– 2027 चुनाव से पहले चार-स्तरीय मूल्यांकन में कमजोर प्रदर्शन वाले विधायक निशाने पर; 2024 लोकसभा में भाजपा के 106 विधायक क्षेत्रों में पार्टी रही थी पीछे
भारत 19
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के आंतरिक सर्वे ने 125 से ज्यादा विधायकों की चिंता बढ़ा दी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक चार-स्तरीय मूल्यांकन में इन विधायकों को कमजोर प्रदर्शन वाली श्रेणी में रखा गया है और आने वाले महीनों में स्थिति नहीं सुधरी तो उनके टिकट बदले जा सकते हैं। सर्वे में विधायक की क्षेत्र में सक्रियता, जनता से संपर्क, स्थानीय छवि, संगठन के साथ तालमेल और विकास कार्यों के साथ 2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार प्रदर्शन को भी अहम आधार बनाया गया है। कमजोर माने जा रहे विधायकों में बड़ी संख्या ऐसे क्षेत्रों की है, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा अपने प्रतिद्वंद्वी से पीछे रही थी। हालांकि पार्टी ने अभी किसी विधायक का टिकट काटने का अंतिम फैसला नहीं किया है, लेकिन 2027 के टिकट वितरण से पहले मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन की कसौटी सख्त होने के संकेत मिल रहे हैं।
2024 लोकसभा के नतीजे बने बड़ा संकेत
भाजपा के लिए 2024 लोकसभा चुनाव के विधानसभा-वार नतीजे खासे महत्वपूर्ण हैं। 2022 में भाजपा ने 255 विधानसभा सीटें जीती थीं। इनमें से 149 विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी लोकसभा चुनाव के दौरान भी पहले स्थान पर रही, जबकि 106 क्षेत्रों में भाजपा पिछड़ गई। इस तरह 2022 में भाजपा के विधायक वाले करीब 42 प्रतिशत विधानसभा क्षेत्रों में 2024 लोकसभा चुनाव में पार्टी पहले स्थान पर नहीं रही। इन सीटों को अब 2027 से पहले विशेष निगरानी वाले क्षेत्रों के तौर पर देखा जा रहा है। इन 106 क्षेत्रों में भाजपा को सबसे ज्यादा चुनौती समाजवादी पार्टी से मिली। सपा 78 ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में आगे रही, जहां भाजपा के विधायक थे। कांग्रेस 20 क्षेत्रों में पहले स्थान पर रही, जबकि अन्य दलों ने आठ सीटों पर भाजपा को पीछे छोड़ा।
विधायक की सक्रियता से छवि तक होगी पड़ताल
चार-स्तरीय आंतरिक सर्वे में विधायकों की क्षेत्र में सक्रियता, जनता से संपर्क, स्थानीय छवि, संगठन के साथ समन्वय, विकास कार्यों की स्थिति और सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंचाने में भूमिका को परखा जा रहा है। पार्टी केवल संगठन की रिपोर्ट पर निर्भर रहने के बजाय जमीनी कार्यकर्ताओं और जनता की प्रतिक्रिया को भी मूल्यांकन में शामिल कर रही है। कई क्षेत्रों में विधायकों की चुनाव जीतने के बाद कम मौजूदगी और स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर शिकायतों की चर्चा है। प्रशासन और पुलिस की कार्यशैली को लेकर जनता की नाराजगी का असर भी कुछ विधायकों की छवि पर पड़ने की बात कही जा रही है।
रोजगार और सामाजिक समीकरण भी बने चुनौती
सर्वे में युवाओं के बीच रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर असंतोष का असर भी सामने आने की चर्चा है। 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष ने रोजगार के साथ संविधान और सामाजिक समीकरण से जुड़े मुद्दों को भी जोर-शोर से उठाया था। भाजपा अब ऐसे क्षेत्रों में संगठनात्मक स्थिति और सामाजिक समीकरण की अलग-अलग समीक्षा कर रही है। सपा का पीडीए समीकरण और सपा-कांग्रेस गठबंधन 2024 में भाजपा के कई मजबूत विधानसभा क्षेत्रों में प्रभावी रहा था। पार्टी अब इन क्षेत्रों में अपनी कमजोर कड़ियों को तलाश रही है।
125 से ज्यादा विधायक कमजोर श्रेणी में
पार्टी सूत्रों के मुताबिक आंतरिक मूल्यांकन में सवा सौ से ज्यादा विधायक कमजोर प्रदर्शन वाली श्रेणी में हैं। इनमें कुछ वरिष्ठ नेताओं और सरकार में शामिल मंत्रियों के नाम भी होने की चर्चा है। हालांकि इसे अभी टिकट कटने की अंतिम सूची नहीं माना जा रहा है। पार्टी की रणनीति के मुताबिक विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्रों में सक्रियता बढ़ाने, जनता से संपर्क मजबूत करने और संगठन के साथ बेहतर तालमेल पर जोर देने का संदेश दिया जा रहा है। यदि आने वाले महीनों में प्रदर्शन और जनधारणा में सुधार नहीं हुआ तो 2027 में टिकट बदलने का विकल्प पार्टी के सामने खुला रहेगा।
बीएल संतोष और विनोद तावडे के दौरे अहम
राष्ट्रीय महामंत्री संगठन बीएल संतोष और प्रदेश प्रभारी विनोद तावडे के उत्तर प्रदेश दौरों को भी इस समीक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है। इन दौरों में संगठन की स्थिति, विधायकों की सक्रियता और विधानसभा क्षेत्रों के प्रदर्शन पर फीडबैक लिया जा सकता है। खास तौर पर कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र पर पार्टी की नजर है। 2024 लोकसभा चुनाव में इस क्षेत्र की 10 में से छह सीटें हारने के बाद संगठन स्तर पर समीक्षा जारी है। बीएल संतोष शनिवार से दो दिन क्षेत्र में रहेंगे और बैठकें करेंगे। वहीं विनोद तावडे 16 सितंबर को लखनऊ पहुंचेंगे और 22 सितंबर तक प्रदेश में रहेंगे।
2027 से पहले मौजूदा विधायकों की परीक्षा
2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा की सीटें 62 से घटकर 33 रह गई थीं। इसके बाद पार्टी ने उन विधानसभा क्षेत्रों को चिह्नित करना शुरू किया जहां संगठन और विधायक दोनों स्तर पर सुधार की जरूरत है। 2022 में भाजपा के 255 विधायक जीतने वाले क्षेत्रों में से 106 का 2024 में लोकसभा स्तर पर पिछड़ना अब टिकट वितरण की समीक्षा का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। यदि इन क्षेत्रों के विधायकों की बड़ी संख्या 125 से ज्यादा कमजोर माने गए विधायकों में शामिल है, तो 2027 में टिकटों में बड़े बदलाव की संभावना बढ़ सकती है। फिलहाल अंतिम फैसला बाकी है, लेकिन आंतरिक सर्वे, 2024 का प्रदर्शन और जमीनी फीडबैक ने भाजपा के मौजूदा विधायकों के सामने टिकट बचाने की चुनौती जरूर बढ़ा दी है।


