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कानपुर के दवा कारोबारी की हत्या में बहू ही शामिल!

  • खर्चों और गतिविधियों पर पाबंदी से नाराज थी शालू, पुराने नौकर को छह लाख की सुपारी; डुप्लीकेट चाबी से फ्लैट में घुसे हत्यारे, CCTV और कॉल डिटेल से खुली साजिश

भारत 19

कानपुर। दवा कारोबारी विनीत मिनोचा की घर के भीतर हुई हत्या का राज खुला तो पुलिस के सामने साजिश की ऐसी कड़ी आई, जिसने पूरे मामले की दिशा बदल दी। पुलिस के मुताबिक, ससुर की ओर से खर्चों और गतिविधियों पर लगाई जा रही पाबंदियों से नाराज बहू शालू ने पुराने नौकर विशाल को कथित तौर पर छह लाख रुपये की सुपारी दी। विशाल ने अपने साथी राजकिशोर के साथ डुप्लीकेट चाबी से फ्लैट में प्रवेश किया और विनीत की हत्या कर दी। दोनों हत्यारे कारोबारी के घर लौटने से पहले अंदर छिपकर बैठे रहे। हत्या के बाद परिवार के साथ घर लौटी शालू ने कथित तौर पर घटना से अनजान होने का व्यवहार किया। CCTV फुटेज, कॉल डिटेल और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने साजिश की कड़ियां जोड़ीं और शालू को भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि सुपारी और शालू की भूमिका से जुड़े ये दावे फिलहाल पुलिस की जांच और आरोपियों के बयानों पर आधारित हैं।

पार्टी के लिए निकला परिवार, घर में अकेले थे कारोबारी

विनीत मिनोचा कल्याणपुर के इंदिरानगर स्थित रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट के फ्लैट सी-104 में परिवार के साथ रहते थे। बिरहाना रोड पर उनकी दवा की फर्म थी और वह लंबे समय से दवा कारोबार से जुड़े थे। पुलिस के अनुसार, शनिवार रात परिवार के सदस्य एक पार्टी में जाने के लिए घर से निकले। बेटा सुब्रत, बहू शालू और उनका बच्चा घर से बाहर थे, जबकि विनीत बाद में अपनी फर्म से लौटने वाले थे। परिवार के बाहर निकलने के कुछ ही देर बाद दो युवक अपार्टमेंट में पहुंचे। CCTV ने बाद में इन्हीं दोनों की पहचान और गतिविधियों को हत्या की जांच की सबसे अहम कड़ी बना दिया।

घर से निकलते ही पहुंचे दोनों संदिग्ध

CCTV फुटेज की जांच में पुलिस को पता चला कि परिवार के फ्लैट से निकलने के करीब दस मिनट बाद दो संदिग्ध वहां पहुंचे। दोनों फ्लैट में दाखिल हुए और काफी देर तक अंदर ही रहे। पुलिस के मुताबिक, दोनों का मकसद विनीत के लौटने का इंतजार करना था। बाहरी व्यक्ति के लिए बंद फ्लैट में इस तरह प्रवेश और फिर लंबे समय तक अंदर छिपे रहने ने जांचकर्ताओं को शुरुआत में ही किसी परिचित व्यक्ति की मदद की आशंका दी।

करीब सवा घंटे तक फ्लैट में छिपे रहे हत्यारे

पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी करीब सवा घंटे तक फ्लैट के अंदर छिपे रहे। इस दौरान विनीत अपनी फर्म में थे और आरोपियों को उनके लौटने का इंतजार था। रात करीब 10:58 बजे विनीत घर पहुंचे। इसके कुछ देर बाद दोनों आरोपियों ने उन पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। CCTV फुटेज में दोनों के फ्लैट से बाहर निकलने का समय भी सामने आया। जांच में यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण साबित हुआ, क्योंकि इससे स्पष्ट हुआ कि हत्या अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि हमलावर पहले से घर के भीतर पहुंचकर कारोबारी की वापसी का इंतजार कर रहे थे।

