- नई नियमावली में भोजन, कपड़ा, आवास और ईंधन-बिजली के साथ शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन व आकस्मिक खर्च भी गणना में शामिल; कौशल, काम की प्रकृति और क्षेत्र के आधार पर तय होगी मजदूरी
भारत 19
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अब न्यूनतम मजदूरी तय करने का आधार केवल काम की प्रकृति और महंगाई तक सीमित नहीं रहेगा। उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली-2026 में मजदूर परिवार की रोजमर्रा की जरूरतों को भी मजदूरी निर्धारण का अहम आधार बनाया गया है। इसमें भोजन, कपड़ा, आवास और ईंधन-बिजली के साथ बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन और आकस्मिक खर्च को भी गणना में शामिल किया गया है। नई नियमावली 12 अगस्त 2026 को अधिसूचित की गई थी और प्रदेश में लागू हो चुकी है।
महंगाई भत्ते की गणना साल में दो बार
नई नियमावली में महंगाई भत्ते के पुनरीक्षण की प्रक्रिया भी तय की गई है। इसके लिए औद्योगिक कामगारों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक को आधार बनाया जाएगा और वर्ष में दो बार—एक अप्रैल और एक अक्टूबर से पहले—इसकी गणना की जाएगी। इससे महंगाई में बदलाव के अनुरूप मजदूरी में संशोधन की व्यवस्था को अधिक नियमित बनाया गया है। न्यूनतम मजदूरी तय करते समय केवल पारिवारिक खर्च ही नहीं, बल्कि कामगार का कौशल, काम की प्रकृति, अनुभव और भौगोलिक क्षेत्र भी ध्यान में रखा जाएगा। कामगारों को अकुशल, अर्धकुशल, कुशल और अतिकुशल श्रेणियों में वर्गीकृत करने की व्यवस्था भी नियमावली में की गई है।
पौष्टिक भोजन, कपड़ा, शिक्षा चिकित्सा का भी ख्याल
मजदूरी तय करने के लिए मानक श्रमिक परिवार की जरूरतों का ध्यान रखा गया है। कमाने वाले कर्मचारी के साथ पति या पत्नी और दो बच्चों को तीन वयस्क उपभोग इकाइयों के बराबर माना गया है। भोजन के लिए प्रति उपभोग इकाई प्रतिदिन 2700 कैलोरी और एक मानक परिवार के लिए सालाना 66 मीटर कपड़े का मानक रखा गया है। भोजन और कपड़े पर होने वाले खर्च के 10 प्रतिशत को आवासीय खर्च के तौर पर शामिल किया जाएगा। ईंधन, बिजली और अन्य विविध जरूरतों के लिए न्यूनतम मजदूरी के 20 प्रतिशत का प्रावधान रखा गया है। सबसे अहम बदलाव बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा, मनोरंजन और आकस्मिक जरूरतों को मजदूरी के आकलन में शामिल करना है। इन मदों के लिए न्यूनतम मजदूरी के 25 प्रतिशत का मानक रखा गया है। यानी मजदूरी तय करते समय परिवार की बुनियादी जरूरतों के साथ सामाजिक और आकस्मिक खर्चों को भी गणना में जगह मिलेगी।
ओवरटाइम पर दोगुनी दर से भुगतान
नई व्यवस्था में साप्ताहिक अवकाश के दिन काम कराने पर ओवरटाइम दर से भुगतान का प्रावधान है। ओवरटाइम के साथ वैकल्पिक विश्राम दिवस की व्यवस्था भी रखी गई है। कर्मचारी को लगातार दस दिन से अधिक बिना अवकाश काम कराने पर भी रोक लगाई गई है। नियमावली में वेतन पर्ची को भी अधिक पारदर्शी बनाया गया है। इसमें यूएएन, बैंक खाता, मूल वेतन, महंगाई भत्ता, अन्य भत्ते, उपस्थिति, ओवरटाइम, सकल वेतन और पीएफ-ईएसआई समेत कटौतियों तथा हाथ में मिलने वाली शुद्ध मजदूरी का विवरण दर्ज होगा। कुल वेतन से कटौती की सीमा भी 50 प्रतिशत तक रखी गई है।
पुराने मजदूरी नियमों की जगह नई व्यवस्था
उत्तर प्रदेश मजदूरी संहिता नियमावली-2026 ने प्रदेश में लागू पुराने मजदूरी भुगतान नियमावली 1936, न्यूनतम मजदूरी नियमावली 1952 और मजदूरी संहिता नियमावली 2021 की जगह ली है। नई व्यवस्था मजदूरी संहिता, 2019 के तहत राज्य में मजदूरी संबंधी प्रावधानों को लागू करने का नया ढांचा तैयार करती है। न्यूनतम मजदूरी का सवाल अब केवल “काम के बदले कितनी रकम” तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि उस रकम से श्रमिक परिवार की बुनियादी जरूरतें किस हद तक पूरी होती हैं। हालांकि वास्तविक आय में कितना इजाफा होगा, यह अलग-अलग श्रेणियों और क्षेत्रों के लिए सरकार की ओर से तय की जाने वाली अंतिम न्यूनतम मजदूरी दरों पर निर्भर करेगा।

