- जिला जज की अदालत से मस्जिद पक्ष को राहत नहीं मिलने के बाद तड़के शुरू हुई कार्रवाई, कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल और आरएएफ तैनात
भारत 19 डेस्क
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को शनिवार सुबह प्रशासन ने बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया। सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में अदालत से मस्जिद प्रबंधन को राहत नहीं मिलने के बाद प्रशासन ने यह कार्रवाई की। सुरक्षा के मद्देनजर कलेक्ट्रेट के सभी प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए और बड़ी संख्या में पुलिस के साथ आरएएफ को तैनात किया गया।
अदालत से राहत नहीं मिली, सुबह शुरू हुई कार्रवाई
मस्जिद को हटाने का विवाद लंबे समय से चल रहा था। प्रशासन की ओर से इसे सरकारी जमीन पर बना अनधिकृत निर्माण बताया गया था। मस्जिद प्रबंधन ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। जिला जज की अदालत से अपील खारिज होने के बाद प्रशासन ने शनिवार तड़के कार्रवाई शुरू कर दी। रिपोर्टों के मुताबिक, रात में ही कलेक्ट्रेट परिसर में जेसीबी और अन्य मशीनरी पहुंचा दी गई थी। सुबह भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मस्जिद को गिराने की प्रक्रिया शुरू हुई।
315 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप
प्रशासनिक कार्रवाई की जड़ में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला है। सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से जुलाई में मस्जिद को अनधिकृत निर्माण मानते हुए जमीन खाली करने का आदेश दिया गया था। मामले में करीब 315 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर कब्जे का उल्लेख किया गया और कथित अवैध कब्जे के लिए 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति का आदेश भी सामने आया। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 के तहत की गई प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ी बताई गई है।
प्रशासन बोला- सरकारी जमीन पर बना था ढांचा
सहारनपुर के डीआईजी अभिषेक सिंह के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जांच के बाद निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बना पाया था। अपील खारिज होने के बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के निर्देशों और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हुई।
मस्जिद प्रबंधन ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
दूसरी ओर मस्जिद के मुतवल्ली तनवीर अहमद ने प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें मस्जिद गिराने का अलग से कोई आदेश नहीं मिला था और केवल जमीन खाली करने का पूर्व आदेश जारी हुआ था। मस्जिद पक्ष ने कार्रवाई को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट जाने की बात कही है। मस्जिद प्रबंधन का दावा है कि यह धार्मिक स्थल करीब 150 साल पुराना है। हालांकि, प्रशासन ने इसे सरकारी भूमि पर अनधिकृत निर्माण माना है। पुराने निर्माण को लेकर दोनों पक्षों के दावों में अंतर है।
इकरा हसन को घर से निकलने से रोकने का दावा
कार्रवाई के बीच कैराना से सपा सांसद इकरा हसन को कथित तौर पर उनके आवास पर नजरबंद किए जाने की खबर भी सामने आई। इकरा हसन के मुताबिक, वह सहारनपुर जाकर अधिकारियों से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन पुलिस ने उन्हें घर से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी। उनके आवास पर रात से ही पुलिस बल तैनात किए जाने की बात कही गई। इस घटनाक्रम को लेकर समाजवादी पार्टी ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, पुलिस की ओर से की गई कार्रवाई का आधिकारिक आधार सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा बताया गया है।
शिकायत से शुरू हुआ था विवाद
मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत सरकारी जमीन पर निर्माण की शिकायत से हुई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, बजरंग दल से जुड़े रहे विकास त्यागी की शिकायत के बाद राजस्व स्तर पर जांच शुरू हुई। इसके बाद वर्ष 2025 में संबंधित लोगों को नोटिस जारी किए गए और आपत्तियां भी मांगी गईं। जांच और सुनवाई की प्रक्रिया के बाद सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने जुलाई 2026 में निर्माण को अनधिकृत घोषित कर जमीन खाली करने का आदेश दिया था।


