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यूपी में पीएम आवास के 5.56 लाख घरों का आवंटन

– 6.18 लाख के केंद्रीय लक्ष्य में से पहले चरण में 5,56,634 आवास बांटे गए; सीतापुर को सबसे ज्यादा 47,160, प्रयागराज को 17,004 घर

भारत 19

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के नए चरण को अब जमीन पर उतारने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले चरण में 75 जिलों के लिए 5,56,634 ग्रामीण आवासों का जिला-वार आवंटन किया है। यह संख्या जून में केंद्र से यूपी के लिए मंजूर किए गए 6,18,482 आवासों का करीब 90 फीसदी है। अब अगला फोकस पात्र परिवारों को आवास स्वीकृत करने और निर्माण शुरू कराने पर होगा। यानी केंद्र से मंजूरी के बाद योजना का वह चरण शुरू हो रहा है, जहां आवासों की वास्तविक डिलीवरी की गति और लाभार्थियों के चयन की पारदर्शिता अहम होगी।

सीतापुर सबसे आगे, प्रयागराज को 17 हजार घर

जिला-वार आवंटन में सीतापुर 47,160 आवासों के साथ सबसे ऊपर है। इसके बाद सोनभद्र को 35,412, बहराइच को 27,229, लखीमपुर खीरी को 24,139 और प्रतापगढ़ को 23,092 आवास मिले हैं। प्रयागराज को 17,004 आवास आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा बांदा को 21,673, मिर्जापुर को 16,109, सुल्तानपुर को 16,032, जौनपुर को 15,253, बाराबंकी को 15,124 और हरदोई को 14,871 आवास दिए गए हैं। इस आवंटन से जिलों को यह स्पष्ट हो गया है कि नए चरण में कितने ग्रामीण परिवारों को आवास योजना का लाभ दिया जाना है।

जून में केंद्र ने मंजूर किए थे 6.18 लाख घर

इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत 25 जून 2026 को हुई केंद्रीय मंजूरी से हुई थी। केंद्र ने प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के नए चरण में उत्तर प्रदेश के लिए 6,18,482 पक्के मकानों को मंजूरी दी थी। यह चरण 2024-25 से 2028-29 की अवधि में देशभर में अतिरिक्त दो करोड़ ग्रामीण मकान बनाने के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। पहले चरण में 5,56,634 आवासों का जिला-वार आवंटन होने के बाद करीब 61,848 आवास अभी शेष रहते हैं। ऐसे में आने वाले चरणों में इनके आवंटन पर भी नजर रहेगी।

यूपी पहले भी बना चुका है लाखों ग्रामीण घर

यूपी में पीएम आवास योजना-ग्रामीण का यह पहला बड़ा आवास आवंटन नहीं है। राज्य के आर्थिक दस्तावेज के मुताबिक योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र में 36.37 लाख आवासों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में भी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के लिए 6,102 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस पृष्ठभूमि में नया आवंटन केवल मकानों की संख्या बढ़ाने का मामला नहीं है, बल्कि पहले से चल रही योजना की डिलीवरी व्यवस्था पर भी दबाव बढ़ाएगा।

पुरानी योजना में CAG ने भी उठाए थे सवाल

योजना की बड़ी संख्या के साथ उसकी निगरानी भी चुनौती है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की यूपी में PMAY-G पर परफॉर्मेंस ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2024 तक 2016-17 से 2022-23 के दौरान स्वीकृत 34.71 लाख मकानों में 34.18 लाख यानी 98.47 फीसदी मकान पूरे हो चुके थे। हालांकि ऑडिट में योजना के क्रियान्वयन में कई कमियां भी सामने आई थीं। CAG की विस्तृत रिपोर्ट में कुछ मामलों में लाभार्थियों के बजाय दूसरे खातों में किस्त जाने और मार्च 2025 तक 20,215 मकानों के अधूरे रहने जैसी गड़बड़ियां भी दर्ज की गईं। ऐसे में नए 5.56 लाख आवासों के आवंटन के बाद असली कसौटी पात्र लाभार्थी का सही चयन, समय पर किस्त, निर्माण की गुणवत्ता और मकान का समय से पूरा होना होगी।

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