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रूस-यूक्रेन से बातचीत कर रहा भारत, जयशंकर ने बताया प्लान

  • विदेश मंत्री ने कहा- भारत अब केवल शांति की अपील तक सीमित नहीं; मॉस्को और कीव से ब्लैक सी में जहाजों की सुरक्षा, अनाज-ऊर्जा निर्यात और संभावित गैर-हमला व्यवस्था पर बातचीत जारी, यूक्रेन ने भारत के प्रस्ताव को सबसे व्यापक बताया है

भारत 19/ नई दिल्ली। रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म कराने की कोशिशों में भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत अब सिर्फ युद्ध समाप्त करने की अपील नहीं कर रहा, बल्कि रूस और यूक्रेन दोनों से संपर्क में है। भारत की बातचीत का फोकस ऐसे व्यावहारिक मुद्दों पर है, जिनसे युद्ध के बीच तनाव और वैश्विक आपूर्ति संकट को कम किया जा सके। जयशंकर ने रविवार को नई दिल्ली में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के दौरान कहा कि भारत पिछले कुछ महीनों में अपनी भूमिका को ‘एडवोकेसी’ से आगे ले गया है। उनका कहना था कि युद्ध का समाधान बातचीत, कूटनीति और वार्ता से ही संभव है। इसी सोच के तहत भारत दोनों पक्षों के साथ संवाद कर रहा है। 

ब्लैक सी से पहल, अनाज व ऊर्जा आपूर्ति पर बातचीत

भारत की कोशिशों में शुरुआती फोकस ब्लैक सी में जहाजों की सुरक्षा पर है। इस समुद्री क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही प्रभावित है। उसका असर यूक्रेनी खाद्य निर्यात के साथ-साथ वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा पर भी पड़ा है। बातचीत अब समुद्री सुरक्षा से आगे बढ़कर अनाज और ऊर्जा निर्यात से जुड़े मुद्दों तक पहुंच चुकी है। दोनों देशों से जुड़े इन क्षेत्रों में व्यवधान का असर युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य, ईंधन और वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा है। भारत इसी तरह के तत्काल मुद्दों पर समाधान की संभावनाएं तलाश रहा है। भारत जिन मुद्दों पर दोनों पक्षों से बात कर रहा है, उनमें ‘नॉन-अटैक पॉसिबिलिटीज’ भी शामिल हैं। 

यूक्रेन ने भारतीय प्रस्ताव को सराहा

जयशंकर का बयान ऐसे समय आया है जब यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा ने भारत के युद्धविराम प्रस्ताव को चार देशों से मिले प्रस्तावों में सबसे व्यापक बताया है। यूक्रेन को भारत के अलावा अमेरिका, तुर्किये और मिस्र की ओर से भी संभावित युद्धविराम संबंधी प्रस्ताव मिले हैं। यूक्रेन ने खास तौर पर ब्लैक सी, ऊर्जा और कृषि से जुड़े क्षेत्रों में युद्धविराम की संभावनाओं पर चर्चा की है। इससे भारत की पहल को केवल राजनीतिक बयानबाजी के बजाय कुछ ठोस क्षेत्रों में समाधान तलाशने वाली कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

रूस से रिश्ते भारत की बड़ी ताकत

जयशंकर ने भारत-रूस संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस के साथ भारत के रक्षा, ऊर्जा, परमाणु, अंतरिक्ष और व्यापारिक संबंध हैं। यही संबंध भारत को मॉस्को के साथ संवाद का एक अलग आधार देते हैं। दूसरी ओर, यूक्रेन के साथ भी भारत ने संपर्क बनाए रखा है। भारत इसी संतुलन के जरिए दोनों पक्षों के साथ बातचीत की गुंजाइश बनाए हुए है। भारत की सक्रियता ऐसे समय बढ़ी है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बातचीत में भी युद्ध समाप्त करने की जरूरत पर जोर दिया गया है। पुतिन ने मोदी के समाधान संबंधी विचारों को सकारात्मक बताया है।

भारत के सामने बड़ी कूटनीतिक चुनौती

भारत की कोशिश का अगला चरण आसान नहीं होगा। रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के मूल राजनीतिक और क्षेत्रीय मुद्दे अब भी बने हुए हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा, खाद्य और ऊर्जा आपूर्ति जैसे सीमित क्षेत्रों में सहमति बनाना व्यापक शांति समझौते से अलग चुनौती है। फिलहाल भारत ने किसी औपचारिक मध्यस्थ की भूमिका की घोषणा नहीं की है। जयशंकर के बयान से इतना स्पष्ट है कि नई दिल्ली अब दोनों पक्षों से नियमित बातचीत के जरिए ऐसे मुद्दों पर काम कर रही है, जहां तत्काल व्यावहारिक समाधान संभव हो सकते हैं।

आगे भारत की भूमिका पर नजर

रूस-यूक्रेन युद्ध के समाधान में भारत की भूमिका अब अपील से आगे बढ़कर सक्रिय संवाद के चरण में पहुंचती दिख रही है। ब्लैक सी की सुरक्षा, अनाज और ऊर्जा आपूर्ति तथा संभावित गैर-हमला व्यवस्था पर चल रही बातचीत कितनी आगे बढ़ती है, इससे भारत की कूटनीतिक भूमिका की वास्तविक दिशा स्पष्ट होगी। फिलहाल दोनों पक्षों के साथ संपर्क बनाए रखना ही नई दिल्ली की सबसे अहम रणनीति है।

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