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सांसद की पहल पर तंज, भाजपा में फिर बढ़ी तल्खी

  • लोकसभा चुनाव में रमेश अवस्थी के टिकट का विरोध करने वाले प्रकाश शर्मा ने आईआईटी निदेशक को ‘सजग’ रहने की नसीहत दी, सांसद की मुलाकात के अगले दिन सोशल मीडिया पोस्ट से फिर गरमाया मामला, जिलाध्यक्ष ने प्रदेश नेतृत्व को जानकारी देने की बात कही

भारत 19
कानपुर। भाजपा में संस्कार, संगठन और अनुशासन की बातों के बीच कानपुर में नेताओं के बीच पुरानी राजनीतिक तल्खी फिर सार्वजनिक होती दिखी है। लोकसभा चुनाव में रमेश अवस्थी को टिकट दिए जाने का खुलकर विरोध करने वाले बजरंग दल के पूर्व राष्ट्रीय संयोजक एवं भाजपा नेता प्रकाश शर्मा ने अब सांसद की एक पहल पर परोक्ष हमला किया है। मंगलवार को रमेश अवस्थी की आईआईटी कानपुर के निदेशक से मुलाकात के अगले ही दिन प्रकाश शर्मा की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आई। इसमें उन्होंने निदेशक को ‘सजग’ रहने की नसीहत देते हुए ‘जहां-जहां चरण पड़े संतन के, तहां-तहां बंटाधार’ जैसा कटाक्ष किया। पोस्ट में सांसद का नाम नहीं है, लेकिन इसकी टाइमिंग और संदर्भ ने पार्टी के भीतर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने टिप्पणी को अनुचित बताते हुए प्रदेश नेतृत्व को जानकारी देने और कार्रवाई के लिए कहने की बात कही है।

टिकट के फैसले पर प्रकाश शर्मा ने जताई थी आपत्ति

2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने रमेश अवस्थी को कानपुर से प्रत्याशी बनाया था। टिकट की घोषणा के बाद प्रकाश शर्मा ने इसका खुलकर विरोध किया। उनकी आपत्ति मुख्य रूप से इस बात को लेकर थी कि कानपुर जैसी महत्वपूर्ण सीट पर ऐसे व्यक्ति को प्रत्याशी बनाया गया, जिसे वह स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं मानते थे। उन्होंने कार्यकर्ताओं की राय की अनदेखी का सवाल उठाते हुए प्रत्याशी चयन पर पुनर्विचार की मांग की थी। विरोध इतना मुखर हुआ कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र भेजने के साथ निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन की तैयारी भी की थी। बाद में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप से मामला शांत हुआ। रमेश अवस्थी चुनाव जीतकर सांसद बने।

आईआईटी निदेशक से मुलाकात के बाद आया कटाक्ष

मंगलवार को रमेश अवस्थी ने आईआईटी कानपुर के निदेशक से एनटीसी और बीआईसी की बंद पड़ी मिलों की जमीनों और परिसंपत्तियों के उपयोग पर चर्चा की। सांसद ने इन संपत्तियों की तकनीकी और आर्थिक स्थिति का अध्ययन कर ऐसा मॉडल सुझाने का आग्रह किया, जिससे उनका इस्तेमाल हो और कानपुर में रोजगार व निवेश के अवसर पैदा किए जा सकें। चर्चा में टेक्सटाइल और टेक्निकल टेक्सटाइल, मैन्युफैक्चरिंग, एमएसएमई क्लस्टर, स्टार्टअप एवं इनोवेशन हब, स्किल डेवलपमेंट सेंटर, आरएंडडी सेंटर और नई तकनीक आधारित औद्योगिक इकाइयों की संभावनाओं पर विचार करने की बात हुई। इसके 24 घंटे के भीतर प्रकाश शर्मा ने काले बैकग्राउंड के साथ सोशल मीडिया पर पोस्ट की। उन्होंने लिखा, “लगता है कि आईआईटी कानपुर के दिन पूरे होने वाले हैं। डायरेक्टर साहब, सजग रहिए…” इसके साथ ‘जहां-जहां चरण पड़े संतन के, तहां-तहां बंटाधार’ वाला कटाक्ष भी किया।

