- सीएसजेएमयू और मान्यवर कांशीराम राजकीय पॉलिटेक्निक तिर्वा के बीच करार; एआई, रोबोटिक्स और कंप्यूटर साइंस की लैब में प्रैक्टिकल सीखेंगे छात्र
भारत 19
कानपुर। पॉलिटेक्निक छात्रों के लिए अब एआई, रोबोटिक्स और आधुनिक कंप्यूटर तकनीक सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं रहेगी। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी और मान्यवर कांशीराम राजकीय पॉलिटेक्निक तिर्वा, कन्नौज के बीच शैक्षणिक करार हुआ है। इसके बाद पॉलिटेक्निक छात्रों को विश्वविद्यालय की अत्याधुनिक लैब में प्रैक्टिकल करने और तकनीकी प्रोजेक्ट पर काम करने का मौका मिलेगा। इससे डिप्लोमा की पढ़ाई के साथ उन्हें इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव भी मिल सकेगा।
एआई से रोबोटिक्स तक मिलेगा प्रैक्टिकल अनुभव
करार पर सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने हस्ताक्षर किए। इसके तहत पॉलिटेक्निक छात्र विश्वविद्यालय की एआईसीटीई आइडिया लैब के अलावा रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और कंप्यूटर साइंस की अत्याधुनिक लैब में प्रायोगिक अध्ययन कर सकेंगे। खास बात यह है कि छात्रों की भूमिका सिर्फ लैब में मशीन और उपकरण देखने तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें खुद प्रयोग करने और तकनीकी प्रोजेक्ट तैयार करने का मौका मिलेगा। इससे कक्षा में पढ़ी तकनीक को वास्तविक परिस्थितियों में समझने का अवसर मिलेगा।
रोबोट डिजाइन और प्रोग्रामिंग भी सीखेंगे
विश्वविद्यालय की रोबोटिक्स लैब में छात्र रोबोट के डिजाइन और प्रोग्रामिंग से जुड़े प्रयोग कर सकेंगे। एआई लैब में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग की बारीकियां समझने का मौका मिलेगा। वहीं कंप्यूटर साइंस लैब में प्रोग्रामिंग, सॉफ्टवेयर और डिजिटल तकनीक के व्यावहारिक इस्तेमाल पर काम करने का अवसर मिलेगा। डिजिटल टेक्नोलॉजी के जरिए इंडस्ट्री में काम करने के नए तौर-तरीकों से भी छात्रों को परिचित कराया जाएगा।
नौकरी से पहले इंडस्ट्री का अनुभव
इस पहल का सीधा फायदा छात्रों के कौशल विकास में दिखाई दे सकता है। इंडस्ट्री में ऑटोमेशन, एआई, रोबोटिक्स और डेटा आधारित तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ऐसे में पॉलिटेक्निक छात्रों के लिए इन तकनीकों पर हाथ से काम करने का अनुभव रोजगार की तैयारी में उपयोगी हो सकता है। डिप्लोमा पूरा करने के बाद छात्रों के पास सिर्फ शैक्षणिक योग्यता ही नहीं होगी, बल्कि आधुनिक तकनीक पर काम करने का प्रैक्टिकल अनुभव भी होगा। यही अनुभव उन्हें इंडस्ट्री की जरूरतों को समझने में मदद कर सकता है।
औद्योगिक भ्रमण और प्रशिक्षण में भी सहयोग
दोनों संस्थान केवल लैब तक सीमित नहीं रहेंगे। करार के तहत शैक्षणिक एवं तकनीकी सहयोग, विद्यार्थियों के कौशल विकास, फैकल्टी और विद्यार्थी संवाद, औद्योगिक भ्रमण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ संयुक्त परियोजनाओं, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में भी दोनों संस्थान सहयोग करेंगे। इससे छात्रों को तकनीकी शिक्षा के साथ शोध और नए प्रयोगों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
पॉलिटेक्निक और इंजीनियरिंग संस्थान आएंगे करीब
अब तक पॉलिटेक्निक छात्रों की पढ़ाई मुख्य रूप से उनके अपने संस्थान की सुविधाओं तक केंद्रित रहती थी। इस करार से उन्हें इंजीनियरिंग और तकनीकी शिक्षा के बड़े संस्थान की प्रयोगशालाओं और विशेषज्ञता से जुड़ने का अवसर मिलेगा। खासकर एआई और रोबोटिक्स जैसी तेजी से बदलती तकनीकों में यह एक्सपोजर छात्रों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि छात्रों को लैब, प्रोजेक्ट और प्रशिक्षण के कितने नियमित अवसर मिलते हैं।
दोनों संस्थानों के अधिकारी रहे मौजूद
समझौते के दौरान स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग के निदेशक डॉ. आलोक कुमार, मान्यवर कांशीराम राजकीय पॉलिटेक्निक की प्रधानाचार्य निधि वार्ष्णेय, डॉ. गौरव कुमार पाण्डेय, प्रो. रामेंद्र सिंह निरंजन समेत दोनों संस्थानों के शिक्षक और अधिकारी मौजूद रहे। इस करार से तिर्वा के पॉलिटेक्निक छात्रों के लिए सीएसजेएमयू की हाईटेक तकनीकी सुविधाओं तक पहुंच का रास्ता खुला है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन सुविधाओं का इस्तेमाल छात्रों के प्रैक्टिकल प्रशिक्षण, प्रोजेक्ट और रोजगार-कौशल को कितना मजबूत करता है।
