- सऊदी अरब, रूस समेत सात देशों ने सितंबर का उत्पादन स्तर नवंबर में भी बनाए रखा; मध्य-पूर्व से कच्चे तेल का निर्यात बढ़ने और G7 के 10 करोड़ बैरल आपात भंडार जारी करने के फैसले से सोमवार को कीमतों पर दबाव आया
भारत 19 डेस्क/ कच्चे तेल के बाजार में भू-राजनीतिक तनाव के बीच OPEC+ ने नवंबर के लिए उत्पादन लक्ष्य में कोई बदलाव नहीं किया है। 4 अक्टूबर को हुई ऑनलाइन बैठक में सऊदी अरब, रूस, इराक, कुवैत, कजाखस्तान, अल्जीरिया और ओमान ने सितंबर के निर्धारित उत्पादन स्तर को नवंबर में भी बनाए रखने पर सहमति जताई। समूह की अगली बैठक 1 नवंबर को होगी।
2026 की बढ़ोतरी का असर सीमित
OPEC+ के फैसले में समूह के सात प्रमुख उत्पादक शामिल रहे। संगठन ने कहा कि सदस्य देशों ने वैश्विक तेल बाजार की स्थिति और उसके आगे के परिदृश्य की समीक्षा के बाद मौजूदा उत्पादन व्यवस्था जारी रखने का निर्णय लिया है। OPEC+ ने इस साल उत्पादन लक्ष्य बढ़ाने के कई फैसले किए, लेकिन मध्य-पूर्व में संघर्ष के कारण वास्तविक आपूर्ति में उसका पूरा असर नहीं दिखा। Reuters के मुताबिक सात प्रमुख देशों का अगस्त उत्पादन 2.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन रहा, जो जुलाई से 6.3 लाख बैरल प्रतिदिन अधिक था, लेकिन फरवरी के युद्ध-पूर्व स्तर से करीब 50 लाख बैरल प्रतिदिन कम रहा।
खाड़ी से निर्यात अभी सामान्य नहीं
मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष और परिवहन बाधाओं ने खाड़ी देशों की तेल आपूर्ति को प्रभावित किया है। Reuters के अनुसार हाल के महीनों में प्रमुख Gulf OPEC+ उत्पादकों का निर्यात सामान्य स्तर के करीब 60 से 80 प्रतिशत के बीच रहा। हालांकि सितंबर के अंतिम सप्ताह में मध्य-पूर्व से निर्यात कुछ दिनों में युद्ध-पूर्व स्तर से ऊपर भी पहुंचा। तेल बाजार में आपूर्ति का दबाव कम करने के लिए G7 देशों ने 10 करोड़ बैरल कच्चा तेल और डीजल आपात भंडार से जारी करने का फैसला किया है। इस कदम का उद्देश्य वैश्विक बाजार में तत्काल आपूर्ति चिंता को कम करना है।
100 डॉलर से ऊपर है Brent, सोमवार को नरमी
बढ़ी हुई आपूर्ति की उम्मीद का असर सोमवार के शुरुआती कारोबार में दिखाई दिया। Brent क्रूड 0.65 फीसदी गिरकर 101.59 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी WTI 1.03 फीसदी गिरकर 90.12 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि बाद के कारोबार में कीमतों की दिशा पर मध्य-पूर्व की घटनाओं का असर बना रहा। कीमतों में शुरुआती नरमी के बावजूद Brent अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर है। Reuters के मुताबिक ईरान युद्ध शुरू होने से पहले यह करीब 73 डॉलर था। इसका मतलब है कि अतिरिक्त आपूर्ति के बावजूद बाजार भू-राजनीतिक जोखिम को कीमतों में शामिल कर रहा है।
2027 के कोटे पर नजर
OPEC+ के सामने अब अगले साल के उत्पादन कोटे का सवाल है। सदस्यों की उत्पादन क्षमता की समीक्षा, जो 2027 के नए कोटे तय करने में महत्वपूर्ण होगी, मध्य-पूर्व के संघर्ष के कारण प्रभावित हुई है। Reuters के मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों में बड़े उत्पादन बदलाव 2027 से पहले होने की संभावना कम है। OPEC+ की अगली बैठक 1 नवंबर 2026 को होगी। तब तक बाजार की निगाहें मध्य-पूर्व से वास्तविक तेल आपूर्ति, G7 के भंडार रिलीज और ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा पर रहेंगी। फिलहाल समूह ने उत्पादन बढ़ाने के बजाय मौजूदा स्तर बनाए रखकर बाजार की अनिश्चितता के बीच सावधानी बरतने का संकेत दिया है।


