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कन्नौज में 10 किलो सोना मिला, 26 बिस्कुट पर सवाल

  • एक्सप्रेसवे हादसे के बाद कार से 10.026 किलो सोना बरामद, अखिलेश के 26 बिस्कुट वाले दावे से जांच पर नया विवाद

भारत 19

कन्नौज। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक सड़क हादसे ने कथित सोना तस्करी के ऐसे मामले का खुलासा किया, जो अब बरामदगी से आगे बढ़कर राजनीतिक आरोपों और जांच की पारदर्शिता के सवाल तक पहुंच गया है। पुलिस के आधिकारिक रिकॉर्ड में 10.026 किग्रा 24 कैरेट सोना दर्ज है, जिसकी कीमत करीब 15.39 करोड़ रुपये आंकी गई है। दो लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें एक नेपाल का नागरिक है। लेकिन समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और कन्नौज के सांसद अखिलेश यादव ने दावा किया है कि कार से 26 एक-एक किलो के सोने के बिस्कुट मिले थे, जबकि पुलिस ने केवल 10 बिस्कुट की बरामदगी दिखाई। यही दावा अब पूरे मामले में नया विवाद बन गया है।

पुलिस के अनुसार, घटना 22 अगस्त की रात तालग्राम थाना क्षेत्र में हुई। कांवड़ ड्यूटी और वाहन चेकिंग के बाद लौट रही पुलिस टीम के वाहन को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर एक ब्रेजा कार ने टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने कार सवारों की गतिविधियों पर संदेह होने पर वाहन की तलाशी ली। तलाशी के दौरान एक बैग से सोने के बिस्कुट मिले। पुलिस ने दोनों कार सवारों से बरामद सोने के संबंध में बिल, लाइसेंस या अन्य वैध दस्तावेज मांगे, लेकिन वे संतोषजनक कागजात नहीं दिखा सके। एसबीआई के स्वर्ण मूल्यांकनकर्ता से जांच कराई तो पता चला कि वह 24 कैरेट का था। पुलिस के मुताबिक इसका कुल वजन 10.026 किग्रा और अनुमानित कीमत करीब 15.39 करोड़ रुपये है।

हिरासत में लिए गए लोगों की पहचान 29 वर्षीय संदीप जायसवाल, निवासी महाराजगंज, और 33 वर्षीय सरोज पंत, निवासी नेपाल के रूप में हुई है। इतनी बड़ी मात्रा में सोना मिलने और एक व्यक्ति के नेपाली नागरिक होने के कारण जांच एजेंसियों ने तस्करी के संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की आशंका भी जताई है। पुलिस ने मामले की जानकारी जीएसटी विभाग को दी और आगे की जांच कस्टम विभाग के स्तर पर भेजी गई है। बरामद सोना भी नियमानुसार कस्टम विभाग को सौंपे जाने की जानकारी दी गई है।

हादसे ने खोला तस्करी का संभावित नेटवर्क

मामले की सबसे असाधारण बात यह है कि सोने की खेप किसी विशेष खुफिया आपरेशन में नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटना के बाद सामने आई। एक सामान्य दिखने वाली दुर्घटना के बाद कार की तलाशी हुई और करोड़ों रुपये का सोना बरामद होने का दावा सामने आया। अब जांच का दायरा केवल इतना तय करने तक सीमित नहीं है कि बरामद सोना वैध था या अवैध। कस्टम विभाग के सामने यह भी पता लगाने की चुनौती है कि सोना कहां से आया, कार किस दिशा में जा रही थी, इसका अंतिम गंतव्य क्या था और दोनों हिरासत में लिए गए लोग किसी बड़े तस्करी नेटवर्क से जुड़े हैं या नहीं। जीएसटी अधिकारियों ने भी मामले में अंतरराष्ट्रीय सोना तस्करी रैकेट की आशंका जताई है।

26 बिस्कुट के दावे ने बदला मामला

रविवार को इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर पुलिस की बरामदगी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कार से एक-एक किलो के 26 सोने के बिस्कुट पकड़े गए थे, लेकिन आधिकारिक तौर पर केवल 10 बिस्कुट दिखाए गए। अखिलेश ने शेष 16 बिस्कुटों का हिसाब मांगते हुए पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर सवाल उठाया। यहां दो अलग-अलग दावे साफ तौर पर सामने हैं। पुलिस का आधिकारिक पक्ष 10.026 किलोग्राम सोने की बरामदगी का है, जबकि 26 एक-एक किलो के बिस्कुट मिलने की बात अखिलेश यादव ने अपने आरोप के रूप में कही है। उपलब्ध रिपोर्टों में इस 26 किलो के दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। इसलिए जांच के स्तर पर फिलहाल 10.026 किलोग्राम सोना ही दर्ज बरामदगी है, जबकि 26 बिस्कुट का मामला राजनीतिक आरोप और उससे जुड़े सवाल के रूप में सामने आया है।

जांच के सामने अब दोहरी चुनौती

घटनाक्रम के बाद जांच एजेंसियों के सामने दो अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण सवाल हैं। पहला, 10 किलो से अधिक सोने की खेप के पीछे कौन लोग हैं और इसका संभावित तस्करी नेटवर्क कितना बड़ा है। दूसरा, बरामदगी की मात्रा को लेकर उठे राजनीतिक सवालों पर स्पष्ट और तथ्यात्मक स्थिति सामने लाना। कस्टम जांच से सोने की खेप के स्रोत, रूट और नेटवर्क की जानकारी सामने आती है तो यह मामला एक बड़े तस्करी रैकेट तक पहुंच सकता है। वहीं, जब्ती और बरामदगी की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी होगी, क्योंकि 26 बिस्कुट के दावे ने पुलिस की कार्रवाई को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।

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