- 21 नवंबर को होगी ऑफलाइन परीक्षा, 15 अक्टूबर तक पंजीकरण, पहले स्थान पर एक लाख, दूसरे के दो और तीसरे के चार विद्यार्थियों को मिलेगा पुरस्कार
भारत 19/ कानपुर। भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और प्राचीन ज्ञान-विज्ञान को जानने-समझने के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) से जुड़े महाविद्यालयों से 20 हजार विद्यार्थी ‘भारत बौद्धिकस परीक्षा 2.0’ में शामिल होंगे। परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्रों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक पुरस्कार भी रखे गए हैं। गुरुवार को कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में हुई विशेष बैठक में परीक्षा की तैयारियों और अधिक से अधिक छात्रों को जोड़ने की कार्ययोजना पर चर्चा हुई। कुलपति ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और संबद्ध महाविद्यालयों को विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
21 नवंबर को होगी परीक्षा, 15 अक्टूबर तक पंजीकरण
विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान की ओर से आयोजित यह परीक्षा 21 नवंबर 2026 को ऑफलाइन माध्यम से होगी। इसमें स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थी हिस्सा ले सकेंगे। परीक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा में शामिल होने के लिए 100 रुपये पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 है।
पहले स्थान पर एक लाख रुपये का पुरस्कार
परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए राष्ट्रीय स्तर पर आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं। पहले स्थान पर एक लाख रुपये का पुरस्कार मिलेगा। दूसरे स्थान पर रहने वाले दो विद्यार्थियों को 50-50 हजार रुपये और तीसरे स्थान पर रहने वाले चार विद्यार्थियों को 25-25 हजार रुपये दिए जाएंगे। राज्य एवं केंद्रशासित प्रदेश स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रति विद्यार्थी पांच हजार रुपये का पुरस्कार मिलेगा। सभी प्रतिभागियों को सहभागिता प्रमाणपत्र दिया जाएगा, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को ‘भारत प्रमाण-पत्र’ भी मिलेगा।
भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने का अवसर
कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृति और प्राचीन भारतीय ज्ञान-विज्ञान के प्रति जागरूकता और गौरवबोध विकसित करना है। उन्होंने कहा कि भारत की बौद्धिक परंपरा समृद्ध रही है और युवाओं के लिए उसकी विरासत को जानना जरूरी है। परीक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों को इस ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों को समझने और उनकी समकालीन प्रासंगिकता से परिचित होने का अवसर मिलेगा।
राष्ट्रीय पहल में कई संस्थानों का सहयोग
इस राष्ट्रीय पहल में शिक्षा मंत्रालय के भारतीय ज्ञान प्रणाली प्रभाग की ज्ञान-सहयोगी के रूप में सहभागिता है। भारतीय विश्वविद्यालय संघ का भी इसे समर्थन प्राप्त है। बैठक में महाविद्यालय विकास परिषद के निदेशक प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी, स्कूल ऑफ आर्ट्स, ह्यूमैनिटीज एंड सोशल साइंसेज के निदेशक डॉ. अमित कुमार समेत विश्वविद्यालय के शिक्षक, विद्या भारती उच्च शिक्षा, कानपुर प्रांत के पदाधिकारी तथा संबद्ध महाविद्यालयों के प्राचार्य और शिक्षक मौजूद रहे।


