- करीब 73,480 पन्नों की चार्जशीट में आठ आरोपी; चंपत राय, डॉ. अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया, सरकारी गवाह बनाया गया, CCTV में 105 संदिग्ध चोरी की घटनाओं का जिक्र
भारत 19 डेस्क
लखनऊ। अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में जांच पूरी होने के बाद तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। पुलिस ने करीब 73,480 पन्नों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की है। इसमें आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है, जबकि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और व्यवस्था प्रमुख रहे गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया। उन्हें सरकारी गवाह के रूप में शामिल किया गया है। जांच एजेंसी को तीनों के खिलाफ आपराधिक संलिप्तता साबित करने लायक पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले।
चार्जशीट में आठ लोगों को बनाया गया आरोपी
25 जून 2026 को राम जन्मभूमि थाने में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी और हेराफेरी को लेकर एफआईआर दर्ज हुई थी। इसमें अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू को आरोपी बनाया गया था। 23 सितंबर को दाखिल चार्जशीट में भी इन्हीं आठ आरोपियों के खिलाफ अभियोजन आगे बढ़ाया गया। अदालत ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा बने सरकारी गवाह
जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को लेकर सामने आया है। दोनों को आरोपी बनाने के बजाय सरकारी गवाह बनाया गया है। गोपाल राव को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। पुलिस ने CCTV फुटेज, बैंक और वित्तीय लेनदेन, मोबाइल डेटा, बरामदगी और गवाहों के बयानों सहित कई स्तरों पर जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला कि इन पदाधिकारियों के खिलाफ आपराधिक संलिप्तता का पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिला। हालांकि यहां एक कानूनी बारीकी महत्वपूर्ण है—पुलिस की ओर से आरोपी न बनाया जाना या क्लीन चिट मिलना अदालत से अंतिम बरी होना नहीं है। इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया अभी आगे चलनी है।
CCTV में 105 बार नकदी हटाने का खुलासा
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल SIT की 16 सितंबर की स्थिति रिपोर्ट में जांच से जुड़ा एक बड़ा तथ्य सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, गणना कक्ष के CCTV फुटेज की जांच में नकदी को अनधिकृत तरीके से हटाने या छिपाने की 105 घटनाएं सामने आईं। सुप्रीम कोर्ट के 21 सितंबर के आदेश में SIT की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा गया कि इन घटनाओं में गणना प्रक्रिया से जुड़े अन्य लोगों की मदद भी सामने आई। अदालत के रिकॉर्ड के मुताबिक जांच में CCTV के अलावा गवाहों के बयान, तलाशी और बरामदगी, बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल और फोरेंसिक जांच जैसे साक्ष्यों का इस्तेमाल किया गया।
173 गवाहों के बयान भी चार्जशीट का हिस्सा
SIT की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार 14 सितंबर तक 173 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके थे। इनमें ट्रस्ट के कर्मचारी, गणना कर्मी, बैंक अधिकारी, सुरक्षा कर्मी, CCTV ऑपरेटर, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य संबंधित लोग शामिल थे। पुलिस ने इन बयानों को CCTV फुटेज, वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों के साथ मिलाकर जांच आगे बढ़ाई। चार्जशीट में इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका का विवरण दिया गया है।
करीब 3300 संदेशों की भी हुई जांच
जांच सिर्फ CCTV तक सीमित नहीं रही। चार्जशीट में आरोपियों के बीच हुए करीब 3,300 टेक्स्ट मैसेज का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस ने मोबाइल डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन और बरामदगी को भी जांच का हिस्सा बनाया। इन डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कथित चोरी की रकम और आरोपियों के बीच संबंधों की पड़ताल की।
अनुकल्प मिश्रा को बताया गया मुख्य साजिशकर्ता
चार्जशीट में अनुकल्प मिश्रा को कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया है। पुलिस के मुताबिक, वह दूसरे आरोपियों से चोरी करवाता था और रकम के बंटवारे की व्यवस्था से जुड़ा था। पुलिस ने आरोपियों के बीच रकम के बंटवारे और उनके आपसी संपर्क से जुड़े तथ्यों को भी चार्जशीट में शामिल किया है। चार्जशीट में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू के पास बिना आदेश दानपात्रों की चाबियां रहने और श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर पैसे लेने के आरोपों की जांच की गई। चार्जशीट में उसके वाहन किराये से होने वाली आय का भी उल्लेख है।
कीमती चढ़ावे की भी SIT ने की जांच
मामले की जांच केवल नकदी तक सीमित नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश SIT की स्थिति रिपोर्ट में 803 मूल्यवान वस्तुओं के रिकॉर्ड और उनकी भौतिक जांच का उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार इन वस्तुओं से संबंधित रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास मिले और संबंधित बैंक लॉकर की भी जांच की गई। इन 803 वस्तुओं में कोई विसंगति नहीं मिली। SIT ने करीब 944.411 किलोग्राम चांदी से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच की। इसके अलावा 200 किलो और 38.288 किलो चांदी की ईंटों सहित मीडिया और सोशल मीडिया में उठे कुछ अन्य कीमती चढ़ावे से जुड़े आरोपों की भी जांच की है।
सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कर रही थी SIT
सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद SIT की निगरानी में जांच आगे बढ़ी। 21 सितंबर के आदेश में शीर्ष अदालत ने 16 सितंबर को दाखिल SIT की स्थिति रिपोर्ट का संज्ञान लिया था। SIT ने वित्तीय और फोरेंसिक ऑडिट, बैंक खातों, CCTV, मोबाइल डेटा, SOP, दान की प्राप्ति और बैंक में जमा रकम के मिलान सहित कई पहलुओं की जांच की। अगस्त में यूपी सरकार द्वारा गठित SIT की अंतिम रिपोर्ट में भी चंपत राय और अनिल मिश्रा को आरोपी नहीं बनाए जाने की जानकारी सामने आई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जुड़ी दूसरी SIT ने अब जो चार्जशीट अदालत में दाखिल की उसमें भी चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को आरोपी न बनाकर गवाह की भूमिका में रखा है।
अब अदालत में तय होगी आरोपों की अगली दिशा
चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले की अगली महत्वपूर्ण कड़ी न्यायिक प्रक्रिया है। आठ आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने CCTV, डिजिटल संदेश, वित्तीय लेनदेन, बरामदगी और गवाहों के बयानों को आधार बनाया है। अब अदालत इन साक्ष्यों का परीक्षण करेगी और यह तय होगा कि आरोपों पर आगे किस तरह की कार्यवाही होती है। चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की भूमिका फिलहाल आरोपी की नहीं, बल्कि गवाह की है।
चढ़ावा चोरी केस में सबसे बड़ा मोड़ क्या है
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद तीन प्रमुख ट्रस्ट पदाधिकारियों को आरोपी नहीं बनाया गया, जबकि आठ अन्य लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया है। दूसरी ओर, जांच में CCTV से सामने आई 105 घटनाएं, 173 गवाहों के बयान, हजारों डिजिटल संदेश और वित्तीय रिकॉर्ड मामले को गंभीर आपराधिक जांच के रूप में सामने रखते हैं। अब मामले का अंतिम निष्कर्ष अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण और आगे की न्यायिक कार्यवाही से तय होगा।


