- सुप्रीम कोर्ट में SIT की स्टेटस रिपोर्ट से खुलासा; CCTV में कैद हुईं बिना अनुमति नकदी हटाने या छिपाने की घटनाएं, आठ आरोपी चिन्हित और 173 गवाहों के बयान दर्ज
भारत 19
लखनऊ। अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट को दी गई SIT की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक मंदिर परिसर के पिलग्रिम फैसिलिटी सेंटर (PFC) स्थित दान गिनती कक्ष के CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों में 105 ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिनमें बिना अनुमति नकदी हटाने या छिपाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसी के मुताबिक इन घटनाओं में गिनती की प्रक्रिया में शामिल अन्य लोगों की मदद का भी संकेत मिला है। SIT ने आठ आरोपियों की पहचान की है और उनके बैंक खातों में मिले संदिग्ध जमा तथा चल-अचल संपत्तियों की भी जांच की गई है।
70 से बढ़कर 105 हुई CCTV में मिली घटनाएं
राम मंदिर चढ़ावे की जांच में CCTV फुटेज इस पूरे मामले का अहम सबूत बनकर सामने आया है। जून में सामने आई SIT की प्रारंभिक जांच में उपलब्ध करीब 45 दिन के फुटेज में 70 संदिग्ध घटनाएं चिन्हित की गई थीं। ताजा स्टेटस रिपोर्ट में जांच का दायरा बढ़ने के बाद यह संख्या 105 तक पहुंच गई है। रिपोर्ट में इन घटनाओं को नकदी को बिना अनुमति हटाने या छिपाने के रूप में दर्ज किया गया है। SIT ने CCTV के अलावा बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, वित्तीय लेनदेन, फोरेंसिक जांच और गवाहों के बयान को भी जांच का आधार बनाया है। यानी जांच केवल कैमरे में दिखाई देने वाली घटनाओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि कथित रकम के आगे के इस्तेमाल और आरोपियों की संपत्तियों तक भी पहुंचाई गई है।
आठ आरोपी जांच के केंद्र में
सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि SIT ने मामले में आठ आरोपियों की पहचान की है। रिपोर्ट में प्रत्येक आरोपी से जुड़े कथित गबन की अनुमानित रकम, उनके खातों में पाए गए अस्पष्ट जमा और उन संपत्तियों का विवरण भी शामिल किया गया है, जिनमें कथित तौर पर रकम का निवेश किया गया। मामले की FIR में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रामाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के नाम शामिल हैं। इनके अलावा अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि SIT की जांच में सामने आई घटनाएं और आरोप अभी न्यायिक रूप से सिद्ध अपराध नहीं हैं। अंतिम कानूनी स्थिति चार्जशीट और आगे की न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
173 लोगों के बयान, कई स्तर पर हुई जांच
SIT की रिपोर्ट के मुताबिक 14 सितंबर 2026 तक 173 लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके थे। इनमें मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी, अकाउंटिंग से जुड़े कर्मचारी, बैंक अधिकारी, सुरक्षा कर्मी और चार्टर्ड अकाउंटेंट शामिल हैं। जांच में दान की गिनती और हैंडलिंग से जुड़े SOP, सुरक्षा व्यवस्था, CCTV रिकॉर्ड और दान तथा बैंक रिकॉर्ड के मिलान को भी खंगाला गया। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई रिपोर्ट के अनुसार जांच में कथित नकदी हेराफेरी की पहचान के साथ उसके संभावित स्रोत, लेनदेन और संपत्ति से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की गई है।
बहुमूल्य दान में कुछ मामलों में नहीं मिली गड़बड़ी
जांच का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हर आरोप में SIT को गड़बड़ी नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार 200 किलोग्राम चांदी की ईंटों, 38.288 किलोग्राम चांदी, चांदी के हार, चरण पादुका और रामचरितमानस से जुड़े दान के संबंध में लगाए गए आरोपों की भी जांच की गई। संबंधित लोगों से पूछताछ और रिकॉर्ड की जांच के बाद इन मामलों में कोई विसंगति नहीं पाई गई। इसी तरह TCS सॉफ्टवेयर से तैयार 803 बहुमूल्य वस्तुओं की रसीदों का सत्यापन किया गया और उनके रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास पाए गए। ये वस्तुएं SBI के लॉकर में रखी थीं, जिसकी भौतिक जांच भी की गई। रिपोर्ट के मुताबिक इन 803 वस्तुओं में कोई विसंगति नहीं मिली। वहीं 86 ऐसी बहुमूल्य वस्तुएं भी मिलीं, जिनकी रसीद जारी नहीं हुई थी। इनकी अलग से पहचान और भौतिक सत्यापन किया गया।
करीब 944 चांदी का भी सत्यापन
SIT ने करीब 944.411 किलोग्राम चांदी से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की। ट्रस्ट ने इस धातु को पिघलाने के लिए Security Printing and Minting Corporation of India Limited को भेजा था। इससे जुड़े रिकॉर्ड भी SIT ने खंगाले हैं। इससे साफ है कि जांच का दायरा केवल नकद चढ़ावे तक सीमित नहीं रहा। नकदी, बहुमूल्य वस्तुओं, चांदी और उनसे जुड़े दस्तावेजों को भी अलग-अलग स्तर पर सत्यापित किया गया है।
25 सितंबर तक दाखिल होगी चार्जशीट
सुप्रीम कोर्ट में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि जांच लगभग पूरी हो चुकी है और 25 सितंबर 2026 तक चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। यह तारीख इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पहली गिरफ्तारी से 90 दिन की वैधानिक अवधि 25 सितंबर को पूरी हो रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार्जशीट संबंधित सत्र अदालत के समक्ष कानून के मुताबिक आगे बढ़ेगी। साथ ही राज्य सरकार से चार्जशीट की एक प्रति सुप्रीम कोर्ट में भी दाखिल करने को कहा गया है। अदालत ने फिलहाल मामले को सत्र अदालत के अधिकार क्षेत्र से अपने पास लेने से इनकार किया है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में आगे बढ़ी जांच
मामले की शुरुआत दान की रकम को लेकर उठे सवालों से हुई। उत्तर प्रदेश सरकार ने जून में SIT गठित की थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने जांच की प्रगति पर निगरानी रखी और जांच में फोरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश भी दिया। मौजूदा जांच में CCTV, वित्तीय रिकॉर्ड, फोरेंसिक जांच और गवाहों के बयान को एक साथ जोड़ा गया है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने SIT की सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट का अवलोकन किया। अदालत को बताया गया कि जांच में कथित रूप से शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का आकलन किया गया है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आगे की जांच की संभावना कानून के मुताबिक खुली रहेगी।
अब चार्जशीट से सामने आएगी पूरी तस्वीर
फिलहाल SIT की रिपोर्ट ने मामले की जांच को एक नए चरण में पहुंचा दिया है। 105 CCTV घटनाएं, आठ आरोपी, 173 गवाहों के बयान और वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल जांच के प्रमुख आधार हैं। वहीं बहुमूल्य दान से जुड़े कई आरोपों में SIT को विसंगति नहीं मिली है। अब निगाह 25 सितंबर तक दाखिल होने वाली चार्जशीट पर है। उसमें कथित नकदी हेराफेरी की घटनाओं, आरोपियों की भूमिका, रकम और उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तृत विवरण सामने आने की उम्मीद है। इसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया यह तय करेगी कि जांच में सामने आए आरोपों में से किन पर अभियोजन आगे बढ़ता है।
