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Category: लोकल शहर

जाजमऊ गंगा पुल की प्रस्तावित बंदी और डायवर्जन रूट

उन्नाव प्रशासन की सहमति अटकी, जाजमऊ गंगा पुल की बंदी टली

भारत 19कानपुर। कानपुर को उन्नाव और लखनऊ से जोड़ने वाले पुराने जाजमऊ गंगा पुल को तीन महीने के लिए बंद करने की योजना फिलहाल टल गई है। एक सितंबर से पुल पर यातायात रोककर मरम्मत शुरू होनी थी, लेकिन प्रस्तावित डायवर्जन रूट को लेकर उन्नाव प्रशासन की सहमति नहीं बन सकी। इसके चलते फिलहाल पुल […]
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जाजमऊ गंगा पुल की प्रस्तावित बंदी और डायवर्जन रूट

उन्नाव प्रशासन की सहमति अटकी, जाजमऊ गंगा पुल की बंदी टली

भारत 19कानपुर। कानपुर को उन्नाव और लखनऊ से जोड़ने वाले पुराने जाजमऊ गंगा पुल को तीन महीने के लिए बंद करने की योजना फिलहाल टल गई है। एक सितंबर से पुल पर यातायात रोककर मरम्मत शुरू होनी थी, लेकिन प्रस्तावित डायवर्जन रूट को लेकर उन्नाव प्रशासन की सहमति नहीं बन सकी। इसके चलते फिलहाल पुल […]
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कानपुर मेट्रो कॉरिडोर-2 के बर्रा-8 और शास्त्री चौक स्टेशन पर प्लेटफॉर्म निर्माण

कानपुर मेट्रो कॉरिडोर-2 में बड़ा पड़ाव, आठ प्लेटफॉर्म का काम पूरा

भारत 19 कानपुर। कानपुर मेट्रो के कॉरिडोर-2 में अब स्टेशन निर्माण की तस्वीर तेजी से बदल रही है। बर्रा-8 और शास्त्री चौक मेट्रो स्टेशनों के प्लेटफॉर्म लेवल की ढलाई पूरी होने के साथ चार एलिवेटेड स्टेशनों पर बनने वाले सभी आठ प्लेटफॉर्म के इस चरण का काम पूरा हो गया है। जून में विजय नगर […]
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यूपी में बुजुर्ग महिलाओं के लिए मुफ्त रोडवेज बस यात्रा और जीरो टिकट

फ्री बस यात्राः बुजुर्ग महिलाओं को आधार दिखाकर मिलेगा जीरो टिकट

भारत 19लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की व्यवस्था अब जमीन पर लागू हो गई है। परिवहन निगम ने इस संबंध में संचालन संबंधी निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत पात्र बुजुर्ग महिलाएं रोडवेज की निर्धारित बस सेवाओं में बिना किराया दिए यात्रा […]
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पॉलिटेक्निक छात्रों को मिलेंगी इंजीनियरिंग की हाईटेक लैब

भारत 19कानपुर। पॉलिटेक्निक छात्रों के लिए अब एआई, रोबोटिक्स और आधुनिक कंप्यूटर तकनीक सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और मान्यवर कांशीराम राजकीय पॉलिटेक्निक तिर्वा, कन्नौज के बीच शैक्षणिक करार हुआ है। इसके बाद पॉलिटेक्निक छात्रों को विश्वविद्यालय की अत्याधुनिक लैब में प्रैक्टिकल […]
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कानपुर जोन में अपराध नियंत्रण और साइबर अपराध पर पुलिस की कार्रवाई

कानपुर जोन में अपराध घटे, साइबर ठगी बनी चुनौती

कानपुर। कानपुर जोन के आठ जिलों में पिछले तीन महीनों में कई गंभीर अपराधों में कमी दर्ज की गई है, लेकिन साइबर ठगी पुलिस के लिए नई और बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। 23 मई से 31 अगस्त 2026 के बीच पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक 19,061 वांछित अपराधियों में से 18,934 को गिरफ्तार […]
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आईआईटी कानपुर और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के शोध में अवसाद की दवा के असर का अनुमान

