- रामायण पाठ के दौरान इस बार नहीं हुई मगरिब की नमाज, अजान के बावजूद नहीं पहुंचे नमाजी; नीम के पेड़ और मस्जिद की मरम्मत को लेकर विवाद, दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे
भारत 19/ वाराणसी। काशी की लाटभैरव रामलीला में इस बार वर्षों से चली आ रही एक परंपरा नहीं निभाई गई। 13 अक्टूबर को जयंत नेत्रभंग प्रसंग के मंचन के दौरान रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ तो हुआ, लेकिन मगरिब की नमाज अदा करने के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग नहीं पहुंचे। शाम को अजान हुई, मगर नमाज नहीं पढ़ी गई। करीब 483 साल पुरानी बताई जाने वाली इस परंपरा में आए बदलाव से रामलीला समिति ने निराशा जताई है। वहीं, नमाज नहीं होने की वजह को लेकर दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए हैं।
रामायण पाठ के साथ नमाज की रही है परंपरा
वाराणसी के आदमपुर क्षेत्र में लाटभैरव मंदिर के पास आयोजित श्री आदि रामलीला लाट भैरव वरुणा संगम में जयंत नेत्रभंग प्रसंग के दौरान रामचरितमानस का पाठ और मगरिब की नमाज एक ही समय पर होती रही है। इसे काशी की साझा सांस्कृतिक परंपरा और आपसी सद्भाव के उदाहरण के तौर पर देखा जाता रहा है। पिछले वर्षों में रामलीला के मंचन के दौरान मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करते थे। इस बार निर्धारित समय पर लीला का मंचन हुआ, लेकिन नमाज नहीं पढ़ी गई।
नीम के पेड़ को लेकर विवाद, मुस्लिम पक्ष ने जताई नाराजगी
मुस्लिम पक्ष की ओर से नमाज नहीं पढ़ने के पीछे नीम के पेड़ से जुड़ा विवाद बताया गया है। मुतवल्ली अनीसुर्रहमान के अनुसार, पेड़ पर चुनरी और धागे बांधे जाने तथा धार्मिक प्रतीक लिखे जाने को लेकर आपत्ति है। उनका कहना है कि शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई और इसी विरोध में इस बार मगरिब की नमाज नहीं पढ़ी गई। दूसरी ओर, रामलीला समिति से जुड़े रोहित जायसवाल ने पेड़ को हिंदू पक्ष का बताते हुए कहा कि वहां कई वर्षों से धार्मिक अवसरों पर पूजा होती रही है। उन्होंने इस संबंध में दस्तावेज होने की बात भी कही है। पेड़ के स्वामित्व और इस्तेमाल को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
रामलीला समिति ने नमाज पर रोक से किया इनकार
रामलीला समिति के प्रधान व्यास दयाशंकर त्रिपाठी ने परंपरा नहीं निभाए जाने पर दुख जताया। उनका कहना है कि यह आयोजन लंबे समय से धार्मिक सद्भाव का संदेश देता रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि नमाजियों का इस बार नहीं पहुंचना रामलीला या मंदिर के प्रति विरोध का संकेत हो सकता है। हालांकि, इस आशंका की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष ने नीम के पेड़ से जुड़े विवाद और शिकायतों पर सुनवाई नहीं होने को नाराजगी की वजह बताया है। समिति ने अपनी ओर से नमाज रोकने की किसी कार्रवाई से इनकार किया है।
मस्जिद की मरम्मत को लेकर भी नाराजगी का दावा
मीडिया रिपोर्टों में एक नमाजी के हवाले से बताया गया कि मस्जिद के मौजूदा हिस्से में टूट-फूट की मरम्मत पर रोक लगाए जाने से मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों में नाराजगी है। इस नाराजगी को भी नमाज की परंपरा नहीं निभाने की वजह बताया गया है। हालांकि, यह संबंधित व्यक्ति का दावा है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। मामले में दोनों पक्षों के बयान और संबंधित दस्तावेज अहम होंगे।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हुआ रामलीला का मंचन
नमाज नहीं होने के बावजूद रामलीला का आयोजन निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहा। जयंत नेत्रभंग प्रसंग का मंचन शाम करीब छह बजे हुआ और इसके बाद अन्य लीलाएं भी आयोजित की गईं। इस घटनाक्रम ने लाटभैरव क्षेत्र में धार्मिक स्थलों, परंपराओं और स्थानीय विवादों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि नीम के पेड़ और मस्जिद की मरम्मत से जुड़े विवाद पर प्रशासन क्या कदम उठाता है और दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने की कोई पहल होती है या नहीं।

