता है कि संस्थान केवल यह नहीं देख रहा कि सीए छात्रों को क्या पढ़ाया जाए, बल्कि यह भी विचार कर रहा है कि उन्हें व्यवहारिक प्रशिक्षण किस तरह मिले, उनकी योग्यता का मूल्यांकन कैसे किया जाए और पेशेवर जीवन की बदलती चुनौतियों के लिए उन्हें किस तरह तैयार किया जाए।
सीए छात्रों की शिक्षा और पाठ्यक्रम पर फोकस
समीक्षा का पहला प्रमुख हिस्सा सीए की अकादमिक शिक्षा और पाठ्यक्रम से जुड़ा है। इसका सीधा असर भविष्य में फाउंडेशन, इंटरमीडिएट और फाइनल स्तर के छात्रों पर पड़ सकता है। यदि समीक्षा के बाद शिक्षा व्यवस्था में बदलाव किए जाते हैं तो अध्ययन सामग्री, विषयों की संरचना और सीखने के तरीकों में परिवर्तन संभव है। फीडबैक के जरिए यह जानने की कोशिश की जा रही है कि मौजूदा अकादमिक व्यवस्था को किस तरह अधिक प्रासंगिक और आधुनिक बनाया जा सकता है।
व्यवहारिक प्रशिक्षण की व्यवस्था भी जांच के दायरे में
सीए बनने की प्रक्रिया में अकादमिक पढ़ाई के साथ व्यवहारिक प्रशिक्षण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आईसीएआई ने इसे भी समीक्षा के अलग दायरे में रखा है। व्यवहारिक प्रशिक्षण ले रहे छात्र अपने अनुभव के आधार पर बता सकते हैं कि मौजूदा व्यवस्था में उन्हें किस तरह का प्रोफेशनल एक्सपोजर मिल रहा है और इसमें किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है। इससे प्रशिक्षण व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सुझाव मिल सकते हैं। सीए फर्म और व्यवहारिक प्रशिक्षण देने वाले संस्थानों के लिए भी यह समीक्षा महत्वपूर्ण है। भविष्य में यदि व्यवस्था में बदलाव होता है तो ट्रेनी को काम देने, प्रशिक्षण की निगरानी और व्यावहारिक अनुभव से जुड़े तौर-तरीकों में भी परिवर्तन हो सकता है।
परीक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था पर भी मांगी राय
आईसीएआई ने परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली को भी फीडबैक के प्रमुख बिंदुओं में शामिल किया है। इसका सीधा संबंध सीए छात्रों की परीक्षा और उनकी योग्यता के आकलन से है। इस हिस्से में छात्र अपने परीक्षा अनुभव के आधार पर सुझाव दे सकते हैं, जबकि सीए सदस्य अपनी पेशेवर विशेषज्ञता और अनुभव के आधार पर सुधार के बिंदु रख सकते हैं। समीक्षा के आधार पर भविष्य में परीक्षा या मूल्यांकन व्यवस्था में बदलाव होता है तो इसका असर छात्रों की तैयारी और परीक्षा देने के तरीकों पर पड़ सकता है।
आईटी और सॉफ्ट स्किल्स पर भी रहेगा जोर
समीक्षा में आईटी और सॉफ्ट स्किल्स ट्रेनिंग को भी शामिल किया गया है। यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि अकाउंटिंग, ऑडिट, वित्तीय रिपोर्टिंग और अन्य पेशेवर कार्यों में तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। सीए को अब बड़े पैमाने पर डिजिटल सिस्टम और तकनीकी उपकरणों के साथ काम करना पड़ रहा है। भविष्य में इस क्षेत्र को अधिक महत्व दिए जाने पर छात्रों को तकनीकी और पेशेवर जरूरतों के अनुरूप अतिरिक्त प्रशिक्षण मिल सकता है। इसका लाभ सीए फर्मों और कंपनियों को भी मिल सकता है, क्योंकि उन्हें ऐसे प्रोफेशनल मिलेंगे जो तकनीकी बदलावों के साथ कारोबारी और व्यावसायिक वातावरण को बेहतर ढंग से समझ सकें।
हितधारकों को अपने सुझाव रखने की भी छूट
आईसीएआई ने फीडबैक के लिए तय विषयों के अलावा हितधारकों को अपने स्वतंत्र विचार रखने का भी अवसर दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि सुझाव देने वाले केवल तय बिंदुओं तक सीमित न रहें और अपने अनुभव तथा विचारों के आधार पर ऐसे मुद्दे भी सामने ला सकें, जो सीधे तौर पर प्रश्नों में शामिल नहीं हैं।
उद्योग और कारोबार पर भी पड़ सकता है असर
सीए शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था में भविष्य में होने वाले किसी बदलाव का असर केवल चार्टर्ड अकाउंटेंट और सीए छात्रों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका प्रभाव उद्योग और कारोबार पर भी पड़ सकता है। उद्योग और कारोबारी संस्थानों में सीए की भूमिका अकाउंटिंग, ऑडिट, टैक्स और वित्तीय सलाह जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होती है। यदि शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था को बदलती पेशेवर जरूरतों के अनुरूप विकसित किया जाता है तो उद्योग को ऐसे प्रोफेशनल मिल सकते हैं, जो भविष्य की कारोबारी चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझने में सक्षम हों। आईसीएआई की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल के पूर्व चेयरमैन दीप कुमार मिश्रा के मुताबिक, संस्थान ने सभी हितधारकों से अलग-अलग विषयों पर सुझाव मांगे हैं। इससे भविष्य में सीए शिक्षा और प्रशिक्षण व्यवस्था में किए जाने वाले संभावित बदलावों की रूपरेखा तैयार करने में मदद मिलेगी।