आईआईटी कानपुर: सात दिन में दवा असर का अनुमान

कानपुर। अवसाद के मरीजों में सही एंटीडिप्रेसेंट यानी अवसादरोधी दवा चुनने की प्रक्रिया अब अधिक सटीक हो सकती है। आईआईटी कानपुर और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सहयोग से हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि मरीज के मस्तिष्क और पेट से मिलने वाले गैर-आक्रामक विद्युत संकेतों को उसके चिकित्सीय लक्षणों के साथ मिलाकर इलाज […]
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यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारा, 75 बनाम 200 - सपा के 75 सीटों के संभावित फॉर्मूले की चर्चा, कांग्रेस 200 सीटों पर दावेदारी कर रही; 2027 चुनाव से पहले गठबंधन की पहली बड़ी परीक्षा** भारत 19 लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी कांग्रेस को करीब 75 विधानसभा सीटें देने के फॉर्मूले पर विचार कर रही है, जबकि कांग्रेस की प्रदेश इकाई करीब 200 सीटों पर दावेदारी करती रही है। दोनों संभावित आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर अब गठबंधन की राह में सबसे अहम चुनौती बनता दिख रहा है। हालांकि, दोनों दलों की ओर से अभी किसी अंतिम सीट बंटवारे की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सपा का फोकस संख्या नहीं, जिताऊ सीटों पर सपा की रणनीति में सीटों की संख्या के बजाय चुनावी जीत की संभावना को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा है। पार्टी उन विधानसभा सीटों पर अपना दावा बनाए रखना चाहती है जहां उसका संगठन मजबूत है और स्थानीय सामाजिक समीकरण भाजपा के खिलाफ उसके पक्ष में जाता है। सपा के भीतर यह तर्क भी दिया जा रहा है कि गठबंधन में ज्यादा सीटें देना अपने आप में बेहतर प्रदर्शन की गारंटी नहीं है। इसलिए कांग्रेस को ऐसी सीटें देने पर जोर हो सकता है जहां उसका संगठन, उम्मीदवार और स्थानीय वोट आधार गठबंधन को वास्तविक चुनावी लाभ पहुंचा सके। हालांकि 75 सीटों का आंकड़ा अभी संभावित फॉर्मूला है, अंतिम फैसला नहीं। कांग्रेस की 200 सीटों पर दावेदारी कांग्रेस की प्रदेश इकाई उत्तर प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के लिए ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है। पार्टी की संभावित दावेदारी का आधार उसका संगठन, स्थानीय प्रभाव और 2024 लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन का प्रदर्शन हो सकता है। कांग्रेस ने 2024 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और छह सीटें जीतीं। पार्टी इस प्रदर्शन को विधानसभा चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने के तर्क के तौर पर इस्तेमाल कर सकती है। