- सरकार ने राहत कार्य तेज करने के साथ स्थायी जलनिकासी व्यवस्था बनाने के दिए निर्देश
भारत 19
प्रयागराज। बाढ़ और जलभराव से बिगड़े हालात के बीच अब सरकार की नजर केवल राहत और बचाव कार्यों पर नहीं, बल्कि उन कारणों पर भी है जिनकी वजह से शहर के कई इलाकों में लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। जहां समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, वहां प्रशासनिक जिम्मेदारी तय की जाएगी। जलभराव के कारणों की जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी। समीक्षा बैठक में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसका साफ संकेत दिया।
रविवार को प्रयागराज में बाढ़ और आपदा की स्थिति की समीक्षा के दौरान उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हर बार बारिश या बाढ़ के बाद केवल पानी निकालना पर्याप्त नहीं होगा। जिन इलाकों में जलभराव की समस्या बार-बार सामने आ रही है, वहां इसके मूल कारणों की पहचान कर स्थायी समाधान की कार्ययोजना तैयार करनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए होते तो लोगों को इतनी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने लापरवाही के मामलों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए।

बार-बार जलभराव वाले इलाकों की होगी पहचान
सरकार ने प्रशासन को ऐसे स्थानों को चिह्नित करने को कहा है, जहां हर बारिश में पानी भरने की समस्या पैदा होती है। इन क्षेत्रों में नालों, सीवर लाइनों और जलनिकासी मार्गों की स्थिति की जांच की जाएगी। तकनीकी परीक्षण के जरिए यह पता लगाने की तैयारी है कि पानी निकासी में बाधा कहां और क्यों पैदा हो रही है। निर्देशों के मुताबिक, जलभराव की समस्या का अस्थायी समाधान करने के बजाय स्थायी जलनिकासी व्यवस्था विकसित की जाएगी। साथ ही मानसून से पहले नालों और जलनिकासी तंत्र की सफाई व निगरानी की व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।
राहत के साथ सफाई और स्वास्थ्य पर फोकस
मौजूदा स्थिति में प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बनाई गई है। बाढ़ और जलभराव वाले क्षेत्रों में भोजन, राशन, पेयजल, कपड़े, दवाइयां और अन्य आवश्यक वस्तुएं समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पानी उतरने के बाद गंदगी और संक्रमण की आशंका को देखते हुए सफाई, सैनिटाइजेशन और कीटनाशक छिड़काव की व्यवस्था करने को भी कहा गया है। राहत शिविरों में मेडिकल कैंप, डॉक्टरों की उपलब्धता, दवाइयां, स्वच्छ पेयजल और भोजन जैसी सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने के निर्देश हैं।
राहत और बचाव एजेंसियों को चौबीसों घंटे सतर्कता
एसडीआरएफ, जल पुलिस, पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व और नगर निकाय विभागों को समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है। संवेदनशील और निचले इलाकों में लगातार निगरानी रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और नावों समेत जरूरी संसाधनों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रयागराज में जलभराव को लेकर सरकार के इस रुख से अब दो स्तरों पर कार्रवाई की तैयारी है। एक तरफ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य जारी रहेंगे, दूसरी तरफ यह जांच होगी कि जलनिकासी व्यवस्था में कमी, समय पर तैयारी न होना या अधिकारियों की लापरवाही—आखिर किन वजहों से हालात बिगड़े।


