- एफडीआई, रक्षा उद्योग, एसईजेड और निवेश की अड़चनों पर उद्योग जगत से सीधा संवाद; छह-सात सितंबर को केंद्र और प्रदेश सरकार के अधिकारियों के सामने भी रखी जाएगी कानपुर के औद्योगिक विकास की तस्वीर
भारत 19
कानपुर। शहर को सिर्फ अपनी पुरानी औद्योगिक पहचान के सहारे आगे बढ़ना नहीं है, बल्कि नए निवेश, आधुनिक तकनीक और रोजगार के नए अवसर भी पैदा करने हैं। बंद और सीमित गतिविधियों वाली औद्योगिक इकाइयों की परिसंपत्तियों के पुन: उपयोग से लेकर रक्षा उत्पादन, चमड़ा, इंजीनियरिंग, एमएसएमई और निर्यात तक शहर के उद्योगों के सामने कई चुनौतियां हैं। अब इन चुनौतियों और संभावनाओं की सीधी पड़ताल संसद की वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति करेगी। सांसद रमेश अवस्थी की पहल पर लोकसभा की वाणिज्य संबंधी स्थायी समिति का अध्ययन दल छह और सात सितंबर को कानपुर आएगा। दल के सदस्य उद्योग जगत, वित्तीय संस्थानों, केंद्र और प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ संवाद करेंगे। मकसद केवल उद्योगों की स्थिति जानना नहीं, बल्कि निवेश बढ़ाने में आ रही अड़चनों और उन्हें दूर करने के रास्तों को समझना भी होगा।
निवेश आए तो कहां अटकता है कानपुर का उद्योग
समिति के सामने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से जुड़े मुद्दे और चुनौतियां प्रमुख रूप से रखी जाएंगी। इसके साथ विशेष आर्थिक क्षेत्र यानी एसईजेड की नीतियों, नियामकीय व्यवस्था और संचालन से जुड़े पहलुओं पर भी चर्चा होगी। कानपुर के उद्योगों के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि एसईजेड और निवेश नीतियां सीधे पूंजी, निर्यात और औद्योगिक विस्तार से जुड़ी हैं। केंद्र का एसईजेड तंत्र भी निवेश और रोजगार बढ़ाने को अपनी प्रमुख मंशाओं में रखता है।
रक्षा उद्योग में निवेश की संभावनाओं पर खास जोर
कानपुर में रक्षा उत्पादन की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। हाल में यहां आयोजित क्षेत्रीय रक्षा कार्यशाला में भी स्थानीय एमएसएमई को रक्षा आपूर्ति शृंखला से जोड़ने और निवेश आकर्षित करने पर जोर दिया गया था। संसदीय समिति के दौरे में रक्षा क्षेत्र के निर्माताओं, औद्योगिक संगठनों और प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों से बातचीत इसी दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। चर्चा में यह समझने की कोशिश होगी कि रक्षा परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाने, विदेशी निवेश लाने और स्थानीय उद्योगों को बड़े उत्पादन तंत्र से जोड़ने में क्या अड़चनें हैं।
बैंकों से पूछे जाएंगे निवेश और वित्त के सवाल
समिति वित्तीय संस्थानों से भी बातचीत करेगी। बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया और वित्तीय सेवा विभाग के प्रतिनिधियों के साथ रक्षा परियोजनाओं के वित्तपोषण, विदेशी निवेश और एसईजेड से जुड़े वित्तीय पहलुओं पर चर्चा प्रस्तावित है। यानी उद्योगों की समस्या को केवल नीति के स्तर पर नहीं, बल्कि पैसा कहां से आएगा और परियोजना जमीन पर कैसे उतरेगी, इस नजरिये से भी देखा जाएगा।
बंद मिलों से नए उद्योग तक की तलाश
कानपुर की औद्योगिक तस्वीर में बंद और सीमित गतिविधियों वाली पुरानी इकाइयां भी बड़ा सवाल हैं। सांसद रमेश अवस्थी हाल में एनटीसी और बीआईसी की ऐसी परिसंपत्तियों के पुन: उपयोग के लिए आईआईटी कानपुर से औद्योगिक पुनरुद्धार का रोडमैप तैयार करने की बात कह चुके हैं। इसमें आधुनिक तकनीक, अनुसंधान, कौशल विकास, स्टार्टअप और उद्यमिता को जोड़ने का सुझाव दिया गया है। ऐसे में संसदीय समिति का दौरा इस बड़े सवाल से भी जुड़ता है कि पुरानी औद्योगिक जमीन और संसाधनों को नए निवेश और रोजगार के केंद्र में कैसे बदला जाए।
सात सितंबर को उद्योग से लेकर शासन तक संवाद
सात सितंबर को सुबह रक्षा क्षेत्र के निर्माताओं, वाणिज्य मंडल और प्रमुख औद्योगिक हितधारकों के साथ बातचीत होगी। इसके बाद एसईजेड के विकासकर्ताओं, संचालकों और अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी। इसमें उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग, विकास आयुक्तों, निर्यात संवर्धन परिषदों और रक्षा मंत्रालय के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी प्रस्तावित है। दोपहर में उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव के साथ बैठक में एफडीआई आकर्षित करने और एसईजेड क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर चर्चा होगी। इसके बाद समिति स्थानीय स्तर पर एफडीआई और एसईजेड से जुड़े औद्योगिक क्षेत्रों का दौरा भी करेगी।
कानपुर के लिए मौका, शिकायत से आगे की बात
कानपुर का चमड़ा, कपड़ा, इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन और एमएसएमई क्षेत्र निवेश की नई संभावनाएं तलाश रहा है। सांसद रमेश अवस्थी की संसदीय गतिविधियों में भी बंद मिलों को फिर शुरू कराने और रोजगार सृजन का मुद्दा पहले उठ चुका है। इस लिहाज से समिति के सामने उद्योग जगत के पास केवल अपनी समस्याएं गिनाने का मौका नहीं होगा। असली सवाल यह होगा कि कानपुर की औद्योगिक क्षमता को नए निवेश, आधुनिक तकनीक, निर्यात और रोजगार में बदलने के लिए कौन-से फैसले जरूरी हैं।
यही वजह है कि छह-सात सितंबर का यह दौरा महज संसदीय समिति की औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि कानपुर के उद्योगों की मौजूदा स्थिति और भविष्य की संभावनाओं को नीति-निर्माताओं के सामने सीधे रखने का महत्वपूर्ण अवसर बन सकता है।