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव का गणित अलग होता है। इसलिए 2024 का सीट फॉर्मूला 2027 में उसी रूप में लागू होगा, यह अभी तय नहीं है। पश्चिमी यूपी से पूर्वांचल तक कांग्रेस की नजर कांग्रेस की संभावित दावेदारी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ पूर्वांचल की सीटें भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं। नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, मथुरा और आगरा जैसे क्षेत्रों में पार्टी अपनी राजनीतिक मौजूदगी के आधार पर सीटों पर दावा कर सकती है। पूर्वांचल में वाराणसी और आसपास की विधानसभा सीटों को लेकर भी कांग्रेस की रुचि की चर्चा है। रोहनिया, वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण, वाराणसी कैंट और सेवापुरी जैसी सीटों के नाम संभावित दावेदारी में बताए जा रहे हैं। हालांकि इन सीटों पर कांग्रेस का दावा अंतिम है, ऐसा अभी नहीं कहा जा सकता। **वास्तविक तस्वीर सीट बंटवारे की औपचारिक बातचीत के बाद ही साफ होगी।** 2017 का अनुभव सपा के लिए बड़ा सबक सपा और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे के मौजूदा गणित में 2017 का विधानसभा चुनाव भी महत्वपूर्ण संदर्भ है। उस चुनाव में दोनों दलों ने गठबंधन किया था। कांग्रेस ने 100 से अधिक सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन उसे सिर्फ सात सीटों पर जीत मिली। सपा इस बार ऐसे फॉर्मूले से बचना चाहती है जिसमें अधिक सीटें देने के बावजूद गठबंधन को अपेक्षित चुनावी फायदा न मिले। इसलिए सीटों की संख्या के बजाय प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की जमीनी ताकत और जीत की संभावना को महत्व दिए जाने की संभावना है। PDA रणनीति भी बदल सकती है सीटों का गणित सपा की PDA रणनीति (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) भी 2027 के सीट बंटवारे को प्रभावित कर सकती है। पार्टी इस सामाजिक समीकरण को विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार चयन और क्षेत्रीय रणनीति के साथ जोड़ने की तैयारी कर सकती है। ऐसे में सपा ज्यादा सीटें अपने पास रखना चाहेगी, ताकि सामाजिक समीकरण के अनुरूप उम्मीदवार उतारने की उसकी रणनीति प्रभावित न हो। यही वजह है कि कांग्रेस की बड़ी सीट दावेदारी और सपा की सीमित सीटों वाले संभावित फॉर्मूले के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है। 2024 का साथ, 2027 में सीटों की परीक्षा 2024 लोकसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस का गठबंधन भाजपा के खिलाफ प्रभावी साबित हुआ था। दोनों दलों ने मिलकर उत्तर प्रदेश में भाजपा को बड़ा नुकसान पहुंचाया और विपक्षी गठबंधन को मजबूत स्थिति मिली। हालांकि विधानसभा चुनाव का मुकाबला अलग होगा। 403 सीटों पर उम्मीदवार चयन, स्थानीय संगठन और जातीय-सामाजिक समीकरण कहीं ज्यादा निर्णायक होंगे। इसलिए 2024 की सफलता को 2027 के लिए दोहराने के लिए दोनों दलों को सीटों का ऐसा बंटवारा करना होगा जिसमें दोनों की संगठनात्मक ताकत का अधिकतम इस्तेमाल हो सके। अखिलेश-राहुल की बातचीत से निकलेगा रास्ता फिलहाल 75 बनाम 200 का आंकड़ा अंतिम सीट बंटवारा नहीं, बल्कि दोनों दलों की संभावित स्थिति और दावेदारी के बीच अंतर को दिखाता है। वास्तविक समझौता सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच बातचीत के बाद ही सामने आएगा। इस बातचीत में सिर्फ सीटों की संख्या नहीं, बल्कि क्षेत्रवार हिस्सेदारी, उम्मीदवार की जीतने की क्षमता, 2024 का प्रदर्शन और स्थानीय संगठन की ताकत** जैसे मुद्दे भी अहम रहेंगे।

