उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पोस्टर वार तेज होता दिखाई दे रहा है। सोमवार को लखनऊ समेत उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर सहित कई शहरों में समाजवादी पार्टी और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को निशाना बनाते हुए पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों में अतीक अहमद, आजम खान और मुख्तार अंसारी की तस्वीरों के साथ सपा सरकार के कार्यकाल को लेकर आरोप और सवाल उठाए गए हैं। पोस्टरों पर ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ तथा ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’ जैसे नारे लिखे गए। पोस्टर लगाने वाले की आधिकारिक पहचान अभी सामने नहीं आई है।
कई शहरों में एक साथ लगाए गए पोस्टर
विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सोमवार सुबह उत्तर प्रदेश के कई शहरों में एक जैसे पोस्टर दिखाई दिए। रिपोर्टों के अनुसार लखनऊ में एक दर्जन से अधिक प्रमुख चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर ऐसे पोस्टर लगाए गए।
इसके अलावा उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर समेत अन्य जिलों में भी इसी तरह के पोस्टर सामने आने की जानकारी है।
पोस्टरों में समाजवादी पार्टी के पूर्ववर्ती शासनकाल के दौरान कानून-व्यवस्था और आपराधिक मामलों से जुड़े राजनीतिक आरोपों को प्रमुखता से उठाया गया है।
‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का स्लोगन
इन पोस्टरों में ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ का स्लोगन इस्तेमाल किया गया है। पोस्टरों में उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों के नाम देकर कई चर्चित आपराधिक मामलों और व्यक्तियों का उल्लेख किया गया है।
अवध, पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड, ब्रज और रुहेलखंड जैसे क्षेत्रों के लिए अलग-अलग नामों की सूची दिखाई गई। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इनमें अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी, आजम खान, अनिल दुजाना, याकूब कुरैशी, डीपी यादव, मुन्ना बजरंगी और अन्य नाम शामिल हैं।
हालांकि पोस्टरों में किए गए राजनीतिक दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित तथ्य के तौर पर नहीं लिया जा सकता। ये पोस्टर लगाने वालों की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
पोस्टरों में क्या लिखा गया?
पोस्टरों पर बड़े अक्षरों में लिखा गया है—‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’ और ‘अखिलेश के माफिया, माफिया के अखिलेश’।
इन नारों के जरिए पोस्टर लगाने वालों ने अखिलेश यादव और सपा के शासनकाल को आपराधिक मामलों और कथित माफिया प्रभाव से जोड़ने का राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है।
कुछ पोस्टरों में अलग-अलग व्यक्तियों के नाम के साथ उनके खिलाफ दर्ज मामलों या चर्चित घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है।
क्षेत्रवार नामों की सूची
रिपोर्टों के अनुसार पोस्टरों में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों के लिए अलग-अलग नामों की सूची तैयार की गई है।
अवध क्षेत्र की सूची में अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी, गुलशन यादव, मित्रसेन यादव और रिजवान जहीर जैसे नाम दिखाई दिए।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से जुड़े पोस्टरों में मुकीम काला गिरोह, अनिल दुजाना, याकूब कुरैशी, डीपी यादव और संजीव जीवा के नामों का उल्लेख किया गया।
पूर्वांचल की सूची में मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद, उमाकांत यादव, मुन्ना बजरंगी और रमाकांत यादव समेत अन्य नाम शामिल किए गए।
वहीं बुंदेलखंड, ब्रज और रुहेलखंड से जुड़े पोस्टरों में भी कई राजनीतिक रूप से चर्चित नामों का उल्लेख किया गया है।
पोस्टर किसने लगवाए? अभी तस्वीर साफ नहीं
इस पूरे पोस्टर अभियान का सबसे अहम सवाल यही है कि इसे किस संगठन या व्यक्ति ने शुरू किया। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में पोस्टर लगाने वाले किसी संगठन या व्यक्ति की आधिकारिक पहचान सामने नहीं आई है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक कुछ स्थानों पर प्रशासन ने पोस्टर हटवाए, जबकि गोंडा में सपा कार्यकर्ताओं ने भी ऐसे पोस्टर फाड़ दिए। पुलिस और एलआईयू ने कुछ स्थानों पर पहुंचकर मामले की जानकारी जुटाई।
इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट रूप से कहना संभव नहीं है कि इसके पीछे किसी राजनीतिक दल का आधिकारिक अभियान है।
चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
2027 के विधानसभा चुनाव की तारीखों का अभी ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक दलों की गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे में पोस्टर, बयान और आरोप-प्रत्यारोप चुनावी माहौल का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
इन पोस्टरों में पुराने शासनकाल और आपराधिक मामलों से जुड़े मुद्दों को सामने लाने की कोशिश की गई है। दूसरी ओर, पोस्टर अभियान को लेकर सपा समर्थकों की आपत्ति भी सामने आई है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पोस्टर लगाने की जिम्मेदारी कौन लेता है और समाजवादी पार्टी की ओर से इसका औपचारिक राजनीतिक जवाब क्या आता है।
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पोस्टर वार ने नया रूप ले लिया है। लखनऊ समेत कई शहरों में लगाए गए ‘वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया’ पोस्टरों में अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और आजम खान समेत कई नामों के जरिए सपा और अखिलेश यादव पर राजनीतिक निशाना साधा गया है। हालांकि पोस्टर लगाने वाले व्यक्ति या संगठन की आधिकारिक पहचान अभी स्पष्ट नहीं है। ऐसे में पोस्टरों में लगाए गए आरोपों को राजनीतिक दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।


