- पांच दिवसीय शिविर में तनाव और बिगड़ी दिनचर्या पर चर्चा, संतुलित जीवनशैली के साथ फुट बाथ का कराया गया प्रायोगिक प्रदर्शन
भारत 19
कानपुर। गांधी जयंती के उपलक्ष्य में छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) में पांच दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा एवं योग शिविर का शुभारंभ हुआ। विश्वविद्यालय के योग ओपीडी में आयोजित शिविर का उद्देश्य योग और प्राकृतिक चिकित्सा के जरिए स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना और प्राकृतिक उपचार पद्धतियों के व्यावहारिक पक्ष से प्रतिभागियों को परिचित कराना है।
अनियमित जीवनशैली से बढ़ रहीं स्वास्थ्य समस्याएं
शिविर की मुख्य अतिथि वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक ने कहा कि अनियमित दिनचर्या, तनाव, असंतुलित खान-पान और शारीरिक निष्क्रियता से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर स्वस्थ जीवन जीने की दिशा दिखाती है। यह केवल रोग के उपचार तक सीमित नहीं, बल्कि शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को सक्रिय करने और स्वास्थ्य संरक्षण की समग्र पद्धति है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक चिकित्सा में जल, मिट्टी, सूर्य, वायु और संतुलित आहार जैसे प्राकृतिक तत्वों का विशेष महत्व है। दिनचर्या में प्राकृतिक जीवनशैली, संतुलित आहार, योग, पर्याप्त विश्राम और संयम को शामिल करने से कई स्वास्थ्य समस्याओं की रोकथाम में मदद मिल सकती है।
गांधी के विचारों से योग और प्राकृतिक चिकित्सा तक
सह आचार्य एवं योग ओपीडी प्रभारी डॉ. राम किशोर ने ‘गांधी जी को योग का जनक क्यों कहा जाता है’ विषय पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, संयम, आत्मअनुशासन और नियमित जीवन गांधी के जीवन में योग के मूल सिद्धांतों की तरह दिखाई देते हैं। उन्होंने प्राकृतिक चिकित्सा में गांधी द्वारा बताए गए ‘छठे तत्व—राम नाम’ की अवधारणा को भी समझाया। उनके अनुसार राम नाम आंतरिक शांति, मानसिक संतुलन, आत्मबल और सकारात्मक चिंतन का माध्यम था। सहायक आचार्य डॉ. मनीष कुमार ने गांधी दर्शन की वर्तमान प्रासंगिकता पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि सत्य, अहिंसा, स्वावलंबन, स्वच्छता, सादगी और संयम जैसे सिद्धांत आज भी महत्वपूर्ण हैं। बढ़ते तनाव और असंतुलित जीवनशैली के बीच गांधी दर्शन सरल, अनुशासित और प्रकृति के अनुकूल जीवन की प्रेरणा देता है।
फुट बाथ का प्रायोगिक प्रदर्शन, सक्रिय जीवनशैली पर जोर
शिविर समन्वयक एवं सहायक आचार्य डॉ. सेतवान ने प्राकृतिक चिकित्सा की महत्वपूर्ण प्रक्रिया फुट बाथ का प्रायोगिक प्रदर्शन किया। उन्होंने इसकी विधि, आवश्यक सावधानियों और स्वास्थ्य की दृष्टि से इसके महत्व की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा की प्रक्रियाओं का उचित विधि और विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में प्रयोग स्वास्थ्य संवर्धन और शरीर को विश्राम देने में सहायक हो सकता है। सह आचार्य डॉ. प्रभाकर पांडे ने नियमित शारीरिक गतिविधि, व्यायाम और सक्रिय जीवनशैली को स्वस्थ जीवन के लिए जरूरी बताया। योग शिक्षिका सोनाली धनवानी और शोध छात्र अनिल कुमार यादव ने भी विचार रखे।
कार्यक्रम के अंत में शारीरिक शिक्षा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. श्रवण कुमार यादव ने अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों, छात्र-छात्राओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार जताया। शिविर में विश्वविद्यालय के शोधार्थियों, पंजीकृत छात्र-छात्राओं और रोगियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। पांच दिनों तक चलने वाले शिविर में योग और प्राकृतिक चिकित्सा के विभिन्न व्यावहारिक एवं उपयोगी पहलुओं से प्रतिभागियों को परिचित कराया जा रहा है।

