- कानपुर बैराज पर जलस्तर 113.580 मीटर, चेतावनी स्तर से 42 सेंटीमीटर नीचे; हरिद्वार-नरौरा से छोड़ा जा रहा पानी, अगले 24 से 48 घंटे अहम
भारत 19/ कानपुर। मानसून के सक्रिय दौर के बीच कानपुर और आसपास के जिलों में भारी बारिश के अलर्ट ने गंगा के जलस्तर को लेकर भी सतर्कता बढ़ा दी है। अभी गंगा चेतावनी और खतरे के दोनों स्तरों से नीचे है, लेकिन लगातार बारिश और ऊपरी बैराजों से छोड़े जा रहे पानी को देखते हुए अगले एक-दो दिन नदी के जलस्तर पर नजर रखना जरूरी हो गया है। मौसम विभाग ने कानपुर समेत कई जिलों में गरज-चमक और आकाशीय बिजली के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी है।
फ्लड कंट्रोल कार्यालय, एलजीसी कानपुर के सोमवार सुबह आठ बजे के आंकड़ों के मुताबिक कानपुर बैराज के अपस्ट्रीम में गंगा का जलस्तर 113.580 मीटर दर्ज किया गया। यहां चेतावनी स्तर 114 मीटर और खतरे का स्तर 115 मीटर है। यानी पानी अभी चेतावनी स्तर से 42 सेंटीमीटर नीचे है। डाउनस्ट्रीम में जलस्तर 113.430 मीटर दर्ज किया गया। बैराज से इस समय 2,92,469 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। खतरे के स्तर पर निर्धारित डिस्चार्ज 5,44,373 क्यूसेक है। मौजूदा डिस्चार्ज इस सीमा से काफी नीचे है, इसलिए फिलहाल कानपुर बैराज पर बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। हालांकि, बारिश का दौर जारी रहने पर जलस्तर और डिस्चार्ज में बदलाव की संभावना को देखते हुए निगरानी जरूरी है।
शुक्लागंज में भी पानी चेतावनी से नीचे
शुक्लागंज में सोमवार सुबह गंगा का जलस्तर 112.220 मीटर दर्ज हुआ। यहां चेतावनी स्तर 113 मीटर और खतरे का स्तर 114 मीटर है। इस लिहाज से शुक्लागंज में पानी चेतावनी स्तर से 78 सेंटीमीटर नीचे है। फिलहाल दोनों प्रमुख गेज पर जलस्तर चेतावनी सीमा से नीचे है। इसलिए मौजूदा आंकड़े तत्काल बाढ़ की स्थिति का संकेत नहीं देते। लेकिन बारिश की तीव्रता बढ़ने पर नदी के जलस्तर में होने वाले बदलाव को लेकर प्रशासन और तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

हरिद्वार और नरौरा से भी छोड़ा जा रहा पानी
फ्लड कंट्रोल कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार हरिद्वार बैराज से 93,770 क्यूसेक और नरौरा बैराज से 1,11,969 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। ऊपरी बैराजों से पानी छोड़े जाने और स्थानीय स्तर पर बारिश के बीच गंगा के प्रवाह पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। हालांकि, इन आंकड़ों के आधार पर कानपुर में गंगा का जलस्तर कितने समय में और कितना बढ़ेगा, इसका सीधा अनुमान नहीं लगाया जा सकता। नदी के जलस्तर पर ऊपरी क्षेत्रों में बारिश, बैराजों से पानी छोड़े जाने की मात्रा और स्थानीय वर्षा समेत कई कारकों का असर पड़ता है।
बारिश के साथ जलभराव की भी चुनौती
मौसम विभाग के 17 अगस्त के जिला स्तरीय नाउकास्ट में कानपुर नगर, कानपुर देहात और उन्नाव समेत कई जिलों में गरज-चमक के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। आकाशीय बिजली की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में कानपुर के सामने फिलहाल दोहरी चुनौती है। शहर और आसपास के इलाकों में तेज बारिश से जलभराव और यातायात प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है, वहीं लगातार बारिश होने पर गंगा के जलस्तर में भी बदलाव संभव है। नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि गंगा अभी खतरे के निशान से काफी नीचे है, लेकिन बारिश का दौर खत्म नहीं हुआ है। इसलिए जलस्तर को लेकर किसी तरह की लापरवाही के बजाय स्थानीय प्रशासन की सूचनाओं पर नजर रखना जरूरी होगा।
अगले 24 से 48 घंटे महत्वपूर्ण
वर्तमान आंकड़े राहत देने वाले हैं, लेकिन मौसम विभाग की भारी बारिश की चेतावनी और ऊपरी बैराजों से जारी पानी को देखते हुए अगले 24 से 48 घंटे गंगा के जलस्तर की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण रहेंगे। फिलहाल स्थिति निगरानी और सतर्कता की है, बाढ़ की नहीं। लेकिन यदि बारिश का जोर बना रहता है और ऊपरी क्षेत्रों से पानी का प्रवाह बढ़ता है, तो गंगा के जलस्तर में भी तेजी से बदलाव आ सकता है। इसलिए फिलहाल सबसे जरूरी है—बारिश पर नजर, बैराज के डिस्चार्ज पर नजर और गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर।


