- गांवों में समूह गठन से लेकर वित्तीय सहायता तक जिम्मेदारी स्पष्ट होगी; बीडीओ हर 15 दिन में करेंगे समीक्षा, लापरवाही पर कठोर कार्रवाई
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के जरिए ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम में अब अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित की जाएगी। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने ग्राम विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारियों के कामकाज का स्पष्ट जॉब चार्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही योजना में लापरवाही, समूह गठन में अनियमितता या आर्थिक लेन-देन से जुड़ी शिकायत मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
गांवों में काम से लेकर निगरानी तक तय होंगे जिम्मे
सरकार का जोर एनआरएलएम को केवल समूह गठन की संख्या तक सीमित रखने के बजाय उसके जमीनी असर पर है। इसके लिए ग्राम विकास अधिकारियों, सहायक विकास अधिकारियों (महिला/आईएसबी) और बीडीओ के कर्तव्यों और दायित्वों को स्पष्ट किया जाएगा। ग्राम विकास अधिकारी गांवों में महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ेंगे, जबकि बीडीओ समूहों के संचालन, वित्तीय सहायता और सरकारी योजनाओं के धरातलीय क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संभालेंगे।
हर 15 दिन में बीडीओ को देनी होगी रिपोर्ट
एनआरएलएम की प्रगति की निगरानी के लिए ब्लॉक स्तर पर नियमित समीक्षा व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। बीडीओ महीने में दो बार यानी हर 15 दिन में योजना के प्रमुख संकेतकों की समीक्षा करेंगे। इसकी रिपोर्ट उपायुक्त, यूपीएसआरएलएम को उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही मिशन निदेशक, यूपीएसआरएलएम को बीडीओ के पर्यवेक्षणीय और नियंत्रक अधिकारी के रूप में नामित करने के आदेश दिए गए हैं। इससे ब्लॉक स्तर पर योजना के क्रियान्वयन की निगरानी के लिए जवाबदेही की एक स्पष्ट श्रृंखला बनेगी।
तीन करोड़ महिलाओं को जोड़ने का लक्ष्य
एनआरएलएम के तहत सरकार का लक्ष्य तीन करोड़ दीदियों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ना और एक करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना है। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को गांवों में जाकर इस लक्ष्य के लिए काम करने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 10.58 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय बताए गए हैं। इनमें 82 लाख से ज्यादा महिला किसान जुड़ी हैं, जबकि करीब सवा करोड़ ग्रामीण परिवार इन समूहों से जुड़े हैं।
समूहों को आमदनी का जरिया बनाने पर जोर
सरकार का फोकस अब महिलाओं को समूहों से जोड़ने के बाद उन्हें टिकाऊ आय के साधनों से जोड़ने पर है। स्वयं सहायता समूहों के जरिए बचत, बैंकिंग और ऋण की सुविधाओं तक पहुंच बढ़ाने के साथ महिलाओं को छोटे कारोबार के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, सिलाई-कढ़ाई, हस्तशिल्प और स्वच्छता उत्पादों जैसे क्षेत्रों में काम कर रहीं महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार उपलब्ध कराने पर जोर है। उद्देश्य समूह आधारित गतिविधियों को नियमित आमदनी में बदलना है।
लापरवाही और लेन-देन की शिकायत पर सख्ती
उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि समूह गठन या आर्थिक लेन-देन में गड़बड़ी की शिकायत को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। ग्राम विकास अधिकारी या बीडीओ स्तर पर लापरवाही सामने आने पर दोषियों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस नई व्यवस्था में एनआरएलएम की प्रगति का आकलन सिर्फ यह देखकर नहीं होगा कि कितने समूह बने। समूह कितने सक्रिय हैं, महिलाओं को वित्तीय सहायता मिल रही है या नहीं और उनकी आजीविका में कितना बदलाव आया—इन पहलुओं पर भी अधिकारियों की जवाबदेही होगी।


