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टैक्स ऑडिट की डेडलाइन करीब, दो दिन में चूके तो जुर्माना: टैक्स ऑडिट डेडलाइन 2026

  • टैक्स ऑडिट डेडलाइन 2026 | 30 सितंबर तक टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जरूरी, देरी पर टर्नओवर का 0.5% या अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक पेनल्टी; संबंधित ITR के लिए 31 अक्टूबर तक समय

भारत 19

नई दिल्ली। कारोबारियों और पेशेवरों के लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की समय सीमा अब बेहद करीब है। वित्तीय वर्ष 2025-26 यानी असेसमेंट ईयर 2026-27 के जिन करदाताओं पर टैक्स ऑडिट लागू है, उनके लिए रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तारीख 30 सितंबर 2026 है। यानी अब सिर्फ दो दिन बाकी हैं। चार्टर्ड अकाउंटेंट को रिपोर्ट आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर दाखिल करनी होगी और इसके बाद करदाता को उसे स्वीकार करना होगा। 

देरी पर 1.50 लाख रुपये तक पेनाल्टी

समय सीमा चूकने पर आयकर अधिनियम की धारा 271बी के तहत जुर्माना लग सकता है। ऐसे में कारोबारियों और पेशेवरों के लिए ऑडिट से जुड़े जरूरी दस्तावेज और लेखा-बही का काम जल्द पूरा कराना जरूरी है। टैक्स ऑडिट रिपोर्ट तय समय तक दाखिल नहीं होने पर धारा 271बी के तहत कुल बिक्री, टर्नओवर या ग्रॉस रिसीट्स का 0.5 प्रतिशत या 1.50 लाख रुपये, जो भी कम हो, तक पेनल्टी का प्रावधान है। हालांकि, हर देरी पर अधिकतम 1.50 लाख रुपये का जुर्माना तय नहीं है। कानून में उचित कारण होने पर धारा 273बी के तहत राहत का प्रावधान भी है। इसलिए समय सीमा के भीतर रिपोर्ट दाखिल करना सबसे सुरक्षित विकल्प है।

आखिरी समय तक इंतजार करना पड़ सकता है भारी

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया में चार्टर्ड अकाउंटेंट के स्तर पर लेखाबही और दस्तावेजों की जांच के साथ ई-फाइलिंग पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड की जाती है। इसके बाद करदाता को रिपोर्ट स्वीकार करनी होती है। आखिरी दिन तक काम टालने पर दस्तावेजों की कमी, सुधार की जरूरत या पोर्टल से जुड़ी तकनीकी समस्या होने पर समय पर अनुपालन पूरा करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाले करदाताओं के लिए अब प्राथमिकता 30 सितंबर की डेडलाइन पूरी करना है।

टैक्स ऑडिट के बाद 31 अक्टूबर तक ITR

टैक्स ऑडिट रिपोर्ट और आयकर रिटर्न की समय सीमा अलग-अलग है। 30 सितंबर 2026 तक टैक्स ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करनी है, जबकि संबंधित असेसमेंट ईयर 2026-27 का आयकर रिटर्न 31 अक्टूबर 2026 तक दाखिल किया जाना है। यानी फिलहाल सबसे पहले ऑडिट रिपोर्ट की समय सीमा पूरी करनी होगी। इसके बाद संबंधित आयकर रिटर्न दाखिल किया जाएगा। टैक्स ऑडिट के दायरे में आने वाली साझीदारी फर्मों के साझीदारों और संबंधित अन्य करदाताओं के लिए भी लागू प्रावधानों के अनुसार रिटर्न दाखिल करना जरूरी होगा।

FY 2025-26 पर पुराने आयकर कानून की व्यवस्था

टैक्स ऑडिट की मौजूदा समय सीमा को लेकर नए आयकर कानून के कारण भ्रम की स्थिति भी बन सकती है। वित्तीय वर्ष 2025-26 की आय से संबंधित मामलों पर आयकर अधिनियम, 1961 की व्यवस्था लागू है। इसलिए 30 सितंबर 2026 की टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की समय सीमा और देरी पर संभावित पेनल्टी को नए आयकर कानून की आगामी व्यवस्था से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। नए कानून से जुड़ी व्यवस्थाएं संबंधित नए टैक्स ईयर के लिए लागू होंगी।

किन कारोबारियों और पेशेवरों पर लागू है ऑडिट

टैक्स ऑडिट हर कारोबारी या पेशेवर के लिए अनिवार्य नहीं है। आयकर कानून में निर्धारित शर्तों के तहत आने वाले कारोबारियों और पेशेवरों को टैक्स ऑडिट कराना होता है। ऐसे करदाताओं के लिए ऑडिट रिपोर्ट संबंधित चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत दाखिल की जाती है। करदाता को अपने CA से यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि रिपोर्ट तैयार होने और पोर्टल पर दाखिल होने की प्रक्रिया समय पर पूरी हो रही है।

अभी दो दिन में पूरा करना होगा काम

30 सितंबर की अंतिम तारीख को देखते हुए अब टैक्स ऑडिट कराने वाले कारोबारियों और पेशेवरों के पास सिर्फ दो दिन बचे हैं। उन्हें अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ मिलकर लेखाबही, बिक्री-खरीद का रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेजों की स्थिति जांच लेनी चाहिए। समय सीमा के बाद रिपोर्ट दाखिल करने पर धारा 271बी के तहत पेनल्टी का प्रावधान है। हालांकि उचित कारण होने पर कानून में राहत की गुंजाइश मौजूद है। ऐसे में अंतिम समय का जोखिम लेने के बजाय 30 सितंबर से पहले टैक्स ऑडिट रिपोर्ट की प्रक्रिया पूरी करना जरूरी है।

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