- वैश्विक दबाव के बीच RBI ने बढ़ाई डॉलर बिक्री, NRI जमा में उछाल से मिली विदेशी मुद्रा की अतिरिक्त ताकत
भारत 19 डेस्क
भारतीय मुद्रा महंगे कच्चे तेल और मजबूत डॉलर के रुपये पर दबाव बढ़ाने के बाद भी फिलहाल उलट दिशा में बढ़ रही है। रुपया 95 रुपये प्रति डॉलर के पार मजबूत होकर करीब दो महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। रायटर की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में RBI ने रुपये को सहारा देने के लिए डॉलर की बिक्री तेज की है।
RBI की डॉलर बिक्री से रुपये को सहारा
विदेशी मुद्रा बाजार में RBI की सक्रियता ऐसे समय बढ़ी है, जब अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियां रुपये के लिए अनुकूल नहीं हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत का आयात बिल बढ़ने और डॉलर की मांग बढ़ने का खतरा है। इसके बावजूद RBI डॉलर बेचकर बाजार में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ा रहा है, जिससे रुपये पर पड़ने वाले दबाव को सीमित किया जा सके। रुपये की मजबूती को केवल वैश्विक बाजार की चाल से जोड़कर नहीं देखा जा रहा। RBI के हस्तक्षेप ने भी हाल के कारोबारी सत्रों में मुद्रा को समर्थन दिया है।
NRI जमा में उछाल ने बढ़ाई ताकत
RBI की मुद्रा प्रबंधन रणनीति को NRI जमा में आई तेज बढ़ोतरी से भी अतिरिक्त मजबूती मिली है। Reuters के मुताबिक, 21 अगस्त को करीब 65.4 अरब डॉलर रहे NRI डिपॉजिट 31 अगस्त तक बढ़कर 100 अरब डॉलर से अधिक हो गए। विदेशी मुद्रा की इस अतिरिक्त उपलब्धता से RBI को रुपये में तेज गिरावट रोकने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की ज्यादा गुंजाइश मिली है। यानी NRI से आया डॉलर सिर्फ बैंकिंग सिस्टम के लिए ही नहीं, बल्कि रुपये की स्थिरता के लिहाज से भी अहम हो गया है।
विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड स्तर पर
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी मजबूत स्थिति में है। 21 अगस्त तक देश का रिजर्व बढ़कर 729.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। मजबूत रिजर्व और NRI जमा से बनी अतिरिक्त विदेशी मुद्रा क्षमता RBI को बाजार में जरूरत के मुताबिक डॉलर बेचने की ताकत देती है।
महंगा तेल और अमेरिकी यील्ड बनी चुनौती
हालांकि रुपये की मजबूती के बावजूद जोखिम कम नहीं हुए हैं। ब्रेंट क्रूड करीब 95.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुका है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी और डॉलर की मजबूती भी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव डाल रही है। ऐसे माहौल में रुपये का 95 के पार मजबूत होना खासा महत्वपूर्ण है। आगे रुपये की दिशा पर कच्चे तेल की कीमत, डॉलर की चाल और RBI के बाजार हस्तक्षेप की भूमिका अहम रहने वाली है।


