- सीएसए में चंद्रशेखर कृषक समिति के 42वें स्थापना दिवस पर कृषि उद्यमिता, बीज उत्पादन, सहफसली और फूलों की खेती से आय के नए रास्ते बनाने पर जोर
भारत 19
कानपुर। खेती अब सिर्फ ज्यादा फसल पैदा करने तक सीमित नहीं रह सकती। बदलते मौसम, बढ़ती लागत और बाजार की चुनौतियों के बीच किसान को खेत से आगे बढ़कर कृषि उद्यमी बनने की जरूरत है। एक फसल पर निर्भरता कम कर सहफसली खेती, फूलों की खेती और बीज उत्पादन जैसे विकल्पों से आमदनी के नए रास्ते खोले जा सकते हैं। चंद्रशेखर कृषक समिति के 42वें स्थापना दिवस पर चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती के इसी बदलते मॉडल की ओर बढ़ने का संदेश दिया।
एक फसल पर निर्भरता घटाकर आय बढ़ाएं
स्थापना दिवस कार्यक्रम में सीएसए के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता ने किसानों से पारंपरिक खेती तक सीमित न रहने और कृषि उद्यमिता तथा स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि किसान देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला वर्ग है। ऐसे में समय के साथ खेती के तौर-तरीकों में बदलाव जरूरी है, ताकि किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि कृषि उद्यमी बनकर भी लाभ कमा सकें।
उन्होंने रबी फसलों की तैयारियों को लेकर किसानों को समय पर निर्णय लेने की सलाह दी। बताया कि रबी फसलों की बुवाई के लिए 15 अक्टूबर से 15 नवंबर के बीच का समय महत्वपूर्ण है। बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को बुवाई से पहले विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों से सलाह लेने को कहा गया। मोबाइल, वाट्सऐप समूह अथवा व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से आधुनिक कृषि तकनीकों की जानकारी लेने पर भी जोर दिया गया।
सहफसली और फूलों की खेती से बढ़ेगी आमदनी
कुलपति ने सहफसली और फूलों की खेती को किसानों के लिए अतिरिक्त आय का उपयोगी विकल्प बताया। उन्होंने कहा कि किसी एक फसल को नुकसान होने की स्थिति में दूसरी फसल किसान की आय को संभाल सकती है। इससे खेती का जोखिम घटाने के साथ आमदनी के स्रोत भी बढ़ाए जा सकते हैं। उन्होंने युवा किसानों को बीज उत्पादन से जुड़कर स्वरोजगार खड़ा करने की सलाह दी। बीज उत्पादन को खेती के साथ अतिरिक्त आर्थिक गतिविधि के रूप में अपनाकर युवा किसान अपनी आय का नया जरिया बना सकते हैं।
खेती के साथ कारोबार की सोच अपनाएं किसान
कार्यक्रम में किसानों को संदेश दिया गया कि कृषि में आय बढ़ाने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। खेती से जुड़े दूसरे कामों को भी आय का हिस्सा बनाना होगा। विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. वीके त्रिपाठी ने किसानों के लिए संचालित प्रसार गतिविधियों की जानकारी दी, जबकि डॉ. पीके राठी ने कृषि क्षेत्र में चल रही विभिन्न योजनाओं से किसानों को अवगत कराया। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती से जुड़े समसामयिक विषयों और नई तकनीकों की जानकारी भी दी। सीएसए की किसान सेवा व्यवस्था में मौसम और फसल प्रबंधन से जुड़ी वैज्ञानिक सलाह किसानों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी है।
वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों का सम्मान
कार्यक्रम में कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए 15 कृषि वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया। इनमें डॉ. महक सिंह, डॉ. कौशल कुमार, डॉ. अखिलेश मिश्रा, डॉ. रामजी गुप्ता, डॉ. पीके राठी, डॉ. उमानाथ शुक्ला, डॉ. विनीता सिंह, डॉ. भूपेंद्र कुमार सिंह, डॉ. विनोद प्रकाश, डॉ. खलील खान, डॉ. उमेश चंद्र उत्तम, डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह, डॉ. रामसूरत वर्मा और डॉ. निमिषा अवस्थी सहित अन्य वैज्ञानिक शामिल रहे।
वहीं कृषि क्षेत्र में नवाचार करने वाले 15 प्रगतिशील किसानों को भी सम्मानित किया गया। इनमें इटावा के अनिल यादव, सरसौल के समर सिंह भदौरिया, उन्नाव के जगदीश सिंह, शिवराजपुर के कमल किशोर तथा कानपुर देहात के राजेश त्रिपाठी और फूल सिंह शामिल रहे। पूर्व विधायक रघुनंदन सिंह भदौरिया और सरसौल ब्लॉक प्रमुख डॉ. विजय रत्ना तोमर ने भी किसानों को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. जितेंद्र सिंह ने किया।
अब खेती का लक्ष्य सिर्फ उपज नहीं, आमदनी भी
चंद्रशेखर कृषक समिति के स्थापना दिवस का संदेश मूल रूप से खेती की बदलती जरूरतों पर केंद्रित रहा। एक फसल पर निर्भरता घटाना, खेत में विविधता लाना, बीज उत्पादन जैसे कामों को स्वरोजगार से जोड़ना और सहफसली व फूलों की खेती के जरिए अतिरिक्त आमदनी हासिल करना अब किसान की आर्थिक मजबूती का महत्वपूर्ण रास्ता बन सकता है।

