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‘OG’ के नशे में फंसता कानपुर, युवाओं के लिए खतरे की घंटी ?

  • सोशल मीडिया और पॉप कल्चर ने ‘OG’ और ‘OG Kush’ जैसे नामों को ग्लैमर दिया, लेकिन हाई-THC कैनाबिस का बढ़ता आकर्षण चिंता की वजह; ‘सिर्फ एक बार’ से शुरू होने वाली कहानी आदत तक पहुंच सकती है

भारत 19 डेस्क | कानपुर

कानपुर। नशे की दुनिया में अब सिर्फ पदार्थ नहीं बदल रहे, उनकी पैकेजिंग और पहचान भी बदल रही है। ‘OG’ और ‘OG Kush’ जैसे नाम सोशल मीडिया और पॉप कल्चर में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन्हें कई बार महंगे और प्रीमियम नशे की छवि के साथ पेश किया जाता है। खतरा यहीं से शुरू होता है—जब नशा अपनी असली पहचान छिपाकर कूलनेस और स्टेटस का प्रतीक बन जाए। कानपुर में युवाओं के बीच इस बदलते ट्रेंड को लेकर सतर्क होने की जरूरत इसलिए भी है कि जिज्ञासा में शुरू हुआ प्रयोग कब नियमित सेवन में बदल जाए, इसका पता कई बार देर से चलता है।

‘OG’ नाम सुनने में कूल, असर को हल्के में लेना खतरनाक

OG Kush, कैनाबिस यानी भांग की एक स्ट्रेन है। कैनाबिस में THC (टेट्राहाइड्रोकैनाबिनॉल) प्रमुख साइकोएक्टिव कंपाउंड होता है, जो मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है। किसी उत्पाद में THC की मात्रा अलग-अलग हो सकती है और उसका प्रभाव व्यक्ति, मात्रा तथा सेवन के तरीके पर निर्भर करता है। इसलिए सिर्फ नाम या कीमत देखकर इसे सामान्य गांजे से अलग और सुरक्षित मानना गलत हो सकता है। ‘प्रीमियम’ शब्द बाजार की पहचान हो सकता है, सुरक्षा की गारंटी नहीं।

सबसे खतरनाक शुरुआत होती है—‘सिर्फ एक बार’

नशे की शुरुआत हमेशा लत के इरादे से नहीं होती। कई युवा इसे जिज्ञासा, दोस्तों के दबाव या सोशल मीडिया पर दिखने वाली लाइफस्टाइल से प्रभावित होकर आजमाते हैं। “एक बार ट्राई करने में क्या है”, यही सोच जोखिम को छोटा करके दिखाती है। समस्या तब पैदा होती है जब कभी-कभार का सेवन धीरे-धीरे आदत का हिस्सा बनने लगे। बार-बार या अधिक मात्रा में कैनाबिस का सेवन युवाओं में ध्यान, सीखने और याददाश्त जैसी क्षमताओं को प्रभावित कर सकता है। मानसिक स्वास्थ्य पर भी इसका असर पड़ सकता है और कुछ लोगों में जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।

सोशल मीडिया ने नशे को भी बना दिया ‘स्टाइल’

महंगे फोन, ब्रांडेड कपड़े और लग्जरी लाइफस्टाइल की तस्वीरों के बीच अब नशे से जुड़े शब्द और प्रतीक भी कई बार सोशल मीडिया की भाषा का हिस्सा बन जाते हैं। यहीं सबसे बड़ी चिंता है। जिस चीज को जोखिम के रूप में समझाया जाना चाहिए, उसे अगर स्टेटस के रूप में पेश किया जाए तो उसका असर सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। किशोर और युवा उम्र में पहचान बनाने की इच्छा अधिक होती है। ऐसे में नशे को “कूल” दिखाने वाली सामग्री जिज्ञासा को बढ़ा सकती है।

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जब भारत 19 ने न्यूरो सर्जन डॉ मनीष सिंह से बातचीत की तब उन्होंने ने क्या कहा इसको समझिये
सवाल: क्या कम उम्र या नियमित रूप से OG जैसे उच्च THC वाले पदार्थों का सेवन करने से एंजाइटी, पैनिक अटैक या अन्य गंभीर मानसिक समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है?

डॉक्टर मनीष सिंह : आजकल कुछ युवा ‘OG’ (गांजा/कैनाबिस समूह का एक रूप) जैसे नशीले पदार्थों का सेवन कर रहे हैं। इसके सेवन से मस्तिष्क पर बहुत बुरा असर पड़ता है; एकाग्रता (Concentration) घटती है, सोचने-समझने की शक्ति कम होती है और याददाश्त कमजोर होती है। मस्तिष्क के अलावा दिल (Heart) और फेफड़ों (Lungs) पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। इससे ब्लड प्रेशर (BP) अचानक तेजी से बढ़ सकता है और कमजोर रक्त वाहिकाओं के कारण हैमरेज या स्ट्रोक का गंभीर खतरा हो सकता है।

  1. सवाल: यदि कोई व्यक्ति इसका सेवन कर रहा है, तो उसमें दिमागी निर्भरता या व्यवहार में बदलाव से शुरुआती लक्षण क्या होते हैं और उन्हें समय रहते कैसे पहचाना जाए?

