- पुणे में महिलाओं की स्वतंत्रता पर टिप्पणी के बाद विहिप और भाजपा ने किया पलटवार
भारत 19
नई दिल्ली। महिलाओं की स्वतंत्रता और सामाजिक पितृस त्ता पर राहुल गांधी की टिप्पणी ने मनुस्मृति के संदर्भ के साथ नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। पुणे में कांग्रेस के युवा कार्यक्रम ‘छात्रों की गूंज’ में राहुल गांधी ने कहा कि महिला किसी पिता, पति या पुत्र की संपत्ति नहीं, बल्कि स्वयं की स्वतंत्र पहचान रखती है। मनुस्मृति में महिलाओं की पुरुषों पर निर्भरता से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ऐसी सोच को शर्मनाक बताया।
राहुल गांधी ने कहा कि देश की महिलाओं की आकांक्षाएं और क्षमताएं भारत की बड़ी ताकत हैं, लेकिन समाज अक्सर उनकी पहचान को बेटी, पत्नी या मां जैसे रिश्तों तक सीमित कर देता है। उन्होंने युवतियों से अपनी स्वतंत्र पहचान और फैसलों के लिए खड़े होने की अपील की। साथ ही भाजपा और आरएसएस पर महिलाओं को सीमित दायरे में रखने वाली मानसिकता को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
विहिप ने बयान को लेकर राहुल पर साधा निशाना
राहुल के बयान के बाद विश्व हिंदू परिषद ने उन पर हिंदू समाज और परंपराओं के बारे में युवाओं के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। विहिप का कहना है कि धार्मिक ग्रंथों की चुनिंदा व्याख्या कर राजनीतिक संदेश देना उचित नहीं है। भाजपा नेताओं ने भी राहुल गांधी के बयान और महिला सशक्तीकरण पर उनके राजनीतिक रुख को लेकर सवाल उठाए हैं। इस विवाद के केंद्र में अब दो अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। राहुल गांधी इसे महिला की स्वतंत्र पहचान और पितृसत्तात्मक सोच के खिलाफ बहस के रूप में पेश कर रहे हैं, जबकि विहिप और भाजपा इसे मनुस्मृति तथा हिंदू परंपराओं की एकतरफा व्याख्या से जोड़कर देख रहे हैं।
राहुल गांधी का मूल कार्यक्रम युवतियों से संवाद और उनकी समस्याओं को सुनने के लिए आयोजित किया गया था, लेकिन मनुस्मृति के संदर्भ ने इसे राजनीतिक बहस में बदल दिया। रविवार को विहिप और भाजपा की प्रतिक्रियाओं के बाद यह मुद्दा महिला अधिकारों की चर्चा से आगे बढ़कर धर्म, परंपरा और राजनीति की नई वैचारिक टकराहट के रूप में उभर आया।