यूपी में सपा-कांग्रेस सीट बंटवारा, 75 बनाम 200

भारत 19 लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक समाजवादी पार्टी कांग्रेस को करीब 75 विधानसभा सीटें देने के फॉर्मूले पर विचार कर रही है, जबकि कांग्रेस की प्रदेश इकाई करीब 200 सीटों पर दावेदारी करती रही है। […]
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पॉलिटेक्निक प्लेसमेंट में बड़ा बदलाव, एआई से होगा छात्रों का चयन

भारत 19विक्सन सिकरोड़िया, कानपुर। पॉलिटेक्निक छात्रों के लिए नौकरी का मानक अब केवल उनका डिप्लोमा नहीं रह गया है। डिप्लोमाधारक छात्रों को कंपनियां अपनी कसौटी पर तब तक खरा नहीं मानतीं, जब तक वे उनके आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टूल का एग्जाम पास नहीं कर लेते हैं। कंपनियां इसका सबसे बड़ा इस्तेमाल कैंपस प्लेसमेंट के लिए […]
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हिंदूवादी नेता की फॉर्च्यूनर में हत्या, नहर में मिला शव - फॉर्च्यूनर में ही मारी गई गोली, शव दुबग्गा की नहर में फेंका; पत्नी ने ड्राइवर पर लगाया था अपहरण का आरोप, उन्नाव की जमीन रंजिश पर जांच भारत 19 लखनऊ। हिंदूवादी नेता धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या की जांच में सबसे बड़ा शक उनके ड्राइवर पर टिक गया है। शनिवार से लापता धीरेंद्र का शव रविवार को दुबग्गा के पास शारदा सहायक नहर से बरामद हुआ। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उनकी अपनी फॉर्च्यूनर में ही गोली मारकर हत्या की गई और शव नहर में फेंक दिया गया। परिवार ने लापता होने के बाद ही ड्राइवर पर अपहरण का आरोप लगाया था। अब पुलिस उन्नाव के जमीन विवाद और हत्या की पूरी साजिश की कड़ियां जोड़ रही है। लापता होने के बाद नहर में मिला शव धीरेंद्र प्रताप सिंह मूल रूप से उन्नाव के रहने वाले थे और लंबे समय से लखनऊ के पीजीआई क्षेत्र में रह रहे थे। शनिवार को उनके अचानक लापता होने के बाद परिवार ने तलाश शुरू की। पत्नी ममता सिंह ने पुलिस को शिकायत देकर ड्राइवर और उसके साथियों पर पति को अगवा करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने शिकायत के आधार पर तलाश शुरू की। रविवार को दुबग्गा क्षेत्र में नहर में शव मिलने की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। शव बाहर निकाला गया तो उसकी पहचान धीरेंद्र प्रताप सिंह के रूप में हुई। इसके बाद पुलिस ने हत्या की दिशा में जांच तेज कर दी। अपनी ही फॉर्च्यूनर में मारी गई गोली पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक धीरेंद्र की फॉर्च्यूनर के अंदर ही गोली मारकर हत्या की गई। इसके बाद शव को वाहन से नहर तक ले जाकर पानी में फेंके जाने की आशंका है। शरीर पर गोली लगने के निशान मिले हैं। फोरेंसिक टीम ने फॉर्च्यूनर और घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से गोली लगने और मौत की परिस्थितियों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की उम्मीद है। ड्राइवर की भूमिका क्यों आई शक के घेरे में धीरेंद्र के लापता होने के बाद परिवार ने सबसे पहले ड्राइवर पर संदेह जताया था। पुलिस ने ड्राइवर समेत दो संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। जांच में उसके बयानों और उपलब्ध CCTV फुटेज के बीच अंतर मिलने के बाद पुलिस का शक और गहरा हुआ। पुलिस अब ड्राइवर की गतिविधियों, मोबाइल लोकेशन और धीरेंद्र के लापता होने से लेकर शव मिलने तक की पूरी टाइमलाइन खंगाल रही है। हत्या में ड्राइवर के अलावा और कौन लोग शामिल थे, इसकी भी जांच की जा रही है। उन्नाव का जमीन विवाद बना अहम जांच एंगल हत्या की वजह तलाश रही पुलिस को उन्नाव में जमीन से जुड़े विवाद की कड़ी भी मिली है। पुलिस यह पता लगा रही है कि धीरेंद्र का किन लोगों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था और क्या इसी रंजिश में हत्या की साजिश रची गई। फिलहाल जमीन विवाद को हत्या की संभावित वजह माना जा रहा है। पुलिस ने अभी इसे हत्या का अंतिम कारण घोषित नहीं किया है। विवाद से जुड़े लोगों और उनके संपर्कों की भी जांच की जा रही है। मोबाइल और CCTV से खुल रही हत्या की कड़ियां पुलिस धीरेंद्र के लापता होने के समय से लेकर नहर में शव मिलने तक की गतिविधियों को तकनीकी साक्ष्यों से जोड़ रही है। CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल की मदद से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि हत्या कब और कहां हुई और शव को नहर तक कौन लेकर गया। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि फॉर्च्यूनर में हत्या के समय कितने लोग मौजूद थे और वारदात के बाद आरोपियों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए क्या-क्या प्रयास किए। छह पुलिस टीमें जांच में जुटीं मामले के खुलासे के लिए पुलिस ने छह टीमें लगाई हैं। ड्राइवर समेत दो संदिग्धों से पूछताछ चल रही है, जबकि अन्य संभावित आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस के सामने अब तीन अहम सवाल हैं कि हत्या की साजिश किसने रची, धीरेंद्र की फॉर्च्यूनर में गोली किसने चलाई और उन्नाव के जमीन विवाद का इस हत्या से क्या संबंध है। इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही वारदात की पूरी तस्वीर साफ होगी। धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या की जांच में फिलहाल ड्राइवर की भूमिका, फॉर्च्यूनर, नहर में शव मिलने और जमीन विवाद चार प्रमुख कड़ियां बनकर सामने आई हैं। पुलिस इन्हीं कड़ियों को जोड़कर हत्या की पूरी साजिश तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

हिंदूवादी नेता की फॉर्च्यूनर में हत्या, नहर में मिला शव

– फॉर्च्यूनर में ही मारी गई गोली, शव दुबग्गा की नहर में फेंका; पत्नी ने ड्राइवर पर लगाया था अपहरण का आरोप, उन्नाव की जमीन रंजिश पर जांच भारत 19 लखनऊ। हिंदूवादी नेता धीरेंद्र प्रताप सिंह की हत्या की जांच में सबसे बड़ा शक उनके ड्राइवर पर टिक गया है। शनिवार से लापता धीरेंद्र का शव रविवार […]
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