नाम नहीं लिया, फिर भी राजनीतिक संदेश पर चर्चा

प्रकाश शर्मा की पोस्ट में रमेश अवस्थी का नाम नहीं है। लेकिन पोस्ट की टाइमिंग और आईआईटी से जुड़े संदर्भ के कारण भाजपा के भीतर इसे सांसद की पहल पर टिप्पणी के रूप में देखा जा रहा है। योगेश मिश्रा की ओर से भी सांसद का नाम लिए बिना आईआईटी को विकसित करने की पहल पर कटाक्ष किया गया। पार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक प्रकाश शर्मा पहले भी समय-समय पर सोशल मीडिया पर सांसद को लेकर टिप्पणियां करते रहे हैं। हालांकि उनकी मौजूदा नाराजगी की कोई अलग और स्पष्ट वजह सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ऐसे में ताजा टिप्पणी को केवल 2024 के टिकट विवाद का परिणाम बताना भी जल्दबाजी होगी।

सवाल राजनीतिक असहमति से आगे बढ़ने का

किसी योजना या पहल की आलोचना राजनीतिक असहमति का हिस्सा हो सकती है। लेकिन ‘जहां-जहां चरण पड़े संतन के, तहां-तहां बंटाधार’ जैसी भाषा किसी योजना की तकनीकी कमियों पर सवाल उठाने के बजाय व्यक्ति केंद्रित कटाक्ष की धार लिए हुए है। प्रकाश शर्मा ने सांसद का नाम नहीं लिया है, इसलिए इसे सीधे व्यक्तिगत हमला कहना उचित नहीं होगा। फिर भी पोस्ट की भाषा और समय ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि क्या दोनों नेताओं के बीच पुरानी राजनीतिक असहमति अब व्यक्तिगत तल्खी का रूप ले रही है।

संस्कार और अनुशासन के सामने संगठन की परीक्षा

भाजपा खुद को अनुशासन और राजनीतिक संस्कारों वाली पार्टी के रूप में पेश करती रही है। ऐसे में पार्टी के ही नेताओं के बीच सार्वजनिक मंच पर इस तरह की परोक्ष टिप्पणियां संगठन के लिए असहज स्थिति पैदा करती हैं। मतभेदों के लिए संगठनात्मक मंच और नेतृत्व से संवाद का रास्ता होने के बावजूद सोशल मीडिया पर कटाक्ष की स्थिति कार्यकर्ताओं के बीच गलत संदेश दे सकती है। यही वजह है कि इस बार मामला केवल दो नेताओं की राजनीतिक असहमति तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि संगठन की सार्वजनिक छवि से भी जुड़ गया है।

जिलाध्यक्ष बोले, प्रदेश नेतृत्व को देंगे जानकारी

भाजपा जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने प्रकाश शर्मा की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि रमेश अवस्थी पार्टी के सांसद हैं और उनके खिलाफ इस तरह की पोस्ट ठीक नहीं है। वह प्रदेश नेतृत्व को मामले की जानकारी देंगे और प्रकाश शर्मा के खिलाफ कार्रवाई के लिए भी कहेंगे। दीक्षित के मुताबिक पहले भी प्रकाश शर्मा के इस रवैये की जानकारी प्रदेश नेतृत्व को दी जा चुकी है। उन्होंने कहा कि बड़े नेताओं की ऐसी टिप्पणियों से संगठन की स्थिति खराब होती है और कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरता है।

विधानसभा चुनाव से पहले उठे सवाल

लोकसभा चुनाव के टिकट से शुरू हुआ विवाद वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद भले थम गया था, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने उस अध्याय को फिर चर्चा में ला दिया है। अब प्रदेश नेतृत्व के रुख पर नजर है कि वह इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति मानकर छोड़ता है या संगठनात्मक अनुशासन के स्तर पर कार्रवाई करता है। विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के सामने चुनौती सिर्फ राजनीतिक मतभेदों को संभालने की नहीं, बल्कि असहमति के बीच संगठनात्मक एकजुटता और अपनी संस्कारवान-अनुशासित राजनीति की छवि कायम रखने की भी है।

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