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आई-गर्डर की ढलाई पूरी, रफ्तार पकड़ेगा कानपुर मेट्रो-2

–  नौबस्ता कास्टिंग यार्ड में सभी 156 आई-गर्डर तैयार, कॉरिडोर-2 के करीब 4.2 किमी एलिवेटेड हिस्से में तेजी से आगे बढ़ रहा सिविल निर्माण

भारत 19

कानपुर। कानपुर मेट्रो के दूसरे कारिडोर के निर्माण ने एक और अहम पड़ाव पार कर लिया है। सीएसए कृषि विश्वविद्यालय से बर्रा-8 तक बन रहे कारिडोर-2 के एलिवेटेड हिस्से के सभी 156 आई-गर्डर की ढलाई पूरी कर ली गई है। इन आई-गर्डरों की कास्टिंग नौबस्ता स्थित कास्टिंग यार्ड में की गई है। इसके साथ ही एलिवेटेड सेक्शन में गर्डर निर्माण से जुड़ा एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।

उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन (UPMRC) के मुताबिक नौबस्ता कास्टिंग यार्ड में इस सेक्शन के 106 पियर कैप्स, 141 डबल टी-गर्डर और 220 यू-गर्डर की कास्टिंग भी पहले ही पूरी की जा चुकी है। अब आई-गर्डर की ढलाई पूरी होने से एलिवेटेड ट्रैक के निर्माण में तेजी आएगी। 

4.19 किमी का एलिवेटेड, 4.41 किमी भूमिगत हिस्सा

करीब 8.6 किलोमीटर लंबे कारिडोर-2 में लगभग 4.19 किलोमीटर एलिवेटेड और 4.41 किलोमीटर भूमिगत हिस्सा है। यह कारिडोर सीएसए कृषि विश्वविद्यालय से शुरू होकर बर्रा-8 तक जाएगा। परियोजना में कुल आठ स्टेशन विकसित किए जा रहे हैं। एलिवेटेड हिस्से में बनने वाले वायाडक्ट के लिए अलग-अलग तरह के प्रीकास्ट स्ट्रक्चरल कंपोनेंट तैयार किए जा रहे हैं। इनमें पियर कैप, डबल टी-गर्डर, यू-गर्डर और आई-गर्डर शामिल हैं। आई-गर्डर का इस्तेमाल विशेष रूप से ऐसे स्थानों पर संरचनात्मक सपोर्ट देने में किया जाता है, जहां सामान्य वायाडक्ट संरचना के बजाय विशेष डिजाइन की जरूरत होती है। इनमें क्रॉसओवर प्वाइंट जैसे स्थान भी शामिल हैं।

ढला हुआ आई-गर्डर


कास्टिंग यार्ड से सीधे साइट पर पहुंचेंगे गर्डर

नौबस्ता कास्टिंग यार्ड को कॉरिडोर-2 के एलिवेटेड सेक्शन के निर्माण के लिए महत्वपूर्ण आधार के रूप में विकसित किया गया है। यहां तैयार किए गए प्रीकास्ट कंपोनेंट को निर्माण स्थल तक पहुंचाकर पियरों पर स्थापित किया जाता है। इससे साइट पर निर्माण का समय कम करने और काम को अधिक व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलती है। UPMRC के प्रबंध निदेशक सुशील कुमार ने कहा कि कॉरिडोर-2 के एलिवेटेड सेक्शन का सिविल निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है। पियर कैप्स, डबल टी-गर्डर और यू-गर्डर की कास्टिंग के बाद अब आई-गर्डर की ढलाई पूरी होना परियोजना के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

आई-गर्डर समेत प्रमुख प्रीकास्ट संरचनात्मक कंपोनेंट की कास्टिंग पूरी होने के बाद अब निर्माण एजेंसियों के लिए इन्हें साइट पर स्थापित करने और एलिवेटेड वायाडक्ट को गति देने का रास्ता और आसान हुआ है। इसके साथ ही भूमिगत हिस्से में भी ट्रैक निर्माण का काम आगे बढ़ रहा है। अप्रैल 2026 में कारिडोर-2 के करीब 4.1 किलोमीटर भूमिगत हिस्से में ट्रैक स्लैब कास्टिंग शुरू हुई थी। कारिडोर-2 में कास्टिंग से लेकर ट्रैक और स्ट्रक्चर निर्माण पर एक साथ काम आगे बढ़ रहा है। 

पहले कारिडोर के बाद अब दूसरे पर फोकस

कानपुर मेट्रो परियोजना में दो मुख्य कारिडोर विकसित किए जा रहे हैं। पहला कारिडोर आईआईटी कानपुर से नौबस्ता तक करीब 23.8 किलोमीटर लंबा है, जबकि दूसरा कारिडोर सीएसए से बर्रा-8 तक करीब 8.6 किलोमीटर का है। पहले कॉरिडोर पर आईआईटी कानपुर से कानपुर सेंट्रल तक मेट्रो सेवा शुरू है। वहीं कारिडोर-2 पर एलिवेटेड और भूमिगत दोनों हिस्सों में निर्माण कार्य जारी है। कारिडोर-2 के पूरा होने से शहर के सीएसए, रावतपुर, काकादेव, डबल पुलिया और बर्रा क्षेत्र के बीच मेट्रो कनेक्टिविटी मजबूत होगी। परियोजना का उद्देश्य शहर के प्रमुख शैक्षणिक, आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को तेज सार्वजनिक परिवहन से जोड़ना और सड़क यातायात के दबाव को कम करना है।

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