Hot Topics

AI ने बनाए मिनी प्रोटीन, कैंसर-एचआईवी इलाज की नई राह

  • आईआईटी कानपुर और नोबेल विजेता डेविड बेकर की लैब का बड़ा शोध, लाखों रसायनों की स्क्रीनिंग के बजाय कंप्यूटर डिजाइन से दवा खोज की नई दिशा

भारत 19
कानपुर
। दवा खोज की शुरुआती प्रक्रिया को तेज और ज्यादा सटीक बनाने की दिशा में आईआईटी कानपुर के वैज्ञानिकों और 2024 के रसायन विज्ञान नोबेल पुरस्कार विजेता प्रो. डेविड बेकर की प्रयोगशाला ने अहम उपलब्धि हासिल की है। शोधकर्ताओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से ऐसे छोटे प्रोटीन डिजाइन किए हैं, जो कोशिकाओं की सतह पर मौजूद महत्वपूर्ण रिसेप्टरों को चुनिंदा तरीके से निशाना बना सकते हैं। शोध में तैयार मिनी प्रोटीन ने CXCR4 और CCR5 जैसे रिसेप्टरों को लक्ष्य किया है, जिनकी कैंसर, एचआईवी समेत कई गंभीर बीमारियों से जुड़े जैविक तंत्र में भूमिका है।

प्रतिष्ठित विज्ञान पत्रिका नेचर में प्रकाशित इस शोध में दवा खोज के पारंपरिक तरीके से अलग रणनीति अपनाई गई। वैज्ञानिकों ने पहले कंप्यूटर की मदद से ऐसे प्रोटीन डिजाइन किए, जिनके लक्षित रिसेप्टर से जुड़ने की संभावना ज्यादा थी। इसके बाद चुने गए डिजाइन का प्रयोगशाला में परीक्षण किया गया। यानी बड़ी संख्या में संभावित अणुओं की स्क्रीनिंग करने के बजाय पहले AI से संभावित उम्मीदवार तैयार किए गए और फिर उनकी जैविक क्षमता जांची गई।

जीपीसीआर रिसेप्टर को साधने की कोशिश

जी प्रोटीन युग्मित रिसेप्टर यानी GPCR कोशिकाओं की सतह पर मौजूद रिसेप्टरों का बड़ा परिवार है। इन्हें शरीर के सिग्नल स्विच की तरह समझा जा सकता है। ये बाहरी रासायनिक संकेतों को कोशिका के भीतर पहुंचाते हैं और शरीर की कई जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में भूमिका निभाते हैं। कई मौजूदा दवाएं भी GPCR को लक्ष्य बनाती हैं। लेकिन किसी खास रिसेप्टर से सटीक रूप से जुड़ने वाला ऐसा अणु तैयार करना चुनौतीपूर्ण है, जो उसकी गतिविधि को जरूरत के मुताबिक प्रभावित कर सके। AI आधारित प्रोटीन डिजाइन इसी चुनौती को कम करने की नई संभावना दिखाता है।

कंप्यूटर ने डिजाइन किया, प्रयोगशाला ने परखा

रिसर्च टीम ने AI आधारित डिजाइन की मदद से कई GPCR को लक्ष्य करने वाले मिनी प्रोटीन तैयार किए। इनमें CXCR4 और CCR5 भी शामिल हैं। दोनों रिसेप्टर कैंसर और एचआईवी से जुड़े जैविक तंत्र में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। शोध का अहम हिस्सा आईआईटी कानपुर में हुआ। यहां वैज्ञानिकों ने क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (cryo-EM) की मदद से CXCR4 से जुड़ने वाले डिजाइन किए गए मिनी प्रोटीन की संरचना का अध्ययन किया। इससे यह समझने में मदद मिली कि डिजाइन किया गया प्रोटीन रिसेप्टर से किस तरह जुड़ता है और उसकी गतिविधि को कैसे प्रभावित कर सकता है।

लाखों रसायनों की स्क्रीनिंग से बचने की उम्मीद

पारंपरिक दवा खोज में किसी नए जैविक लक्ष्य के लिए बड़ी संख्या में रासायनिक यौगिकों की जांच करनी पड़ सकती है। इस प्रक्रिया में काफी समय, पैसा और प्रयोगशाला संसाधन लगते हैं। AI आधारित डिजाइन में कंप्यूटर पहले संभावित प्रोटीन संरचनाओं की पहचान कर सकता है। इसके बाद अपेक्षाकृत कम संख्या में बेहतर उम्मीदवारों को प्रयोगशाला परीक्षण के लिए भेजा जाता है। इससे दवा खोज के शुरुआती चरण को ज्यादा तेज और व्यवस्थित बनाने की संभावना है।

आईआईटी कानपुर की टीम का अहम योगदान

इस शोध में प्रो. डेविड बेकर की प्रयोगशाला के साथ आईआईटी कानपुर की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्थान की ओर से प्रो. अरुण के. शुक्ला के साथ डॉ. रामानुज बनर्जी, मणिशंकर गांगुली, अन्नू दलाल, सुधा मिश्रा और शाची सिन्हा ने अध्ययन में योगदान दिया। आईआईटी कानपुर से जुड़े शोध कार्य को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF), जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और लेडी टाटा मेमोरियल ट्रस्ट का सहयोग मिला।

अभी दवा नहीं, आगे परीक्षणों का लंबा रास्ता

शोध के नतीजे AI आधारित प्रोटीन डिजाइन को भविष्य की दवा खोज के लिए उपयोगी तकनीक के रूप में सामने रखते हैं। हालांकि, तैयार किए गए मिनी प्रोटीन अभी कैंसर या एचआईवी की दवाएं नहीं हैं। इनके चिकित्सकीय इस्तेमाल तक पहुंचने से पहले आगे प्रयोगशाला, प्री-क्लीनिकल और आवश्यक अन्य परीक्षणों से गुजरना होगा। फिलहाल इस शोध की सबसे बड़ी अहमियत यह है कि भविष्य में दवा खोज की शुरुआती प्रक्रिया में लाखों संभावित रसायनों की जांच के बजाय AI की मदद से सीधे लक्षित प्रोटीन डिजाइन कर बेहतर उम्मीदवारों तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता है।

Tags :

Bharat 19 News

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent News