- अमेठी के गौरीगंज में सदस्यता कार्यक्रम, स्मृति ईरानी और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी रहे मौजूद; राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी के भाजपा में आने से 2027 चुनाव से पहले बदले सियासी समीकरण
भारत 19/ अमेठी। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने अपने राजनीतिक विस्तार की दिशा में अहम कदम उठाया है। अमेठी के गौरीगंज में बुधवार को आयोजित सदस्यता कार्यक्रम में राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी भाजपा में शामिल हुए। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी मौजूद रहे। तीनों नेताओं के पार्टी बदलने से अवध और बुंदेलखंड के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ने की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग से शुरू हुई थी दूरी
फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव में इन नेताओं ने समाजवादी पार्टी के रुख से अलग जाकर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था। इस घटनाक्रम के बाद सपा नेतृत्व के साथ उनकी दूरी बढ़ी। राकेश प्रताप सिंह को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में सपा से निष्कासित भी किया गया था। बाद में इन नेताओं का भाजपा के प्रति राजनीतिक झुकाव सार्वजनिक रूप से सामने आता रहा।
राकेश प्रताप सिंह ने बताया घर वापसी का फैसला
गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह ने भाजपा में शामिल होने से पहले इसे ‘घर वापसी’ बताया था। उन्होंने कहा कि वह पहले भी भाजपा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने सपा नेतृत्व की नीतियों और पार्टी के राजनीतिक रुख पर सवाल उठाए थे। उनके ये आरोप उनके अपने बयान हैं।
तीन अलग-अलग क्षेत्रों में नेताओं का प्रभाव
राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज सीट से, अभय सिंह अयोध्या जिले की गोसाईंगंज सीट से और विनोद चतुर्वेदी जालौन जिले की कालपी सीट से जुड़े हैं। इस लिहाज से भाजपा में उनका शामिल होना केवल अमेठी तक सीमित घटनाक्रम नहीं है। पार्टी को इन नेताओं के स्थानीय संपर्क और समर्थकों से फायदा मिलने की उम्मीद हो सकती है, लेकिन इसका वास्तविक चुनावी असर आगामी महीनों में ही स्पष्ट होगा।
2027 से पहले दल-बदल पर बढ़ी नजर
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल दूसरे दलों के नेताओं को अपने साथ जोड़ने में जुटे हैं। तीनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने से सपा के साथ उनका राजनीतिक अलगाव औपचारिक रूप से और स्पष्ट हुआ है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि भाजपा संगठन में उन्हें क्या जिम्मेदारी मिलती है और उनके अपने क्षेत्रों में पार्टी की स्थिति पर इसका कितना असर पड़ता है।

