- 35 रुपये प्रति कुंतल लाभांश स्वीकृत, 25 प्रतिशत और बढ़ाने का प्रस्ताव, 78,442 दुकानों से 15 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रहा मुफ्त खाद्यान्न
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली को सिर्फ गरीबों तक मुफ्त राशन पहुंचाने की व्यवस्था के तौर पर देखने के बजाय सरकार अब उसके आखिरी छोर पर खड़े कोटेदार को भी मजबूत करने पर जोर दे रही है। लोक भवन में सोमवार को उचित दर विक्रेताओं के अतिरिक्त लाभांश वितरण घोषणा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोटेदारों के लाभांश को बढ़ाकर 35 रुपये प्रति कुंतल करने की घोषणा की। इसके साथ ही लाभांश में 25 प्रतिशत अतिरिक्त वृद्धि के लिए केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी दी गई। प्रदेश की 78,442 उचित दर दुकानों के जरिए सालाना करीब 90 लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है और प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत करीब 15 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न मिल रहा है।
उत्तर प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में तकनीक के इस्तेमाल से वितरण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का दावा किया जा रहा है। सरकार के मुताबिक करीब 99.50 प्रतिशत लाभार्थियों का बायोमेट्रिक या मोबाइल ओटीपी के जरिए प्रमाणीकरण किया जा रहा है। उचित दर दुकानों पर ई-वेइंग स्केल से जुड़ी ई-पॉस मशीनें भी उपलब्ध कराई गई हैं। इसका सीधा अर्थ है कि राशन वितरण अब केवल बोरी और तराजू की व्यवस्था नहीं रह गया है। लाभार्थी की पहचान से लेकर खाद्यान्न की तौल और वितरण तक पूरी प्रक्रिया को तकनीक से जोड़ने की कोशिश की गई है। सरकार का जोर इसी व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर है।
कोटेदार की कमाई बढ़ाने की कोशिश
सरकार ने उचित दर विक्रेताओं के लिए सिर्फ कमीशन बढ़ाने का रास्ता नहीं चुना है। कोटेदारों को 39 मानक वस्तुओं की बिक्री की अनुमति देने की बात भी कार्यक्रम में कही गई। इसका उद्देश्य राशन की दुकान को अतिरिक्त आय का जरिया बनाना है। लाभांश 35 रुपये प्रति कुंतल किए जाने के बाद अब केंद्र को 25 प्रतिशत अतिरिक्त वृद्धि का प्रस्ताव भेजा गया है। इसके पीछे तर्क है कि आर्थिक रूप से सक्षम कोटेदार ही सार्वजनिक वितरण प्रणाली को लंबे समय तक सुचारु रख सकते हैं। हालांकि, लाभांश बढ़ने के साथ यह भी अहम होगा कि राशन दुकानों की आर्थिक व्यवहार्यता और उपभोक्ताओं को मिलने वाली सेवा के बीच बेहतर संतुलन बने। करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा अंततः इसी स्थानीय वितरण नेटवर्क पर निर्भर करती है।
राशन दुकान से महिला रोजगार तक
सरकार ने राशन व्यवस्था को महिला सशक्तिकरण से जोड़ने की दिशा में भी आंकड़े सामने रखे। प्रदेश में 3,785 उचित दर दुकानें महिला स्वयं सहायता समूहों को आवंटित की गई हैं। इससे राशन वितरण के साथ महिलाओं के लिए आय और रोजगार के अवसर पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी क्रम में सभी राशन कार्ड महिला मुखिया के नाम पर जारी किए जाने की बात भी कही गई। यानी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को परिवार की महिला सदस्य के नाम से जोड़ने की नीति को सामाजिक सुरक्षा के व्यापक ढांचे का हिस्सा बनाया गया है।
प्रवासी मजदूरों के लिए वन नेशन-वन राशन कार्ड
प्रवासी परिवारों के लिए ‘वन नेशन-वन राशन कार्ड’ व्यवस्था को भी सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिना रही है। उत्तर प्रदेश के राशन कार्डधारकों ने दूसरे राज्यों में करीब 1.12 करोड़ बार राशन प्राप्त किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि पोर्टेबिलिटी व्यवस्था का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है। रोजगार के लिए राज्य से बाहर जाने वाले श्रमिकों के लिए यह सुविधा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अब राशन लेने के लिए अपने मूल जिले में लौटने की जरूरत नहीं होती।
8,300 अन्नपूर्णा भवन तैयार
सरकार उचित दर दुकानों के बुनियादी ढांचे को भी बदलने की कोशिश कर रही है। प्रदेश में 8,300 अन्नपूर्णा भवन पूरे हो चुके हैं, जबकि 1,500 निर्माणाधीन बताए गए हैं। लक्ष्य राशन की दुकानों को केवल खाद्यान्न वितरण केंद्र से आगे ले जाकर स्थानीय सुविधा केंद्र के रूप में विकसित करना है। खाद्यान्न की आपूर्ति व्यवस्था में भी बदलाव का दावा किया गया है। एफसीआई गोदामों से सीधे उचित दर विक्रेताओं तक खाद्यान्न पहुंचाने और परिवहन निशुल्क किए जाने से कोटेदारों पर अतिरिक्त परिवहन लागत का बोझ घटाने की बात कही गई।
अब असली कसौटी वितरण की आखिरी कतार
सरकार ने आंकड़ों और तकनीकी सुधारों के जरिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली की तस्वीर बदलने का दावा किया है। लेकिन इस विशाल नेटवर्क की वास्तविक सफलता आखिरकार राशन की दुकान पर खड़े उस लाभार्थी के अनुभव से तय होगी, जिसे समय पर पूरा खाद्यान्न मिले। कोटेदार का बढ़ा लाभांश व्यवस्था को आर्थिक आधार दे सकता है, तकनीक पारदर्शिता बढ़ा सकती है और अन्नपूर्णा भवन बुनियादी ढांचा सुधार सकते हैं। लेकिन इन सबका अंतिम मतलब तभी है जब 15 करोड़ लाभार्थियों तक उनका खाद्य अधिकार बिना कटौती, बिना परेशानी और समय पर पहुंचे। उत्तर प्रदेश की राशन व्यवस्था अब जिस पैमाने पर चल रही है, उसमें चुनौती सिर्फ मुफ्त खाद्यान्न बांटने की नहीं, बल्कि हर दुकान पर व्यवस्था की विश्वसनीयता कायम रखने की है।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, बृजेश पाठक, मा. मंत्री खाद्य एवं रसद तथा नागरिक आपूर्ति मनोज कुमार पाण्डेय, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद अशोक कुमार मेहरोत्रा, ऑल इंडिया फेयर प्राइस शॉप डीलर एसोसिएशन के राजेश तिवारी, आदर्श कोटेदार एवं उपभोक्ता वेलफेयर एसोसिएशन के प्रतिनिधिगण सहित प्रदेश के उचित दर विक्रेता उपस्थित रहे तथा बड़ी संख्या में कोटेदार जूम के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े।
