- समझौते के एक साल पूरे होने पर फार्मा, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, रसायन और खाद्य क्षेत्र में निर्यात बढ़ाने पर जोर; स्विस राष्ट्रपति की भारत यात्रा और 7 अक्टूबर के इंडिया-EFTA समिट से व्यापारिक रिश्तों को नई गति की उम्मीद
भारत 19/ नई दिल्ली। भारत और यूरोपियन फ्री ट्रेड एसोसिएशन (EFTA) के बीच ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) को एक साल पूरा होने के साथ भारतीय उद्योग अब समझौते से मिले बाजार अवसरों को वास्तविक निर्यात में बदलने पर जोर दे रहा है। फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, रसायन, मशीनरी, इंजीनियरिंग सामान, प्रसंस्कृत खाद्य और रत्न-आभूषण जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों के लिए EFTA बाजार में विस्तार की संभावनाएं बढ़ी हैं। EFTA के चार सदस्य देशों स्विट्जरलैंड, नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन ने भारतीय निर्यात के बड़े हिस्से को टैरिफ रियायतों के दायरे में रखा है। ऐसे में उद्योग का मानना है कि अब भारत को इन रियायतों का इस्तेमाल बढ़ाकर निर्यात में ठोस वृद्धि की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
स्विस राष्ट्रपति की यात्रा से व्यापारिक रिश्तों को गति
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पारमेलिन की 5 से 7 अक्टूबर तक भारत यात्रा को दोनों देशों के व्यापार और निवेश संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनके साथ वरिष्ठ अधिकारियों और व्यापारिक प्रतिनिधियों का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब TEPA के लागू होने का एक साल पूरा हो चुका है। इसी अवसर पर 7 अक्टूबर को दूसरा इंडिया-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट आयोजित किया जाएगा। उद्योग जगत की नजर इस सम्मेलन पर भी है, जहां व्यापार, निवेश और तकनीकी साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।
99.6 प्रतिशत निर्यात के लिए खुला बड़ा बाजार
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के मुताबिक TEPA भारतीय निर्यातकों को EFTA के चार देशों में बाजार पहुंच बढ़ाने का अवसर देता है। समझौते के तहत EFTA देशों ने भारत के निर्यात के करीब 99.6 प्रतिशत हिस्से पर टैरिफ में छूट दी है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए इन विकसित और उच्च-आय वाले बाजारों में प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उत्पाद पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ी हैं। हालांकि उद्योग का जोर अब केवल बाजार पहुंच पर नहीं, बल्कि इन अवसरों का वास्तविक कारोबारी इस्तेमाल बढ़ाने पर है।
फार्मा से इंजीनियरिंग तक कई क्षेत्रों पर नजर
FIEO के चेयरमैन एससी रल्हन के मुताबिक TEPA ने भारतीय कारोबार को EFTA बाजारों में विस्तार के लिए मजबूत ढांचा दिया है। अब जरूरत इसे बड़े स्तर पर दोतरफा व्यापार, निवेश और तकनीकी साझेदारी में बदलने की है। फार्मास्यूटिकल्स, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल, रसायन, प्रसंस्कृत खाद्य और रत्न-आभूषण के अलावा आईटी और पेशेवर सेवाओं में भी भारत की क्षमता को EFTA देशों की तकनीकी और वित्तीय विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जा सकता है।
स्विट्जरलैंड बना प्रमुख व्यापारिक साझेदार
EFTA के चार देशों में स्विट्जरलैंड भारत का सबसे बड़ा व्यापार और निवेश साझेदार है। उद्योग के मुताबिक दोनों देशों के बीच संबंध अब पारंपरिक वस्तु व्यापार से आगे बढ़कर तकनीक, अनुसंधान एवं विकास, वित्तीय सेवाओं, डिजिटल समाधान, स्थिरता और पेशेवर सेवाओं तक विस्तार पा सकते हैं। स्विट्जरलैंड की प्रिसिजन इंजीनियरिंग, फार्मास्यूटिकल्स, वित्तीय सेवाओं, तकनीक और नवाचार की क्षमता तथा भारत के बड़े विनिर्माण और सेवा बाजार के बीच सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
EFTA से भारत में 100 अरब डॉलर निवेश का लक्ष्य
TEPA का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत में निवेश से भी जुड़ा है। EFTA देशों ने समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। इसके साथ करीब 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने की क्षमता जुड़ी है। उद्योग का मानना है कि इस निवेश से भारत में विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के साथ तकनीक हस्तांतरण और वैश्विक मूल्य शृंखला से जुड़ने के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इससे TEPA का लाभ केवल निर्यात तक सीमित न रहकर निवेश और रोजगार तक पहुंच सकता है।
MSME को जोड़ना अगली बड़ी चुनौती
उद्योग का जोर इस बात पर भी है कि TEPA का लाभ केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित न रहे। भारतीय MSME को EFTA बाजार की मांग, शुल्क रियायतों, गुणवत्ता मानकों और निर्यात प्रक्रियाओं की जानकारी देकर इस बाजार से जोड़ना जरूरी है। इससे भारतीय निर्यात का आधार व्यापक हो सकता है और छोटे एवं मध्यम उद्यमों को वैश्विक बाजार में प्रवेश का अवसर मिलेगा। उद्योग के अनुसार MSME की भागीदारी बढ़ाना TEPA के वास्तविक प्रभाव को व्यापक बनाने के लिए महत्वपूर्ण होगा।
7 अक्टूबर का इंडिया-EFTA समिट अहम
TEPA के पहले साल के बाद अब अगला चरण समझौते के वास्तविक परिणामों पर केंद्रित है। 7 अक्टूबर का इंडिया-EFTA प्रॉस्पेरिटी समिट उद्योग-से-उद्योग संवाद, निवेश और कारोबारी साझेदारी के नए अवसर तलाशने का मंच बनेगा। भारतीय उद्योग की नजर अब इस बात पर है कि TEPA के तहत मिली बाजार पहुंच को किस तरह निर्यात वृद्धि, निवेश, तकनीकी साझेदारी और MSME के विस्तार में बदला जाता है। यही तय करेगा कि समझौते का शुरुआती अवसर भारतीय कारोबार के लिए कितनी ठोस आर्थिक संभावना में बदलता है।


