- 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को मतदान, सपा दो सीटों की स्थिति में; तीसरे उम्मीदवार के लिए अतिरिक्त वोट जुटाने की चुनौती, PDA समीकरण और उम्मीदवार चयन पर अखिलेश की बैठक में मंथन
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव की तारीख घोषित होने के साथ समाजवादी पार्टी ने तीसरी सीट के लिए भी तैयारी तेज कर दी है। 16 अक्टूबर को होने वाले चुनाव में मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर सपा दो सीटों की स्थिति में है, लेकिन पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर भी मंथन कर रही है। तीसरी सीट के लिए उसे अपने मौजूदा संख्या बल से अतिरिक्त विधायकों का समर्थन जुटाना होगा। अखिलेश यादव की अध्यक्षता में 28 सितंबर को पार्टी की बैठक में राज्यसभा चुनाव की रणनीति और संभावित उम्मीदवारों के नाम पर चर्चा हुई। तीसरा उम्मीदवार उतारने की स्थिति में उसके सामाजिक प्रतिनिधित्व को लेकर भी पार्टी के भीतर विचार चल रहा है।
दो सीटों का गणित, तीसरी के लिए अतिरिक्त वोट
उत्तर प्रदेश विधानसभा में फिलहाल 397 विधायक हैं। इस संख्या के आधार पर राज्यसभा की एक सीट के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोट का कोटा बनता है। मौजूदा विधानसभा गणित में सपा दो सीटें जीतने की स्थिति में है। तीसरा उम्मीदवार उतारने पर सपा को अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी। अलग-अलग राजनीतिक आकलनों में इस अतिरिक्त जरूरत की संख्या अलग बताई गई है, क्योंकि सपा और उसके सहयोगी दलों के प्रभावी संख्याबल तथा संभावित समर्थन को लेकर गणना अलग-अलग है। इसलिए तीसरी सीट के लिए बाहर से समर्थन जुटाना पार्टी की प्रमुख चुनौती रहेगी।
तीसरे उम्मीदवार से PDA समीकरण साधने की तैयारी
सपा की तीसरी सीट की रणनीति में PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समीकरण भी चर्चा में है। रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी तीसरे उम्मीदवार के तौर पर अति पिछड़े या दलित वर्ग से किसी चेहरे पर विचार कर सकती है। हालांकि अंतिम उम्मीदवार का नाम अभी घोषित नहीं हुआ है। यह पहल 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सपा की सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति से भी जुड़ती है। इसलिए उम्मीदवार का चयन केवल राज्यसभा के मौजूदा चुनाव तक सीमित न रहकर पार्टी के व्यापक राजनीतिक संदेश का हिस्सा हो सकता है।
रामगोपाल यादव की दावेदारी भी चर्चा में
सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल यादव का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त हो रहा है। पार्टी के संभावित उम्मीदवारों की चर्चा में उनका नाम प्रमुखता से सामने आया है। इसके अलावा पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन के नाम की भी चर्चा रिपोर्टों में है। हालांकि इन नामों को अभी अंतिम उम्मीदवार के रूप में घोषित नहीं किया गया है। तीसरे उम्मीदवार को लेकर भी पार्टी की ओर से औपचारिक घोषणा बाकी है।
2024 की क्रॉस वोटिंग का अनुभव सामने
सपा के लिए तीसरी सीट का प्रयास नया नहीं है। 2024 के राज्यसभा चुनाव में पार्टी ने तीन उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन क्रॉस वोटिंग के बाद उसका तीसरा उम्मीदवार आलोक रंजन चुनाव हार गया था और भाजपा के संजय सेठ निर्वाचित हुए थे। इस बार तीसरा उम्मीदवार उतारने की स्थिति में सपा के सामने अतिरिक्त वोट जुटाने के साथ अपने विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती भी रहेगी। यही कारण है कि पार्टी चुनावी रणनीति पर उम्मीदवारों की घोषणा से पहले मंथन कर रही है।
16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनाव
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा। नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, जबकि नामांकन पत्रों की जांच 7 अक्टूबर को होगी और नाम वापसी की अंतिम तारीख 9 अक्टूबर है। मतदान के बाद उसी दिन मतगणना होगी। ऐसे में सपा के पास अब उम्मीदवारों के नाम तय करने और तीसरी सीट के लिए समर्थन जुटाने की रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए सीमित समय है।
तीसरी सीट पर सपा की रणनीति अहम
सपा के सामने फिलहाल दो सीटों का अपेक्षाकृत स्पष्ट गणित और तीसरी सीट की अतिरिक्त चुनौती है। पार्टी तीसरा उम्मीदवार उतारती है तो उसके लिए उम्मीदवार का सामाजिक समीकरण, विधायकों का समर्थन और मतदान के दौरान पार्टी की एकजुटता तीनों महत्वपूर्ण होंगे। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों के नाम और संभावित समर्थन को लेकर तस्वीर साफ होने के साथ यह भी स्पष्ट होगा कि सपा तीसरी सीट के लिए कितनी मजबूती से मैदान में उतरती है।
