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यूपी चुनाव की तैयारी, एक हफ्ते में तैनात होंगे सेक्टर अफसर

  • सीईओ नवदीप रिणवा ने डीएम-एसपी को एक सप्ताह की समयसीमा दी, मतदान केंद्रों पर बिजली, पानी, रैंप, शौचालय और नेटवर्क की होगी जांच, संवेदनशील बूथों और EVM वेयरहाउस की सुरक्षा भी परखी जाएगी

भारत 19/ लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब बूथ स्तर तक पहुंचने लगी हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने सभी जिलों में एक सप्ताह के भीतर सेक्टर और सेक्टर पुलिस अधिकारियों की तैनाती पूरी करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही मतदान केंद्रों की सुविधाओं, सुरक्षा और संवेदनशीलता का स्थलीय सत्यापन कराने की तैयारी है।

सेक्टर अफसरों को दी जाएगी जिम्मेदारी

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिलाधिकारियों, पुलिस आयुक्तों, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि सेक्टर और सेक्टर पुलिस अधिकारियों के लिए सक्षम अधिकारियों का चयन किया जाए। तैनाती के बाद उन्हें निर्वाचन संबंधी दायित्वों और नियमों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। सेक्टर अधिकारी अपने क्षेत्र में आने वाले मतदान केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। वे बूथ की भौतिक स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और मतदान के दौरान सामने आने वाली संभावित समस्याओं की जानकारी जिला निर्वाचन अधिकारी तक पहुंचाएंगे।

बूथों पर बिजली-पानी से लेकर रैंप तक जांच

निर्वाचन विभाग ने मतदान केंद्रों पर बिजली, पेयजल, शौचालय, रैंप, फर्नीचर, छाया और मतदाताओं के पहुंच मार्ग जैसी मूलभूत सुविधाओं का सत्यापन कराने को कहा है। निरीक्षण में जहां कोई कमी मिलेगी, उसे संबंधित विभाग के समन्वय से समय रहते दूर कराया जाएगा। इसका उद्देश्य मतदान के दिन मतदाताओं और मतदान कार्मिकों को किसी तरह की असुविधा से बचाना है।

बिना मोबाइल नेटवर्क वाले बूथ होंगे चिह्नित

चुनाव के दौरान संचार व्यवस्था बनाए रखने के लिए ऐसे मतदान केंद्रों की भी पहचान की जाएगी जहां मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं है या कमजोर है। ऐसे केंद्रों की सूची तैयार कर संबंधित दूरसंचार कंपनियों के साथ समन्वय से नेटवर्क उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी। यह व्यवस्था खास तौर पर उन बूथों के लिए महत्वपूर्ण होगी जहां मतदान के दौरान प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल सूचना का आदान-प्रदान करना होता है।

संवेदनशील बूथों की होगी मैपिंग

प्रशासन पिछले चुनावों के रिकॉर्ड के आधार पर मतदान केंद्रों की संवेदनशीलता का भी आकलन करेगा। आपराधिक घटनाओं, हिंसा, आचार संहिता उल्लंघन, जब्ती और पुनर्मतदान जैसे पुराने रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर वल्नरेबिलिटी मैपिंग की जाएगी। इसके आधार पर संवेदनशील और क्रिटिकल मतदान केंद्रों को चिह्नित कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत का आकलन किया जाएगा।

EVM वेयरहाउस की सुरक्षा भी एजेंडे में

चुनाव की तैयारियों के तहत जिलों में EVM वेयरहाउस का नियमित निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था, CCTV निगरानी और रिकॉर्डिंग की समीक्षा की जाएगी। वेयरहाउस में सीपेज, दीमक या अन्य तकनीकी समस्या मिलने पर उसे समय रहते दूर कराने को कहा गया है। सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी के लिए संबंधित पुलिस अधिकारियों को भी नियमित निरीक्षण करना होगा।

पहली बार वोटरों पर भी आयोग की नजर

मतदाता सूची को लेकर भी चुनाव आयोग की तैयारी चल रही है। SIR के बाद छूटे पात्र मतदाताओं और पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को सूची में शामिल कराने के लिए विशेष अभियान चलाया जाना है। BLO घर-घर जाकर पात्र लोगों की पहचान करेंगे। जिन लोगों का नाम मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें Form-6 के जरिए पंजीकरण कराने में मदद दी जाएगी। इसका मकसद चुनाव से पहले पात्र मतदाताओं का नाम सूची में सुनिश्चित करना है।

बूथ स्तर की तैयारी पर रहेगा जोर

प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों का अगला चरण अब जमीनी सत्यापन से जुड़ रहा है। सेक्टर अधिकारियों की तैनाती और प्रशिक्षण के बाद बूथों की सुविधाएं, सुरक्षा, नेटवर्क, संवेदनशीलता और EVM व्यवस्था की समीक्षा होगी। इस पूरी प्रक्रिया के जरिए निर्वाचन विभाग चुनाव से पहले उन कमियों की पहचान करना चाहता है, जिनका असर मतदान के दिन पड़ सकता है।

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