- बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2019 के मानहानि केस में समन रद्द करने से किया इनकार, छह हफ्ते की राहत से सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुला
भारत 19 डेस्क
बॉम्बे हाईकोर्ट से कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी किए जाने से जुड़े मानहानि मामले में झटका लगा है। न्यायमूर्ति एनआर बोरकर की एकल पीठ ने राहुल गांधी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2019 में मजिस्ट्रेट अदालत की ओर से जारी समन और उसके बाद शुरू हुई आपराधिक मानहानि की कार्यवाही रद्द करने की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर छह सप्ताह की रोक जारी रखी है, जिससे राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट जाने का मौका मिल सके।
2018 की टिप्पणी से जुड़ा है मानहानि केस
यह मामला 2018 में राफेल विमान सौदे को लेकर राहुल गांधी की एक टिप्पणी से जुड़ा है। भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी से उनकी और भाजपा से जुड़े लोगों की प्रतिष्ठा प्रभावित हुई। इसी शिकायत पर मुंबई की मजिस्ट्रेट अदालत ने अगस्त 2019 में राहुल गांधी के खिलाफ समन जारी किया था। राहुल गांधी ने मजिस्ट्रेट के इस आदेश को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी याचिका में दलील दी गई कि कथित टिप्पणी में न तो भाजपा का नाम लिया गया और न किसी स्पष्ट या निश्चित समूह को निशाना बनाया गया। ऐसे में शिकायतकर्ता के पास आपराधिक मानहानि की कार्यवाही आगे बढ़ाने का आधार नहीं था।
हाईकोर्ट ने केस रद्द करने से किया इनकार
हाईकोर्ट ने राहुल गांधी की दलील स्वीकार नहीं की और मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि इस स्तर पर कार्यवाही रद्द करने का आधार नहीं बनता। मामले से जुड़े आरोप और टिप्पणी का कानूनी प्रभाव मुकदमे की आगे की प्रक्रिया में तय किया जा सकता है। अदालत के फैसले का मतलब यह नहीं है कि राहुल गांधी को इस मामले में दोषी ठहरा दिया गया है। फिलहाल हाईकोर्ट ने सिर्फ उनके खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही को रद्द करने से इनकार किया है।
छह हफ्ते की राहत, सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं राहुल
याचिका खारिज करने के साथ हाईकोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही को छह सप्ताह तक स्थगित रखने की व्यवस्था जारी रखी है। इससे राहुल गांधी को फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने के लिए समय मिल गया है। इस अवधि में मजिस्ट्रेट अदालत में मामले की सुनवाई आगे नहीं बढ़ेगी।
भाजपा कार्यकर्ता ने दर्ज कराई थी शिकायत
मानहानि की शिकायत भाजपा कार्यकर्ता महेश श्रीश्रीमाल ने दर्ज कराई थी। उनका तर्क था कि राहुल गांधी की टिप्पणी का असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ-साथ भाजपा और उसके कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा पर भी पड़ा। राहुल गांधी की ओर से इसका विरोध करते हुए कहा गया था कि टिप्पणी किसी स्पष्ट और पहचान योग्य समूह के खिलाफ नहीं थी। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब मामला निचली अदालत में आगे बढ़ने की स्थिति में है। हालांकि छह सप्ताह की राहत के कारण तत्काल सुनवाई नहीं होगी और राहुल गांधी के पास सुप्रीम कोर्ट से राहत मांगने का विकल्प खुला है।


