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पराली नहीं, खेत की ताकत बनेगा फसल अवशेष

  • कृषि विज्ञान केंद्र दिलीप नगर में पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा; आधुनिक कृषि यंत्रों से अवशेष प्रबंधन, खेत में मिलाने और मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने की तकनीक सीखकर किसानों ने पराली न जलाने का लिया संकल्प

भारत 19
कानपुर।
फसल अवशेष को खेत की समस्या मानकर जलाने के बजाय अब उसे मिट्टी की सेहत और किसान की आय बढ़ाने वाले संसाधन के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के तहत कृषि विज्ञान केंद्र, दिलीप नगर में किसानों को आधुनिक कृषि यंत्रों और वैज्ञानिक तकनीकों से अवशेष प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया। पांच दिवसीय प्रशिक्षण के समापन पर किसानों ने पराली न जलाने और फसल अवशेष को खेत के लिए उपयोगी संसाधन बनाने का संकल्प लिया।

खेत में ही अवशेष प्रबंधन की तकनीक सीखी

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को फसल अवशेषों को खेत में मिलाने और उनके उचित प्रबंधन की तकनीक समझाई गई। प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक कृषि यंत्रों के इस्तेमाल का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया, ताकि किसान अवशेषों को जलाने के बजाय उनका उपयोग खेत में ही कर सकें। प्रशिक्षण में वैज्ञानिकों ने बताया कि फसल अवशेष जलाने से मिट्टी की उर्वरता प्रभावित होने के साथ पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है। इसके विपरीत वैज्ञानिक तरीके से अवशेषों का प्रबंधन करने से मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने में मदद मिलती है। इससे खेत की सेहत को बनाए रखने में सहयोग मिल सकता है।

अवशेषों से तैयार होंगे मूल्यवर्धित उत्पाद

किसानों को फसल अवशेषों के उपयोग की विभिन्न संभावनाओं की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण में बताया गया कि अवशेषों का उचित इस्तेमाल केवल खेत में मिलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उनसे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने की संभावनाएं भी हैं। इसके लिए किसानों को आधुनिक यंत्रीकरण के जरिए अवशेषों के प्रबंधन की तकनीक का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया। डॉ. अरुण कुमार सिंह ने कहा कि फसल अवशेष को समस्या मानने के बजाय संसाधन के रूप में देखने की जरूरत है। वैज्ञानिक प्रबंधन के जरिए मिट्टी की सेहत के साथ पर्यावरण को भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

कृषि यंत्रों के सही इस्तेमाल पर जोर

प्रशिक्षण समन्वयक डॉ. खलील खान ने किसानों को कृषि यंत्रों के उचित इस्तेमाल और फसल अवशेष प्रबंधन की विभिन्न तकनीकों की जानकारी दी। प्रशिक्षण का जोर इस बात पर रहा कि किसान उपलब्ध आधुनिक कृषि यंत्रों का सही तरीके से इस्तेमाल कर खेत में अवशेषों का प्रबंधन कर सकें। प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. राजेश राय, डॉ. दीपक मिश्रा और डॉ. शशिकांत समेत ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। पांच दिवसीय प्रशिक्षण पूरा करने वाले किसानों को समापन अवसर पर प्रमाणपत्र भी वितरित किए गए।

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