डुप्लीकेट चाबी ने खोल दी साजिश की पहली परत

फ्लैट में जबरन प्रवेश के निशान नहीं मिलने के बाद पुलिस ने चाबी के इस्तेमाल की दिशा में जांच आगे बढ़ाई। पूछताछ में डुप्लीकेट चाबी की बात सामने आई। पुलिस के मुताबिक, पूर्व नौकर विशाल को फ्लैट की अंदरूनी व्यवस्था और परिवार की दिनचर्या की जानकारी थी। इसी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए उसने राजकिशोर के साथ फ्लैट में प्रवेश किया। डुप्लीकेट चाबी का इस्तेमाल इस हत्याकांड की अहम कड़ी बन गया। इससे पुलिस को यह पता लगाने में मदद मिली कि हमलावरों को घर के अंदर पहुंचने के लिए किसी तरह की तोड़फोड़ क्यों नहीं करनी पड़ी।

CCTV ने पुराने नौकर तक पुलिस को पहुंचाया

फुटेज में दिखाई दिए संदिग्धों में एक की पहचान विशाल गौतम के रूप में हुई। वह पहले विनीत के यहां नौकर रह चुका था। पुलिस के मुताबिक, वर्ष 2021 में रुपये चोरी के आरोप के बाद विशाल को काम से निकाल दिया गया था। इसके बावजूद उसका परिवार से संपर्क बना रहा। पुलिस ने इसी पुराने संबंध और घर की जानकारी को जांच की अगली कड़ी बनाया। विशाल की पहचान सामने आने के बाद उसके संपर्कों और गतिविधियों की पड़ताल शुरू हुई। इसी दौरान उसके साथी राजकिशोर तक पुलिस पहुंची।

मुठभेड़ के बाद विशाल और राजकिशोर गिरफ्तार

पुलिस ने दोनों संदिग्धों की तलाश शुरू की। रविवार देर रात पुलिस की दोनों से मुठभेड़ हुई, जिसमें दोनों के पैरों में गोली लगी। इसके बाद पुलिस ने विशाल और राजकिशोर को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पुलिस के मुताबिक दोनों ने हत्या में अपनी भूमिका बताई। इसी पूछताछ के दौरान जांच का रुख शालू की ओर गया। पुलिस ने आरोपियों के बयानों को CCTV फुटेज, कॉल डिटेल और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों से मिलाना शुरू किया। इसके बाद शालू से भी पूछताछ की गई।

छह लाख की सुपारी का पुलिस ने किया दावा

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में यह बात सामने आई कि विनीत की हत्या के लिए छह लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी। जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि रकम का भुगतान किस तरह और किस समय किया जाना था। पुलिस अब इस कथित लेन-देन की स्वतंत्र पुष्टि के लिए वित्तीय और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है। इसलिए छह लाख रुपये की सुपारी और भुगतान की पूरी कहानी को फिलहाल पुलिस जांच में सामने आया दावा ही माना जाना चाहिए।

खर्च और गतिविधियों पर पाबंदी बना कथित मोटिव

पुलिस जांच में हत्या की कथित वजह परिवार के भीतर के तनाव से जुड़ी बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, शालू अपने और पति के खर्च तथा घूमने-फिरने जैसी गतिविधियों को लेकर ससुर की कथित रोक-टोक से नाराज थी। जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई कि विनीत परिवार के खर्च पर नियंत्रण रखते थे और बेटे को निर्धारित रकम देते थे। पुलिस इसी आर्थिक और पारिवारिक तनाव को हत्या की कथित साजिश का मोटिव मानकर जांच कर रही है। हालांकि किसी व्यक्ति की नाराजगी को हत्या का अंतिम कारण तभी माना जा सकता है, जब उसे अदालत में साक्ष्यों के आधार पर साबित किया जाए।