डॉक्टर मनीष सिंह: सेवन करने वाले लोग अक्सर चिड़चिड़े रहते हैं और उनका व्यवहार disoriented (दिशाहीन/भ्रमित) हो जाता है। पूछने पर सही उत्तर न देना और किसी एक बात पर ध्यान केंद्रित न रख पाना इसके प्रमुख शुरुआती लक्षण हैं।

  1. सवाल: यदि किसी व्यक्ति में इसके सेवन की आदत या लत के लक्षण दिखें, तो काउंसलिंग, थेरेपी या डॉक्टरी मदद के जरिए इसे सुरक्षित रूप से छोड़ने की सही प्रक्रिया क्या है?

डॉक्टर मनीष सिंह: मुख्य उपचार काउंसलिंग और पुनर्वास (Rehabilitation) है। यदि परिवार में कोई इसका सेवन कर रहा है, तो उन्हें तुरंत डॉक्टरों और विशेषज्ञों को दिखाना चाहिए। नियमित साइकोलॉजिकल काउंसलिंग और सही रिहैबिलिटेशन से इस आदत को पूरी तरह और सुरक्षित रूप से छुड़ाया जा सकता है।

भारत 19 पर SOG प्रभारी सुमित रामटेके ने क्या बताया ?
पत्रकार: एक OG नाम का ड्रग्स है जो बहुत ज्यादा प्रचलित में है। कानपुर की कई जगहों पर अभी तक OG की रिकवरी/मात्रा बरामद हुई है?

SOG प्रभारी सुमित रामटेके :OG आजकल इसलिए ज्यादा ट्रेंड में है क्योंकि सामान्य गांजे में THC (Tetra Hydro Cannabinol) का कंटेंट 3% होता है, जबकि OG में यह कंटेंट 30% होता है। इस वजह से OG बहुत ज्यादा नशीला पदार्थ है और काफी असरदार (तगड़ा) होता है। इसी कारण आजकल इसकी डिमांड ज्यादा बढ़ रही है। नॉर्मल गांजा बहुत कम पैसे में मिल जाता है (जैसे 5 ग्राम की पुड़िया ₹200 में मिल जाती है), लेकिन OG 10 ग्राम या 20 ग्राम भी ₹3,000 से ₹4,000 तक में बिकता है।

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कानपुर में बदलते नशे के बाजार पर नजर जरूरी

कानपुर में नशे की समस्या नई नहीं है, लेकिन नशे के बाजार का चेहरा बदल रहा है। पारंपरिक नशीले पदार्थों के साथ नए नाम और नए उत्पाद युवाओं के बीच पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में पुलिस और संबंधित एजेंसियों के लिए चुनौती सिर्फ बरामदगी और गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। यह पता लगाना भी जरूरी है कि नए तरह के नशीले पदार्थों की मांग कहां से पैदा हो रही है और सप्लाई की कड़ियां किस तरह काम कर रही हैं। पुलिस की निगरानी के साथ स्कूल-कॉलेज, हॉस्टल और अभिभावक स्तर पर जागरूकता भी जरूरी है।

अभिभावक इन बदलावों को सिर्फ ‘उम्र का असर’ न मानें

हर व्यवहार परिवर्तन नशे का संकेत नहीं होता, लेकिन अचानक आए बदलावों को नजरअंदाज करना भी ठीक नहीं। यदि युवा लगातार अकेला रहने लगे, पढ़ाई या काम में रुचि घट जाए, खर्च अचानक बढ़ जाए, मोबाइल को लेकर असामान्य गोपनीयता बरतने लगे, नींद या मूड में बड़े बदलाव दिखाई दें तो परिवार को सतर्क होकर बातचीत करनी चाहिए। डांटने और डराने के बजाय संवाद जरूरी है। यदि नशे पर निर्भरता के संकेत मिलें तो विशेषज्ञ या चिकित्सकीय मदद लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

युवाओं के लिए खतरा सिर्फ नशे का नहीं

कैनाबिस का असर केवल कुछ घंटों की नशे की स्थिति तक सीमित नहीं हो सकता। नियमित सेवन व्यक्ति की पढ़ाई, काम, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों को प्रभावित कर सकता है। युवाओं को यह समझना होगा कि किसी नशे का महंगा होना उसे बेहतर या सुरक्षित नहीं बनाता। सोशल मीडिया पर किसी चीज का ट्रेंड बन जाना भी उसके नुकसान को कम नहीं करता।

सबसे बड़ा सवाल

कानपुर में ‘OG’ और ‘OG Kush’ जैसे नाम कितने लोकप्रिय हो रहे हैं, यह एक पहलू है। उससे बड़ा सवाल यह है कि क्या इन नामों के पीछे छिपे जोखिम को समझे बिना युवा इनके आकर्षण की तरफ बढ़ रहे हैं? नशे के खिलाफ लड़ाई सिर्फ पुलिस की नहीं है। परिवार, स्कूल-कॉलेज, समाज और खुद युवाओं को भी इसमें भूमिका निभानी होगी। क्योंकि नशे की गिरफ्त में आने से पहले चेतावनी मिल जाए तो एक जिंदगी बच सकती है। और ‘कूल’ दिखने की कीमत अगर भविष्य से चुकानी पड़े, तो सौदा कभी फायदे का नहीं होता।

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