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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण और स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद अब जर्मनी के बाजार में जगह बनाने की तैयारी में हैं। इसके साथ ही जर्मनी की कंपनियों के लिए उत्तर प्रदेश में निवेश और उद्योग लगाने के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। बुधवार को उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और जर्मन प्रतिनिधिमंडल की बैठक में उत्पादों के व्यापार और जर्मन निवेश, दोनों मोर्चों पर आगे बढ़ने की सहमति बनी।
यूपी के उत्पादों को जर्मनी में मिलेगा नया बाजार
उपमुख्यमंत्री के आवास पर हुई बैठक में इनोवेशन हब राइनमेन के कार्यकारी अधिकारी स्टीफन विटेनकिंड, गीबा के चेयरमैन सेल्वाकुमार पेरियासामी और सीईओ निर्मल रमन कन्नैया ने हिस्सा लिया। बैठक में इन्वेस्ट यूपी और एक जिला, एक उत्पाद (ओडीओपी) से जुड़े अधिकारी भी मौजूद रहे। दोनों पक्षों के बीच उत्तर प्रदेश में जर्मन कंपनियों के उद्योग और व्यवसाय स्थापित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। निवेश के अलावा भारत और जर्मनी के बीच आयात-निर्यात बढ़ाने के उपायों पर भी विचार किया गया।
खाद्य प्रसंस्करण और SHG उत्पादों पर खास जोर
बैठक में उत्तर प्रदेश के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र तथा स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार गुणवत्तापूर्ण उत्पादों को जर्मनी के बाजार तक पहुंचाने पर विशेष चर्चा हुई। इससे प्रदेश के स्थानीय उत्पादों के लिए विदेशी बाजार में विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलने से महिला उद्यमिता और ग्रामीण स्तर के कारोबार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए भी जर्मनी एक नए निर्यात बाजार के रूप में अवसर दे सकता है।
जर्मन कंपनियों से यूपी आने को कहा
केशव प्रसाद मौर्य ने जर्मनी की कंपनियों को उत्तर प्रदेश में निवेश और उद्योग स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में निवेश के अनुकूल माहौल तैयार किया गया है और सरकार निवेशकों को सुविधा, सुरक्षा, बेहतर कनेक्टिविटी तथा आवश्यक यातायात सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बैठक में जर्मन प्रतिनिधिमंडल ने मौर्य को जर्मनी आने का निमंत्रण भी दिया। दोनों पक्षों ने उत्तर प्रदेश के उत्पादों को वैश्विक बाजार से जोड़ने और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई।
स्थानीय उत्पादों से रोजगार तक बढ़ेगा दायरा
मौर्य ने कहा कि भारत के यूरोपीय देशों के साथ मजबूत होते व्यापारिक संबंधों से भारतीय कंपनियों के लिए विदेशों में नए अवसर पैदा हुए हैं। उत्तर प्रदेश में बने उत्पादों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तैयार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण और स्वयं सहायता समूहों से जुड़े उत्पादों को विदेशी बाजार मिलने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और रोजगार को नई गति मिलेगी।