बेटे के कमरे में छिपकर बैठे थे हत्यारे

पुलिस पूछताछ के आधार पर सामने आई कहानी में एक और चौंकाने वाली कड़ी है। दोनों आरोपी कथित तौर पर परिवार के सदस्य के कमरे में छिपकर विनीत के लौटने का इंतजार कर रहे थे। विनीत के घर पहुंचने के बाद मौका मिलते ही उन पर हमला किया गया। धारदार हथियार से कई वार किए गए, जिससे उनकी मौत हो गई। हत्या के बाद दोनों आरोपी उसी रास्ते से फ्लैट से बाहर निकल गए, जिससे वे अंदर आए थे।

तड़के लौटा परिवार, कमरे में मिला शव

रविवार तड़के करीब 4:13 बजे सुब्रत, शालू और उनका बच्चा पार्टी से लौटकर फ्लैट पहुंचे। पुलिस के मुताबिक, घर में प्रवेश करने के बाद शालू की नजर खून पर पड़ी और कमरे में विनीत का शव मिला। परिवार में चीख-पुकार मच गई। पुलिस को घटना की सूचना दी गई और कुछ ही देर में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। शुरुआती तौर पर मामला घर में घुसकर की गई हत्या का नजर आया। पुलिस ने अपार्टमेंट के CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की।

रोती बहू से पूछताछ तक पहुंची जांच

हत्या के बाद शालू परिवार के साथ मौजूद थीं। शुरुआती जांच में पुलिस का ध्यान फ्लैट में दाखिल हुए दो अज्ञात हमलावरों पर था। लेकिन CCTV से विशाल की पहचान और फिर दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने हत्या की पूरी पृष्ठभूमि की पड़ताल शुरू की। परिवार के सदस्यों की गतिविधियों, फोन संपर्क और घटना से पहले की परिस्थितियों को भी जांच में शामिल किया गया। इसी दौरान पुलिस के अनुसार आरोपियों से मिली जानकारी ने शालू की भूमिका की ओर इशारा किया।

कॉल डिटेल से जुड़ीं साजिश की कड़ियां

हत्या की जांच में CCTV के साथ कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण रहे। पुलिस ने आरोपियों और परिवार के सदस्यों के बीच संपर्क की पड़ताल की। जांचकर्ताओं ने घटना से पहले और बाद के फोन संपर्क, आरोपियों की लोकेशन तथा CCTV में दर्ज गतिविधियों का मिलान किया। पुलिस का दावा है कि इसी तकनीकी जांच से हत्या की कथित साजिश की कड़ियां मजबूत हुईं। अब इन इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की कानूनी मजबूती इस मामले में अहम होगी।

शालू गिरफ्तार, जेल भेजने की कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक, विशाल और राजकिशोर से पूछताछ के बाद शालू की भूमिका सामने आई। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने शालू को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया है। अब जांच एजेंसी कथित सुपारी, डुप्लीकेट चाबी, आरोपियों से संपर्क और हत्या के पीछे बताए जा रहे पारिवारिक विवाद से जुड़े साक्ष्य जुटा रही है।

48 घंटे में बदल गई पूरे मामले की दिशा

विनीत मिनोचा हत्याकांड में जांच की दिशा बेहद तेजी से बदली। शुरुआत में यह मामला बाहरी हमलावरों द्वारा की गई हत्या नजर आया। CCTV ने पुराने नौकर तक पहुंचाया। मुठभेड़ में दो आरोपी गिरफ्तार हुए और पूछताछ के बाद पुलिस जांच परिवार के भीतर कथित साजिश तक पहुंच गई। पुलिस की मौजूदा कहानी में डुप्लीकेट चाबी, छह लाख की कथित सुपारी, पुराने नौकर की भूमिका, CCTV, कॉल डिटेल और पारिवारिक तनाव एक-दूसरे से जुड़ी कड़ियां हैं। अब इस पूरी कहानी को अदालत में ठोस साक्ष्यों के साथ साबित करना पुलिस के सामने अगली बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल शालू समेत गिरफ्तार तीनों आरोपियों पर लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।

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