- DPIIT की लाइसेंसिंग आसान करने से लेकर सेना को TReDS से जोड़ने तक का रोडमैप; रक्षा उत्पादों पर GST पांच प्रतिशत, कानपुर में Defence Facilitation Centre और GeM पर MSME को अग्रिम भुगतान का प्रस्ताव
भारत 19
कानपुर। कानपुर-झांसी रक्षा गलियारे के बीच शहर के उद्योग जगत ने रक्षा उत्पादन में स्थानीय MSME की भागीदारी बढ़ाने के लिए पांच बड़े बदलावों का रोडमैप रखा है। संसदीय वाणिज्य समिति के कानपुर दौरे के दौरान उद्योग प्रतिनिधियों ने लाइसेंसिंग प्रक्रिया आसान करने से लेकर सेना और रक्षा प्रतिष्ठानों को TReDS से जोड़ने, रक्षा उत्पादों पर GST घटाकर पांच प्रतिशत करने और GeM ऑर्डर पर अग्रिम भुगतान तक के प्रस्ताव समिति के सामने रखे।
सांसद रमेश अवस्थी की पहल पर कानपुर पहुंची संसदीय वाणिज्य समिति ने होटल लैंडमार्क में आयोजित बैठक में विभिन्न औद्योगिक एवं वाणिज्यिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने उद्योग जगत, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से जुड़ी समस्याओं और उनके समाधान के लिए अपने सुझाव रखे। मर्चेंट्स चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की ओर से इंडस्ट्री समिति के चेयरमैन सुशील शर्मा और समिति के सदस्य वैभव सारस्वत ने प्रतिनिधित्व किया।
DPIIT की लाइसेंसिंग प्रक्रिया में बदलाव पर जोर
सुशील शर्मा ने उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) की लाइसेंसिंग प्रक्रिया को सरल और समयबद्ध बनाने का सुझाव रखा। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया जटिल, खर्चीली और समय लेने वाली है तथा मुख्य रूप से 1951 के अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप संचालित होती है। वर्तमान औद्योगिक और तकनीकी जरूरतों को देखते हुए इसमें जरूरी सुधार और सरलीकरण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भारतीय कंपनी का विदेशी कंपनी के साथ Transfer of Technology (ToT) समझौता होने के बाद भी लाइसेंस हासिल करने के लिए जटिल प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इसमें रिवर्स इंजीनियरिंग जैसी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं। इस व्यवस्था को आसान बनाने से देश में रक्षा उत्पादन और स्वदेशी रक्षा उद्योग को गति मिल सकती है।
कानपुर में बने Defence Facilitation Centre
कानपुर-झांसी क्षेत्र में रक्षा गलियारे के विकास को देखते हुए उद्योग जगत ने कानपुर में तत्काल Defence Facilitation Centre स्थापित करने का सुझाव दिया। सुशील शर्मा के मुताबिक, रक्षा क्षेत्र से जुड़े लाइसेंस और अनुमतियों के लिए उद्योगों को अभी मुख्य रूप से DPIIT, नई दिल्ली की प्रक्रिया पर निर्भर रहना पड़ता है। इससे खासकर छोटे उद्यमों का समय और वित्तीय संसाधन दोनों खर्च होते हैं। कानपुर में सुविधा केंद्र बनने से रक्षा उद्योग से जुड़े लाइसेंस और अनुमति संबंधी प्रक्रियाओं को स्थानीय स्तर पर आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे रक्षा गलियारे में स्थानीय उद्योगों की भागीदारी बढ़ने की भी उम्मीद है।
सेना और रक्षा प्रतिष्ठान TReDS से जुड़ें
MSME के समय पर भुगतान की समस्या को लेकर भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना और अन्य रक्षा प्रतिष्ठानों को TReDS प्लेटफॉर्म से जोड़ने का सुझाव दिया गया। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि रक्षा प्रतिष्ठानों को TReDS व्यवस्था में शामिल करने से MSME इकाइयों को उनके बकाये का भुगतान जल्द मिल सकेगा। इससे छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी अटकने की समस्या कम होगी और वे रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेंगे।
रक्षा उत्पादों पर GST पांच प्रतिशत हो
भारतीय सेनाओं को आपूर्ति किए जाने वाले उत्पादों पर GST की दर पांच प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी समिति के सामने रखा गया। उद्योग जगत का कहना है कि इससे रक्षा क्षेत्र में काम कर रहे MSME को वित्तीय राहत मिलेगी और घरेलू रक्षा उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा। साथ ही स्थानीय उद्योगों की लागत कम होने से उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है।
बैंक गारंटी की जगह बीमा आधारित व्यवस्था
सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में MSME की पूंजी लंबे समय तक फंसे रहने की समस्या के समाधान के लिए बैंक गारंटी के स्थान पर Insurance Premium आधारित व्यवस्था लागू करने का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही गारंटी या बीमा कवर की अवधि अधिकतम एक वर्ष तक सीमित रखने की पैरवी की गई। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि इससे छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी अनावश्यक रूप से लंबे समय तक अवरुद्ध नहीं रहेगी।
GeM ऑर्डर पर MSME को मिले अग्रिम भुगतान
Government e-Marketplace (GeM) से जारी होने वाले सप्लाई ऑर्डर के साथ MSME इकाइयों को अग्रिम भुगतान की सुविधा देने का सुझाव भी रखा गया। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि छोटे उद्योगों के पास सीमित कार्यशील पूंजी होती है। सप्लाई ऑर्डर के आधार पर उचित अग्रिम भुगतान मिलने से वे कच्चा माल और दूसरे जरूरी संसाधन समय से जुटा सकेंगे। इससे सरकारी आपूर्ति को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी।
स्थानीय MSME को रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने पर जोर
उद्योग जगत का मानना है कि कानपुर-झांसी रक्षा गलियारे की सफलता में स्थानीय MSME की भूमिका अहम हो सकती है। इसके लिए केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लाइसेंसिंग, भुगतान, कर और सरकारी खरीद की प्रक्रियाओं को भी उद्योगों के अनुकूल बनाना होगा। उद्योग प्रतिनिधियों के अनुसार, इन सुझावों पर अमल होने से कानपुर के छोटे और मध्यम उद्योगों के लिए रक्षा क्षेत्र में कारोबार के नए अवसर खुल सकते हैं। इससे स्थानीय उद्योगों की रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी बढ़ेगी और कानपुर को रक्षा उत्पादन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मजबूती मिलेगी।.


