- 44 सेवानिवृत्त शिक्षकों और 10 शोधकर्ताओं का सम्मान; सीएसजेएमयू में शिक्षण, शोध और नई तकनीक को एक साथ आगे बढ़ाने पर जोर
भारत 19
कानपुर। शिक्षक की भूमिका अब सिर्फ कक्षा में पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं रहने वाली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता और नई तकनीक शिक्षा के तरीके बदल रही है और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) भी इसी बदलाव के साथ कदम बढ़ाने की तैयारी में है। शिक्षक दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह में शिक्षकों के योगदान को सम्मान देने के साथ उच्च शिक्षा को एआई और नई तकनीक से जोड़ने पर जोर दिया गया। समारोह में 44 सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित किया गया, जबकि उत्कृष्ट शोध के लिए 10 शिक्षकों को ‘स्वर्गीय गोविंद हरि सिंघानिया सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र अवार्ड’ प्रदान किया गया। विश्वविद्यालय परिसर के 17 शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया।
सीएसजेएमयू की यह दिशा महज समारोह में कही गई बात तक सीमित नहीं है। विश्वविद्यालय ने मार्च 2026 में ‘द एआई एन्हांस्ड एजुकेटर’ विषय पर सात दिवसीय कार्यशाला आयोजित की थी, जिसका उद्देश्य शिक्षकों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों को शिक्षण, शोध और अकादमिक प्रशासन में आधुनिक एआई उपकरणों से दक्ष बनाना था।
एआई बदलेगा शिक्षक का काम करने का तरीका
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि उच्च शिक्षा को नई तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ आगे बढ़ाना समय की जरूरत है। अनुभवी शिक्षकों के ज्ञान को युवा शिक्षकों की ऊर्जा और तकनीकी दक्षता के साथ जोड़कर शिक्षा को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। इसका मतलब सिर्फ कक्षा में एआई उपकरणों का इस्तेमाल करना नहीं, बल्कि पढ़ाने की तैयारी, अध्ययन सामग्री, शोध, मूल्यांकन और अकादमिक प्रशासन के तरीकों में बदलाव से है। सीएसजेएमयू की एआई पहल में शिक्षकों को इन आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल के लिए प्रशिक्षित करने पर पहले ही जोर दिया जा चुका है।
सम्मान के मंच पर शोध को भी मिला बड़ा संदेश
समारोह में उत्कृष्ट शोध के लिए 10 शिक्षकों को विशेष सम्मान दिया गया। इनमें लाइफ साइंसेज के डॉ. राकेश कुमार शर्मा, फार्मेसी के डॉ. अजय कुमार यादव, माइक्रोबायोलॉजी की डॉ. एकता खरे, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के अतुल कुमार अग्निहोत्री, भूगोल के डॉ. प्रदीप कुमार राजपूत, वनस्पति विज्ञान की डॉ. ज्योति सिंह जादौन, गृह विज्ञान की डॉ. भारती पांडेय, जंतु विज्ञान की डॉ. ईशा यादव और डॉ. संगीता अवस्थी तथा गणित के डॉ. मनिंदर सिंह अरोड़ा शामिल रहे। शोध को प्रोत्साहन सीएसजेएमयू की व्यापक अकादमिक दिशा का भी हिस्सा है। विश्वविद्यालय अपनी शोध व्यवस्था में शोध सुविधाओं के विस्तार, शिक्षकों को शोध के लिए सहायता और नवाचार को बढ़ावा देने की नीतियों पर काम कर रहा है।
शिक्षा का मकसद सिर्फ डिग्री नहीं: संजीव गुप्ता
मुख्य अतिथि चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव गुप्ता ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल पाठ्यक्रम पूरा करना या डिग्री हासिल करना नहीं है। विद्यार्थियों में सवाल पूछने, सीखने और ज्ञान की तलाश करने की प्रवृत्ति विकसित करना शिक्षक की बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि अच्छा शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर सीखने की ऐसी लौ जलाता है, जो कक्षा खत्म होने के बाद भी बनी रहती है।
पुराने अनुभव को नई तकनीक से जोड़ने की कोशिश
समारोह में 44 सेवानिवृत्त शिक्षकों को सम्मानित करना भी इसी बदलाव की दूसरी तस्वीर रही। विश्वविद्यालय के लंबे अनुभव और नई पीढ़ी की तकनीकी क्षमता को साथ लेकर चलने का संदेश सामने आया। एक तरफ अनुभवी शिक्षकों का ज्ञान है, तो दूसरी तरफ एआई जैसी तकनीक। चुनौती अब इन दोनों को आमने-सामने खड़ा करने की नहीं, बल्कि एक-दूसरे का पूरक बनाने की है।
आयुर्वेद ने बताया स्वस्थ जीवन का रास्ता
विशिष्ट अतिथि आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. वंदना पाठक ने आयुर्वेद की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसका उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवनशैली का मार्ग दिखाना भी है। उन्होंने आयुर्वेद को वैज्ञानिक और व्यावहारिक दृष्टिकोण से समझने की जरूरत बताई।
सीएसजेएमयू में शिक्षा का अगला अध्याय
समारोह में विश्वविद्यालय परिसर के 17 शिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। शिक्षकों ने अपने शोध और अकादमिक उपलब्धियों को साझा किया। कुल मिलाकर शिक्षक दिवस का कार्यक्रम केवल सम्मान तक सीमित नहीं रहा। 44 सेवानिवृत्त शिक्षकों का अनुभव, 10 शिक्षकों के शोध की पहचान और एआई को शिक्षा से जोड़ने की पहल—तीनों मिलकर सीएसजेएमयू की बदलती अकादमिक तस्वीर पेश करते हैं।


