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ट्रंप का बड़ा AI दांव, बनाई ‘सुपर इंटेलिजेंस फोर्स’

 जे क्लेटन को मिली नई फोर्स की कमान, 120 दिन में AI के जोखिम और अवसरों पर रिपोर्ट, अमेरिका की तकनीकी बढ़त, राष्ट्रीय सुरक्षा और भविष्य की AI नीति को लेकर ट्रंप प्रशासन ने शुरू की बड़ी रणनीतिक कवायद।  

भारत 19 डेस्क/ अमेरिका ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की वैश्विक दौड़ में अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए एक नई सरकारी टास्क फोर्स बनाई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘Super Intelligence Force’ (SIF) नाम दिया है और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक जे क्लेटन को इसका नेतृत्व सौंपा है। फोर्स को AI से जुड़े जोखिमों और अवसरों का आकलन करने के साथ यह तय करने की जिम्मेदारी दी गई है कि इस तेजी से विकसित हो रही तकनीक में अमेरिकी सरकार की भूमिका कितनी होनी चाहिए।

120 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

नई फोर्स को 120 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी है। इसमें AI के संभावित फायदे और खतरों का अध्ययन करने के अलावा संघीय सरकार की जिम्मेदारियों और मौजूदा कानूनी ढांचे की समीक्षा की जाएगी। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिए जाएंगे कि अत्याधुनिक AI से पैदा होने वाले जोखिमों से निपटने के लिए सरकार को किस तरह की व्यवस्था विकसित करनी चाहिए। जे क्लेटन अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया निदेशक हैं और अब उन्हें प्रशासन की AI रणनीति के समन्वय की अतिरिक्त जिम्मेदारी मिली है। उनके साथ फेडरल ट्रेड कमीशन के चेयरमैन एंड्रयू फर्ग्यूसन, पेंटागन के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी एमिल माइकल और ऑफिस ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट के निदेशक स्कॉट कुपोर भी फोर्स की नेतृत्व टीम में शामिल हैं।

सीधे ट्रंप को रिपोर्ट, राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा

SIF का काम केवल सरकारी विभागों के बीच समन्वय तक सीमित नहीं रहेगा। यह उपभोक्ताओं, सार्वजनिक हित समूहों, धार्मिक संगठनों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े संस्थानों और AI कंपनियों के साथ भी संवाद करेगी। फोर्स की रिपोर्ट और सिफारिशें सीधे राष्ट्रपति ट्रंप और व्हाइट हाउस चीफ ऑफ स्टाफ सूसी वाइल्स तक पहुंचेंगी।
नई पहल का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अमेरिका AI को अब केवल तकनीकी नवाचार या कारोबारी प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देख रहा। उन्नत AI मॉडल साइबर सुरक्षा, खुफिया विश्लेषण, रक्षा और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे में इस्तेमाल हो रहे हैं। ऐसे में तकनीक में बढ़त बनाए रखना अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बन गया है। जे क्लेटन ने भी संकेत दिया है कि AI में दुनिया की पहली पंक्ति में बने रहना अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि पीछे रह जाने से संभावित जोखिम बढ़ सकते हैं।

अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा के बीच फैसला

नई फोर्स का गठन ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और चीन के बीच AI, सेमीकंडक्टर और अत्याधुनिक कंप्यूटिंग तकनीक को लेकर प्रतिस्पर्धा तेज है। AI मॉडल विकसित करने से लेकर उन्हें चलाने के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता और डेटा सेंटर तक दोनों देश तकनीकी बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप प्रशासन की मौजूदा नीति में अमेरिकी कंपनियों की तकनीकी बढ़त को बनाए रखना और AI के विकास की रफ्तार को कम किए बिना सुरक्षा जोखिमों से निपटना प्रमुख लक्ष्य दिखाई देता है।

ट्रंप ने AI का नाम भी बदला

इस पहल की पृष्ठभूमि में ट्रंप प्रशासन का ‘Artificial Intelligence’ को ‘Super Intelligence’ कहने का फैसला भी महत्वपूर्ण है। 29 सितंबर को जारी कार्यकारी आदेश में संघीय एजेंसियों को आधिकारिक संचार, वेबसाइट, रिपोर्ट और नीतिगत दस्तावेजों में ‘Super Intelligence’ और ‘SI’ शब्दों का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया गया है। व्हाइट हाउस ने इस बदलाव को तकनीक की तेजी से बढ़ती क्षमताओं को प्रतिबिंबित करने वाला कदम बताया है। आदेश के तहत राष्ट्रपति के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सलाहकार को 60 दिनों के भीतर ‘Super Intelligence’ की संघीय परिभाषा तैयार करने के लिए प्रस्ताव देने को भी कहा गया है।

आगे क्या बदलेगा

अब सबसे महत्वपूर्ण नजर 120 दिन बाद आने वाली रिपोर्ट पर रहेगी। इससे पता चलेगा कि ट्रंप प्रशासन AI के विकास, सुरक्षा, घटना-रिपोर्टिंग और सरकारी निगरानी के बीच किस तरह का संतुलन तैयार करता है।Super Intelligence Force का गठन इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका AI को भविष्य की तकनीक भर नहीं, बल्कि आर्थिक ताकत, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के निर्णायक क्षेत्र के रूप में देख रहा है।

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