कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 यानी सीएसए से बर्रा-8 सेक्शन में सिविल निर्माण के साथ सिस्टम इंस्टालेशन का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। रविवार को सीएसए विश्वविद्यालय परिसर में निर्माणाधीन मेट्रो डिपो में सिग्नलिंग उपकरणों की टेस्टिंग प्रक्रिया शुरू की गई। डिपो में 27 प्वाइंट मशीनें, 31 सिग्नल और 55 एक्सल काउंटर लगाए जा रहे हैं, जिनका इंस्टालेशन लगभग पूरा हो चुका है। अधिकारियों के मुताबिक टेस्टिंग के दौरान उपकरणों के आपसी समन्वय, कार्यप्रणाली और विश्वसनीयता की जांच की जाएगी। वहीं, कॉरिडोर-2 के निर्माण के चलते लगाया गया ट्रैफिक डायवर्जन अब समाप्त हो चुका है।
Bharat 19 | kanpur | कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 में सीएसए विश्वविद्यालय से बर्रा-8 तक प्रस्तावित सेक्शन पर निर्माण कार्य के साथ तकनीकी सिस्टम तैयार करने का काम भी चल रहा है।
रविवार को सीएसए विश्वविद्यालय परिसर स्थित निर्माणाधीन डिपो में सिग्नलिंग उपकरणों की टेस्टिंग शुरू की गई। इस दौरान मेट्रो के सिग्नलिंग एवं टेलीकॉम विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
टेस्टिंग का उद्देश्य डिपो में लगाए गए सिग्नलिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली और आपसी समन्वय को परखना है।
27 प्वाइंट मशीनें और 31 सिग्नल लगाए गए
उप्र मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) के जनसंपर्क अधिकारी पंचानन मिश्र के मुताबिक डिपो में सिग्नलिंग प्रणाली के तहत कुल 27 प्वाइंट मशीनें, 31 सिग्नल और 55 एक्सल काउंटर स्थापित किए जाने थे।
इन सभी उपकरणों की इंस्टालेशन प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। अब इनके संचालन और आपसी समन्वय की जांच के लिए टेस्टिंग की जा रही है।
प्वाइंट मशीनें मेट्रो ट्रेनों को एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर सुरक्षित और स्वचालित तरीके से ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
एक्सल काउंटर बताएगा ट्रैक पर ट्रेन की मौजूदगी
सिग्नलिंग सिस्टम में एक्सल काउंटर भी अहम भूमिका निभाते हैं। यह तकनीक ट्रैक के किसी निर्धारित हिस्से में ट्रेन की मौजूदगी का पता लगाने में मदद करती है।
इससे ट्रैक की स्थिति की निगरानी और ट्रेन संचालन को सुरक्षित तरीके से नियंत्रित करने में सहायता मिलती है। टेस्टिंग के दौरान इन उपकरणों की प्रतिक्रिया और सिस्टम के साथ इनके तालमेल की भी जांच की जाएगी।
550 मीटर का टेस्ट ट्रैक भी तैयार हो रहा
सीएसए डिपो के अंदर करीब 550 मीटर लंबे टेस्ट ट्रैक का निर्माण भी किया जा रहा है। इस ट्रैक पर मेनलाइन के समान सॉफ्टवेयर और सिग्नलिंग सेटअप लागू किया गया है।
इसका उद्देश्य मेट्रो संचालन शुरू होने से पहले तकनीकी सिस्टम की अलग-अलग परिस्थितियों में जांच करना है। टेस्टिंग के दौरान सिग्नलिंग उपकरणों की कार्यप्रणाली, आपसी समन्वय और विश्वसनीयता को परखा जाएगा।
तकनीकी सिस्टम की टेस्टिंग से आगे बढ़ेगा प्रोजेक्ट
कॉरिडोर-2 में सिविल निर्माण के साथ-साथ इलेक्ट्रिकल, सिग्नलिंग और टेलीकॉम जैसे सिस्टम से जुड़े कार्य भी महत्वपूर्ण चरण में पहुंच रहे हैं।
मेट्रो संचालन के लिए ट्रैक, सिग्नलिंग, संचार और अन्य तकनीकी प्रणालियों का आपस में सही तालमेल जरूरी होता है। ऐसे में डिपो में शुरू हुई टेस्टिंग को सिस्टम इंटीग्रेशन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रक्रिया माना जा रहा है।
कॉरिडोर-2 के निर्माण से लगाया गया डायवर्जन खत्म
मेट्रो निर्माण कार्य के चलते शुक्रवार रात 11 बजे से रविवार सुबह पांच बजे तक एक रूट पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया था।
डीसीपी ट्रैफिक रवींद्र कुमार के अनुसार कॉरिडोर-2 के सीएसए से बर्रा-8 सेक्शन में पियर संख्या 43 पर कैंप कास्टिंग का काम प्रस्तावित था। इसके चलते विजयनगर से आने वाले वाहनों को दादानगर सर्विस रोड के बजाय फ्लाईओवर और सीटीआई चौराहा होकर गंतव्य की ओर भेजा गया।
निर्धारित समय पूरा होने के बाद यह डायवर्जन अब समाप्त हो चुका है और सामान्य यातायात व्यवस्था बहाल कर दी गई है।
कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 में अब सिविल निर्माण के साथ तकनीकी सिस्टम का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। सीएसए डिपो में 27 प्वाइंट मशीनों, 31 सिग्नल और 55 एक्सल काउंटर की टेस्टिंग शुरू होना परियोजना के तकनीकी चरण की प्रगति को दर्शाता है। करीब 550 मीटर लंबे टेस्ट ट्रैक पर मेनलाइन जैसा सिग्नलिंग सेटअप तैयार किया जा रहा है, जिससे संचालन से पहले सिस्टम की विश्वसनीयता और समन्वय की जांच की जा सके। वहीं, निर्माण के कारण लगाया गया ट्रैफिक डायवर्जन भी अब समाप्त हो चुका है।
