- न्यायिक कार्य से विरत रहने पर कार्रवाई की आशंका और अधिवक्ता सुरक्षा कानून की मांग पर 10-11 सितंबर को बनेगी साझा रणनीति
भारत 19
कानपुर। अधिवक्ताओं के हित, सुरक्षा और पेशेगत स्वतंत्रता से जुड़े सवालों पर कानपुर से प्रदेशव्यापी रणनीति तैयार करने की कवायद शुरू हो गई है। कानपुर बार एसोसिएशन और दि लॉयर्स एसोसिएशन ने 10 और 11 सितंबर को प्रांतीय सम्मेलन बुलाया है। इसमें उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से अधिवक्ताओं और बार संगठनों की राय लेकर साझा प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे, जिन्हें सरकार और न्यायपालिका के समक्ष रखा जाएगा।
सम्मेलन की पृष्ठभूमि में अधिवक्ता संगठनों की दो प्रमुख चिंताएं हैं। पहली, किसी परिस्थिति में न्यायिक कार्य से विरत रहने को सीधे हड़ताल मानकर अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई की संभावना। दूसरी, अधिवक्ताओं पर होने वाली घटनाओं के बीच उनकी सुरक्षा के लिए अलग कानून की लंबे समय से चली आ रही मांग।
हड़ताल की परिभाषा पर खड़ा हुआ सवाल
21 अगस्त को जारी पत्र में दोनों संगठनों ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और अन्य बार काउंसिलों की हड़ताल न करने संबंधी अपेक्षाओं के संदर्भ में अपनी चिंता रखी है। उनका कहना है कि अधिवक्ता हितों, सुरक्षा या अन्य गंभीर परिस्थितियों में न्यायिक कार्य से अलग रहने के निर्णय को हर स्थिति में हड़ताल मानना उचित नहीं है। बार एसोसिएशनों को आशंका है कि ऐसे मामलों में दंडात्मक कार्रवाई का दायरा बढ़ने से अधिवक्ताओं के पेशेगत अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। पत्र में उच्च न्यायालय के एक निर्णय का हवाला देते हुए अधिवक्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों और उनके संभावित परिणामों पर भी चिंता जताई गई है।
सुरक्षा कानून को मिलेगा प्रांतीय मंच
सम्मेलन में अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए अलग अधिवक्ता सुरक्षा अधिनियम की मांग को प्रमुखता से उठाया जाएगा। दोनों संगठनों का कहना है कि अधिवक्ताओं के साथ होने वाली हिंसक और गंभीर घटनाओं के बावजूद उनकी सुरक्षा के लिए विशेष कानूनी व्यवस्था की मांग अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इस बार कोशिश अलग-अलग बार संगठनों की मांगों को एक मंच पर लाकर प्रदेश स्तर का साझा प्रस्ताव तैयार करने की है। सुरक्षा के अलावा अधिवक्ताओं के कल्याण, पेशेगत स्वतंत्रता और अधिकारों से जुड़े सुझावों पर भी चर्चा होगी।
कानपुर से तय होगा आगे का रास्ता
4 अगस्त को दोनों संगठनों की संयुक्त आमसभा में प्रांतीय सम्मेलन कराने का निर्णय लिया गया था। अब 10 और 11 सितंबर को कानपुर बार एसोसिएशन के लॉन में होने वाले सम्मेलन में प्रदेश भर के अधिवक्ताओं की राय जुटाई जाएगी। दो दिनों के मंथन के बाद तैयार प्रस्ताव सरकार और न्यायपालिका को भेजे जाएंगे। साथ ही यह भी तय किया जाएगा कि अधिवक्ता समुदाय के सामने मौजूद मुद्दों को आगे किस स्तर पर और किस तरीके से उठाया जाए।
कानपुर बार एसोसिएशन के महामंत्री विनय कुमार मिश्रा एडवोकेट और दि लॉयर्स एसोसिएशन के महामंत्री राजीव यादव एडवोकेट की ओर से जारी पत्र ने यह साफ कर दिया है कि सितंबर का सम्मेलन महज औपचारिक आयोजन नहीं होगा। कानपुर में होने वाला यह जुटान अधिवक्ता समुदाय की उन चिंताओं को प्रदेश स्तर पर एक साझा आवाज देने की कोशिश है, जो सुरक्षा से लेकर पेशेगत अधिकारों तक फैली हुई हैं।


