- फजलगंज में 100 से अधिक फायरकर्मियों और उद्यमियों को CPR व बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण; आग में झुलसने, धुएं से सांस लेने में दिक्कत और आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार के तरीके भी बताए गए
भारत 19/ कानपुर। हृदय गति अचानक रुकने की स्थिति में अस्पताल पहुंचने का इंतजार किए बिना शुरू की गई CPR (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) किसी की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। आपात स्थिति में शुरुआती मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं और इस दौरान आसपास मौजूद व्यक्ति की त्वरित प्रतिक्रिया जीवन और मृत्यु के बीच अंतर पैदा कर सकती है। इसी उद्देश्य से सोमवार को फजलगंज में फायर सर्विस कर्मियों के लिए CPR और बेसिक लाइफ सपोर्ट का प्रशिक्षण आयोजित किया गया।
फायरकर्मियों को सिखाई गई जीवन बचाने की तकनीक
फीटा की ओर से आयोजित प्रशिक्षण में बेसिक लाइफ सपोर्ट ट्रेनर प्रियेश मिश्रा ने फायरकर्मियों को CPR की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने बताया कि किसी व्यक्ति की हृदय गति रुकने पर आसपास मौजूद लोगों को घबराने के बजाय तत्काल मदद के लिए आगे आना चाहिए। प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि आपात चिकित्सा सहायता पहुंचने तक आवश्यक जीवनरक्षक उपाय जारी रखना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों ने कहा कि CPR की जानकारी केवल फायरकर्मियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, क्योंकि हृदय संबंधी आपात स्थिति किसी भी व्यक्ति के साथ कहीं भी हो सकती है।
आग में झुलसे और धुएं से प्रभावित लोगों की मदद
प्रशिक्षण में आग की घटनाओं के दौरान सामने आने वाली अन्य आपात स्थितियों पर भी फायरकर्मियों को जानकारी दी गई। आग में झुलसे व्यक्ति को तत्काल प्राथमिक उपचार देने और धुएं के कारण सांस लेने में परेशानी होने पर उठाए जाने वाले जरूरी कदम समझाए गए। फायरकर्मियों को यह भी बताया गया कि प्रभावित व्यक्ति को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के दौरान किन सावधानियों का ध्यान रखना चाहिए और चिकित्सा सहायता मिलने तक किस तरह की प्राथमिक मदद दी जा सकती है।
100 से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच
कार्यशाला के दौरान फायर सर्विस कर्मियों के स्वास्थ्य की भी जांच की गई। मेदांता अस्पताल, गुड़गांव की टीम ने ब्लड प्रेशर, शुगर, ईसीजी, बोन डेंसिटी और लंग्स कैपेसिटी समेत कई स्वास्थ्य जांच कीं। जांच के बाद चिकित्सकों ने कर्मचारियों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जरूरी परामर्श दिया। कार्यक्रम में 100 से अधिक फायर सर्विस कर्मियों और उद्यमियों ने प्रशिक्षण और स्वास्थ्य जांच में हिस्सा लिया।
जोखिम उठाने वाले फायरकर्मियों की सेहत पर जोर
मुख्य अग्निशमन अधिकारी दीपक शर्मा ने कहा कि फायरकर्मी दूसरों की जान और संपत्ति बचाने के लिए लगातार जोखिम उठाते हैं। ऐसे में उनके स्वस्थ रहने के साथ आपात स्थितियों से निपटने के लिए नियमित प्रशिक्षण भी जरूरी है। उन्होंने अन्य अग्निशमन केंद्रों पर भी इसी तरह के स्वास्थ्य जांच और जीवनरक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जरूरत बताई।
अन्य केंद्रों पर भी कार्यक्रम कराने की तैयारी
फीटा के महासचिव उमंग अग्रवाल ने कहा कि फायरकर्मी आग के बीच जाकर लोगों की जान और संपत्ति बचाते हैं। इसलिए उनके लिए स्वास्थ्य जांच के साथ जीवनरक्षा से जुड़े प्रशिक्षण की व्यवस्था करना सामाजिक जिम्मेदारी है। मेदांता के कोऑर्डिनेटर अनुराग द्विवेदी ने बताया कि आगे भी इस तरह के स्वास्थ्य जांच और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
पांच केंद्रों के फायरकर्मी हुए शामिल
प्रशिक्षण में फजलगंज, जाजमऊ, किदवई नगर, पनकी और एयरपोर्ट समेत विभिन्न अग्निशमन केंद्रों के फायर सर्विस कर्मियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का फोकस फायरकर्मियों को आग से जुड़ी घटनाओं के साथ-साथ अन्य अचानक पैदा होने वाली चिकित्सा आपात स्थितियों में भी प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार करना रहा।


