- आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर शंकर प्रसाद रथ को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026, बहु-हीम प्रोटीन पर शोध के साथ 165 से अधिक शोधपत्र और नई पीढ़ी के वैज्ञानिक तैयार करने में अहम योगदान
भारत 19 डेस्क
कानपुर। विज्ञान की जटिल पहेलियों को प्रयोगशाला में समझना और उसी विज्ञान को विद्यार्थियों के लिए आसान बनाना—आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर शंकर प्रसाद रथ की पहचान इन दोनों भूमिकाओं से बनी है। बहु-हीम प्रोटीन और एंजाइम पर उनके शोध ने उन्हें वैज्ञानिक जगत में पहचान दिलाई तो विद्यार्थियों के साथ लंबे शिक्षण अनुभव ने उन्हें एक अलग मुकाम दिया। अब इसी दोहरी उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस पर नई दिल्ली के विज्ञान भवन में उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 से सम्मानित किया। इस वर्ष उच्च शिक्षा और पॉलिटेक्निक संस्थानों के 21 शिक्षकों को यह सम्मान दिया गया।

प्रयोगशाला में प्रकृति के जटिल रहस्य तलाशते हैं रथ
प्रोफेसर रथ का शोध जैव-अकार्बनिक रसायन, बहु-हीम प्रोटीन और एंजाइम जैसे क्षेत्रों से जुड़ा है। उनके काम में यह समझने की कोशिश शामिल है कि प्रोटीन में मौजूद लौह-युक्त केंद्र किस तरह इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण और जीवन से जुड़ी रासायनिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाते हैं। आईआईटी कानपुर की आधिकारिक प्रोफाइल में भी बहु-हीम प्रोटीन, एंजाइम, रासायनिक जीवविज्ञान और औषधीय अकार्बनिक रसायन उनके प्रमुख शोध क्षेत्रों में शामिल हैं।
165 से ज्यादा शोधपत्र, 92 शोधार्थियों को दिशा
वर्ष 2004 से आईआईटी कानपुर से जुड़े प्रोफेसर रथ 2014 से रसायन विज्ञान विभाग में प्रोफेसर हैं। उनके नाम 165 से अधिक शोधपत्र हैं। उनके मार्गदर्शन में 27 पीएचडी शोधार्थी, 40 स्नातकोत्तर विद्यार्थी और 25 पोस्ट-डॉक्टोरल शोधकर्ता अपना शोध कार्य पूरा कर चुके हैं। यानी उनका योगदान केवल प्रयोगशाला में नए निष्कर्षों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने शोधकर्ताओं की एक नई पीढ़ी को भी तैयार किया।
रसायन विज्ञान को किताब से निकालकर जीवन से जोड़ा
प्रोफेसर रथ की शिक्षण शैली का एक महत्वपूर्ण पहलू विषय को रोजमर्रा की जिंदगी और शरीर में होने वाली प्रक्रियाओं से जोड़ना है। उन्होंने आईआईटी कानपुर में स्नातक विद्यार्थियों के लिए ‘इनऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स, मैटेरियल्स एंड मेडिसिन’ नामक वैकल्पिक पाठ्यक्रम विकसित किया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना है कि रसायन विज्ञान केवल प्रयोगशाला या किताबों तक सीमित विषय नहीं, बल्कि जीवन और चिकित्सा से भी गहराई से जुड़ा है।
पढ़ाने के साथ वंचित विद्यार्थियों पर भी जोर
उनकी भूमिका केवल नियमित कक्षाओं तक सीमित नहीं रही। उन्होंने कमजोर शैक्षणिक पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों के लिए तैयारी पाठ्यक्रम से भी जुड़कर काम किया। इसके अलावा विद्यार्थी कल्याण, पाठ्यक्रम विकास और संस्थागत जिम्मेदारियों में भी उनकी भागीदारी रही है। यही पक्ष उन्हें केवल सफल शोधकर्ता के बजाय विद्यार्थियों के शिक्षक और मार्गदर्शक की पहचान देता है।
कई राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से पहले ही मिली पहचान
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से पहले भी प्रोफेसर रथ को कई प्रतिष्ठित सम्मान मिल चुके हैं। इनमें अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट रिसर्च फेलोशिप, जेएसपीएस इन्विटेशनल फेलोशिप, केमिकल रिसर्च सोसाइटी ऑफ इंडिया के ब्रॉन्ज और सिल्वर मेडल, सीएनआर राव राष्ट्रीय रसायन विज्ञान पुरस्कार और एसईआरबी-स्टार पुरस्कार शामिल हैं। आईआईटी कानपुर में वे वर्तमान में उमंग गुप्ता चेयर के धारक भी हैं।
वैज्ञानिक उपलब्धि से आगे शिक्षक की असली पहचान
राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए केवल कक्षा में पढ़ाने को ही आधार नहीं बनाया गया। शिक्षण-अधिगम की प्रभावशीलता के साथ शोध एवं नवाचार, समाज तक पहुंच, परामर्श और अन्य शैक्षणिक योगदान को भी चयन का आधार बनाया गया। इसी व्यापक दृष्टिकोण में प्रोफेसर रथ की उपलब्धियां खास महत्व रखती हैं। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि विश्वविद्यालय में शिक्षक की भूमिका सिर्फ पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित नहीं होती। अच्छा शिक्षक ज्ञान देता है, बेहतर शिक्षक सवाल पूछना सिखाता है और उत्कृष्ट शिक्षक अगली पीढ़ी को उस ज्ञान से आगे जाने की क्षमता देता है। प्रोफेसर रथ का राष्ट्रीय सम्मान इसी शोध और शिक्षण के मेल की पहचान है।
