- 2 नवंबर को 67वें फाउंडेशन डे पर Distinguished Alumni, Satyendra K. Dubey Memorial और Young Alumni Award दिए जाएंगे; 15 पूर्व छात्रों को Distinguished Alumni Award, चार को Young Alumni Award और दो को सत्येंद्र के दुबे मेमोरियल अवार्ड के लिए चुना गया
भारत 19
कानपुर। आईआईटी कानपुर ने वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित Distinguished Alumni Award, Satyendra K. Dubey Memorial Award और Young Alumni Award के लिए 21 सम्मानितों के नाम घोषित किए हैं। इन सभी को 2 नवंबर को आईआईटी कानपुर के 67वें फाउंडेशन डे समारोह में सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा, शोध, विज्ञान, उद्योग, सार्वजनिक सेवा और अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले पूर्व छात्रों को इन पुरस्कारों के लिए चुना गया है।

15 पूर्व छात्रों को Distinguished Alumni Award
इस वर्ष 15 पूर्व छात्रों को Distinguished Alumni Award 2026 के लिए चुना गया है। इनमें प्रो. प्रकाश पनंगाडेन, प्रो. उपमनु लल्ल, प्रो. रवींद्र कुमार आहूजा, प्रो. हरीश चंद्र वर्मा, प्रो. पंगनमाला विजय कुमार, डॉ. दीपेंद्र प्रसाद, डॉ. जोसुला रामचंद्र राव, रवि अग्रवाल, लोकवीर कपूर, डॉ. तुषार दीपक चंद्रा, डॉ. विग्नेश सिंघल, प्रो. संजय ई. शर्मा, डॉ. सतीश चंद्र, रजत वर्मा और अभिषेक विनोद सिंह शामिल हैं। इन पूर्व छात्रों ने शिक्षा, शोध, उद्योग और विभिन्न पेशेवर क्षेत्रों में योगदान के जरिए संस्थान की पहचान को आगे बढ़ाया है।
गुरु दास अग्रवाल और बबलू कुमार को विशेष सम्मान
प्रो. गुरु दास अग्रवाल और आईपीएस बबलू कुमार को Satyendra K. Dubey Memorial Award 2026 के लिए चुना गया है। गंगा की रक्षा के लिए लंबे अनशन के बाद अपने प्राण गंवाने वाले प्रो. गुरु दास अग्रवाल ने शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में भी योगदान दिया था। गंगा की बिगड़ती स्थिति को उन्होंने केवल पर्यावरणीय समस्या नहीं माना और इसके प्राकृतिक प्रवाह तथा स्वच्छता की रक्षा को अपने जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य बनाया। 2018 में गंगा की रक्षा के लिए उनका लंबा अनशन उनके जीवन का अंतिम संघर्ष बना। 11 अक्टूबर 2018 को उनका निधन हो गया। 2008 में आईआईटी से बीटेक करने वाले बबलू कुमार की शुमार तेजतर्रार आईपीएस अधिकारियों में है।
चार युवा प्रतिभाओं को Young Alumni Award
युवा पूर्व छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए दिए जाने वाले Young Alumni Award 2026 के लिए प्रो. अनिंद्य डे, डॉ. नितिश श्रीवास्तव, प्रो. फैज अहमद और निखिल कुरेले का चयन किया गया है। आईआईटी कानपुर के अनुसार, उसके पूर्व छात्रों ने शिक्षा, उद्योग, सार्वजनिक सेवा, उद्यमिता और शोध जैसे क्षेत्रों में संस्थान की पहचान को आगे बढ़ाया है। इस वर्ष के सम्मानित पूर्व छात्र भी इसी विरासत को आगे बढ़ाने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाले उदाहरण हैं।
2 नवंबर को होगा 67वां फाउंडेशन डे समारोह
आईआईटी कानपुर का 67वां फाउंडेशन डे समारोह 2 नवंबर को आयोजित होगा। इसी अवसर पर 21 सम्मानितों को तीनों पुरस्कार श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा। समारोह में आईआईटी कानपुर की उपलब्धियों के साथ उसके वैश्विक एल्युमनी नेटवर्क और पूर्व छात्रों के योगदान को भी रेखांकित किया जाएगा।
1959 में हुई थी IIT कानपुर की स्थापना
आईआईटी कानपुर की स्थापना 1959 में हुई थी। यह देश के शुरुआती आईआईटी संस्थानों में शामिल है। संस्थान की स्थापना अंतरराष्ट्रीय सहयोग के तहत हुई थी। अमेरिका के प्रमुख विश्वविद्यालयों के एक समूह ने इसके शैक्षणिक और तकनीकी विकास में सहयोग किया था। इस सहयोग को Kanpur Indo-American Programme (KIAP) के नाम से जाना गया। कार्यक्रम में MIT, University of California, Berkeley, Caltech और Carnegie Institute of Technology जैसे संस्थान शामिल थे।
HBTI परिसर से शुरू हुआ था IIT का सफर
आईआईटी कानपुर की शुरुआत वर्तमान कल्याणपुर परिसर से नहीं हुई थी। शुरुआती वर्षों में संस्थान ने कानपुर के Harcourt Butler Technological Institute (वर्तमान HBTU) परिसर में काम शुरू किया था। इसके बाद 1960 के दशक में वर्तमान परिसर का विकास शुरू हुआ और धीरे-धीरे आईआईटी कानपुर अपने स्थायी परिसर में स्थानांतरित हुआ।
कंप्यूटर विज्ञान और शोध शिक्षा में अहम योगदान
आईआईटी कानपुर ने भारत में कंप्यूटर विज्ञान और आधुनिक इंजीनियरिंग शिक्षा को शुरुआती दौर में बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1960 और 1970 के दशक में संस्थान में कंप्यूटिंग सुविधाओं का विकास उस समय की अग्रणी पहलों में शामिल था। संस्थान की स्थापना का उद्देश्य केवल इंजीनियर तैयार करना नहीं था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध आधारित तकनीकी शिक्षा का मॉडल विकसित करना भी था। 2 नवंबर का फाउंडेशन डे समारोह इसी शैक्षणिक और शोध विरासत को आगे बढ़ाने वाले पूर्व छात्रों के योगदान को सम्मानित करेगा।

