- विशेषज्ञों की वैज्ञानिक जांच और संबंधित पक्षों की सहमति के बिना प्रतिमा हटाने की कार्रवाई नहीं होगी; श्रद्धालुओं-संतों के विरोध के बीच प्रशासन ने दिया भरोसा, उमा भारती ने भी सीएम मोहन यादव से दूसरा रास्ता निकालने को कहा
भारत 19 डेस्क
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर खड़े हनुमान मंदिर पर शुरू हुआ विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। श्रद्धालुओं और संत समाज के बढ़ते विरोध के बीच प्रशासन ने साफ कर दिया है कि विशेषज्ञों की वैज्ञानिक-तकनीकी जांच और संबंधित पक्षों की सहमति के बिना खड़े हनुमान की प्रतिमा को हटाने या स्थानांतरित करने की दिशा में कोई आगे की कार्रवाई नहीं होगी। प्रशासन ने यह भी कहा है कि आस्था और प्रतिमा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रशासन ने साफ किया, अब बिना सहमति नहीं होगा फैसला
उज्जैन एसडीएम एलएन गर्ग के मुताबिक विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन शहर की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। प्रतिमा की वर्तमान स्थिति, संरचना और मजबूती का विशेषज्ञों से वैज्ञानिक एवं तकनीकी परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद संत समाज और स्थानीय प्रतिनिधियों समेत संबंधित पक्षों से चर्चा कर ही आगे का फैसला लिया जाएगा। प्रशासन ने सोशल मीडिया पर चल रहे उन दावों को भी भ्रामक और निराधार बताया है, जिनमें कहा जा रहा था कि प्रतिमा को मशीनों या मानवीय प्रयासों से हटाने की कोशिश की जा चुकी है। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि अब तक प्रतिमा को हटाने या विस्थापित करने का ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया है।
सड़क चौड़ीकरण के बीच फंसा आस्था और विकास
खड़े हनुमान मंदिर का मामला सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन में चल रहे सड़क चौड़ीकरण और विकास कार्यों से जुड़ा है। इसी प्रक्रिया में मंदिर और प्रतिमा के भविष्य को लेकर विवाद खड़ा हुआ। करीब 170 साल पुरानी बताई जा रही इस प्रतिमा को लेकर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ संत समाज भी सक्रिय हो गया है। विवाद बढ़ने के बाद मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी। संतों और विभिन्न संगठनों ने प्रतिमा को उसी स्थान पर बनाए रखने की मांग की। महामंडलेश्वर अतुलेशानंद सरस्वती समेत संत समाज के लोगों ने मंदिर पहुंचकर हनुमान चालीसा का पाठ भी किया।
सोशल मीडिया के दावों से बढ़ा विवाद
प्रतिमा के नहीं हिलने और उसे हटाने के लिए मशीनों के इस्तेमाल से जुड़े वीडियो और दावे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए। इससे यह धारणा बनी कि प्रशासन प्रतिमा को हटाने की कोशिश कर रहा है और तकनीकी प्रयास सफल नहीं हो रहे। हालांकि प्रशासन का आधिकारिक पक्ष इससे अलग है। एसडीएम ने कहा है कि प्रतिमा को हटाने की कोशिश ही नहीं की गई है और अब विशेषज्ञों की वैज्ञानिक रिपोर्ट के बाद ही कोई अगला कदम तय होगा। ऐसे में प्रतिमा के “नहीं हिलने” से जुड़े वायरल दावों और प्रशासन के आधिकारिक बयान में अंतर इस पूरे विवाद का अहम पहलू बन गया है।
IIT इंदौर से भी ली जा रही विशेषज्ञ राय
प्रतिमा की संरचना और उसे सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किए जाने की तकनीकी संभावना को लेकर IIT इंदौर की विशेषज्ञ मदद लिए जाने की जानकारी भी सामने आई है। मंदिर के पुजारी की ओर से भी आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञों के जरिए प्रतिमा की स्थिति की जांच की बात कही गई है। यानी फिलहाल मामला सीधे प्रतिमा हटाने के बजाय पहले वैज्ञानिक जांच, फिर विशेषज्ञों की राय और उसके बाद संबंधित पक्षों की सहमति के रास्ते पर बढ़ता दिखाई दे रहा है।
उमा भारती ने मोहन यादव से निकाला दूसरा रास्ता
इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर खड़े हनुमान की प्रतिमा को नहीं हटाने का आग्रह किया है। उन्होंने विकास कार्य के लिए वैकल्पिक रास्ता निकालने की बात कही है, ताकि सड़क चौड़ीकरण भी हो और धार्मिक आस्था से जुड़े इस स्थल को भी बचाया जा सके। उमा भारती का तर्क है कि विकास परियोजना के मार्ग में आने वाले धार्मिक स्थल को हटाने के बजाय जरूरत पड़ने पर सड़क का एलाइनमेंट बदला जा सकता है। उन्होंने भोपाल में सड़क विकास से जुड़े एक उदाहरण का भी उल्लेख किया है और उज्जैन में इसी तरह का समाधान तलाशने का सुझाव दिया है।
अब वैज्ञानिक रिपोर्ट और संतों की सहमति अहम
प्रशासन के नए रुख के बाद फिलहाल खड़े हनुमान की प्रतिमा के विस्थापन की प्रक्रिया थम गई है। अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट और संत समाज तथा स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ होने वाली बातचीत अगले कदम की दिशा तय करेगी। यानी उज्जैन में फिलहाल विकास बनाम आस्था का टकराव सीधे कार्रवाई की ओर नहीं, बल्कि बातचीत और वैज्ञानिक जांच की ओर बढ़ा है। खड़े हनुमान मंदिर को लेकर बढ़ी धार्मिक संवेदनशीलता के बीच प्रशासन ने ऐसा रास्ता चुना है जिसमें सड़क विकास की जरूरत और श्रद्धालुओं की आस्था दोनों को साथ रखने की कोशिश की जा रही है।


